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विश्व डाक दिवसः इंटरनेट के जमाने में दम तोड़ रहा चिट्ठी-पत्री का दौर
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मुख्य डाकघर शाहजहांपुर
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। इंटरनेट के जमाने में चिट्ठी-पत्री का दौर दम तोड़ रहा है। कभी ऐसा वक्त भी था जब डाक संदेश आदान-प्रदान के सबसे सशक्त माध्यम हुआ करते थे। कभी ऊंट से चिट्ठी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जाती थी।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना के मुताबिक शाहजहापुर जिले में हेनरी रिवर्स द्वारा संकलित किए ब्रिटिशकालीन गजेटियर से जिले में डाक, तार के इतिहास पर व्यापक प्रकाश पड़ता है। सन 1801 में जब जिला ब्रिटिश भारत में विलीन कर लिया तब कई पोस्टल लाइंस फतेहगढ़ तथा बरेली के लिए बनाई गईं थीं। यही शाहजहांपुर के पत्र व्यवहार संपन्न करती थी।
जिले के भीतर पत्रों को पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की थी। इस सेवा के बदले कोई भी कर नहीं लिया जाता था। संस्थागत रूप से सरकारी पत्राचार व्यवस्था 1838 में शुरू हुई। मुख्यालयों में पहली बार पृथक स्टाफ की नियुक्ति की गई। स्थानीय जमींदार लाइंस की सुरक्षा एवं खर्च के लिए उत्तरदायी थे। 1846 में इसी व्यवस्था के अंतर्गत निजी पत्राचार को भी अनुमति दे दी गई। इसके लिए दो पैसे का टिकट लगने लगा।
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1854 में शुरू हुई साम्राजीय डाक सेवा
लार्ड डलहौजी के प्रयासों से 1854 में साम्राजीय डाक सेवा शुरू हुई। इस समय शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, फतेहगढ़ के साथ सीधा जुड़ गया। यह एक मात्र लाइन थी, जिससे असुविधा होती थी। अगर खुदागंज से कोई बीसलपुर पत्र भेजना चाहे तो पहले पत्र शाहजहांपुर आता था, फिर बरेली जाता था। तब डिस्ट्रिक्ट डाक से बीसलपुर भेज दिया जाता था।
1883 में इस कार्य से जमींदारों को व्यवस्था से हटा लिया गया। डिस्ट्रिक्ट डाक भी साम्राज्यीय सेवा में विलीन कर दी गई। नए डाकघर बनाये जाने लगे। इस समय तक जिले में नौ साम्राज्यीय तथा 10 डिस्ट्रिक्ट डाक के ऑफिस थे। चार तहसीलें कटरा, कांट, खुदागंज, खुटार के अतिरिक्त रोजा में डाकघर खुल चुके थे। ये पुलिस थानों से संबद्ध थे। 1908 में इनकी संख्या बढ़कर 39 हो गई। इसमें शाहजहांपुर का मुख्य डाकघर, इसके आठ उपकार्यालय एवं 20 शाखा कार्यालय शामिल थे। आजादी के बाद उप कार्यालयों की संख्या 29 तथा जिले में डाकघरों की संख्या 177 तक पहुंच गई थी।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि नई पीढ़ी शायद ही यह विश्वास करे कि पुलिसकर्मी ग्रामीण इलाकों में ऊंटों के माध्यम से पत्र पहुंचाते थे। आज जहां कचहरी है, वह स्थान कभी ऊंटों के रखने का था। अंग्रेजों के समय डाक के साथ-साथ टेलीग्राफ की लाइंस का बिछाया जाना क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुआ। तब आज के जीपीओ का नाम ‘पोस्ट तथा टेलीग्राफ का संयुक्त ऑफिस’ था। शाहजहांपुर से तिलहर तथा रोजा गारंटीड आफिस के लिए मेटल रोड के साथ साथ टेलीग्राफ लाइन बिछाई गई थी। जब रेल आई तो रोजा को छोड़कर सभी स्थानों के लिए टेलीग्राफ लाइन को रेल लाइन के साथ जोड़ दिया गया।
संचार क्रांति के दौर में वजूद बचाने की जंग लड़ रहा विभाग
वर्तमान में जिले में 304 डाकघर उपलब्ध हैं। जहां पर स्पीड पोस्ट, एक्सप्रेस पार्सल पोस्ट, इंस्टेंट मनी ऑर्डर, बिजनेस पोस्ट, ई-पोस्ट, पोस्टल सेविंग व कई बचत योजनाएं भी उपलब्ध हैं। डाक विभाग अब बैंकिंग सेवा व मार्केटिंग के क्षेत्र में उतरने लगा है। लोगों को जरूरत का अच्छा सामान उपलब्ध कराने के लिए डाक विभाग ने मेघदूत कंपनी के उत्पादों की बिक्री शुरू की है। गंगाजल, मास्क, एलईडी आदि सामान मिल जाएगा।
डाकघर में बन सकेंगे आधार कार्ड
अब आधार कार्ड के लिए आम आदमी को भटकना नहीं पड़ेगा। डाक विभाग द्वारा शुरू की गई डाकघर में ही अब आधार कार्ड बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं इसी काउंटर से आधार कार्ड में संशोधन व अन्य कार्य भी किए जाएंगे।
रेलवे के आरक्षित टिकट की बुकिंग भी कराएं
अब रेल टिकट के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आरक्षित टिकट के लिए नजदीक के स्टेशन तक नहीं जाना होगा। डाकघर के कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर रेलवे के आरक्षित टिकटों की बुकिंग कराई जा सकती है।
एटीएम भी लगाया
डाक विभाग ने मुख्य डाकघर में अपना एटीएम भी लगवाया है। इससे किसी भी बैंक से पेमेंट लिया जा सकता है। इस सुविधा का लाभ पोस्ट ऑफिस के खाताधारक उठा रहे हैं।
आधार इनबिल्ड पेमेंट सिस्टम
इस सिस्टम से किसी भी पोस्टमैन या ग्रामीण क्षेत्र के शाखा डाकपाल या सहायक शाखा डाकपाल द्वारा किसी भी बैंक में जमा धन निकाला जा सकता है। इस सुविधा से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बैंक तक जाने की जरूरत नहीं है।
डाक विभाग आम लोगों से जुड़ा है। बेहतर व कम दरों पर जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए डाक विभाग ने मार्केटिंग व बैंकिंग सुविधाओं की शुरुआत की है। आम लोगों को आधार कार्ड बनवाने से लेकर रेलवे के आरक्षित टिकट तक डाकघरों से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- एपी सिंह, पोस्ट मास्टर, मुख्य डाकघर शाहजहांपुर।
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एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना के मुताबिक शाहजहापुर जिले में हेनरी रिवर्स द्वारा संकलित किए ब्रिटिशकालीन गजेटियर से जिले में डाक, तार के इतिहास पर व्यापक प्रकाश पड़ता है। सन 1801 में जब जिला ब्रिटिश भारत में विलीन कर लिया तब कई पोस्टल लाइंस फतेहगढ़ तथा बरेली के लिए बनाई गईं थीं। यही शाहजहांपुर के पत्र व्यवहार संपन्न करती थी।
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जिले के भीतर पत्रों को पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस विभाग की थी। इस सेवा के बदले कोई भी कर नहीं लिया जाता था। संस्थागत रूप से सरकारी पत्राचार व्यवस्था 1838 में शुरू हुई। मुख्यालयों में पहली बार पृथक स्टाफ की नियुक्ति की गई। स्थानीय जमींदार लाइंस की सुरक्षा एवं खर्च के लिए उत्तरदायी थे। 1846 में इसी व्यवस्था के अंतर्गत निजी पत्राचार को भी अनुमति दे दी गई। इसके लिए दो पैसे का टिकट लगने लगा।
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1854 में शुरू हुई साम्राजीय डाक सेवा
लार्ड डलहौजी के प्रयासों से 1854 में साम्राजीय डाक सेवा शुरू हुई। इस समय शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, फतेहगढ़ के साथ सीधा जुड़ गया। यह एक मात्र लाइन थी, जिससे असुविधा होती थी। अगर खुदागंज से कोई बीसलपुर पत्र भेजना चाहे तो पहले पत्र शाहजहांपुर आता था, फिर बरेली जाता था। तब डिस्ट्रिक्ट डाक से बीसलपुर भेज दिया जाता था।
1883 में इस कार्य से जमींदारों को व्यवस्था से हटा लिया गया। डिस्ट्रिक्ट डाक भी साम्राज्यीय सेवा में विलीन कर दी गई। नए डाकघर बनाये जाने लगे। इस समय तक जिले में नौ साम्राज्यीय तथा 10 डिस्ट्रिक्ट डाक के ऑफिस थे। चार तहसीलें कटरा, कांट, खुदागंज, खुटार के अतिरिक्त रोजा में डाकघर खुल चुके थे। ये पुलिस थानों से संबद्ध थे। 1908 में इनकी संख्या बढ़कर 39 हो गई। इसमें शाहजहांपुर का मुख्य डाकघर, इसके आठ उपकार्यालय एवं 20 शाखा कार्यालय शामिल थे। आजादी के बाद उप कार्यालयों की संख्या 29 तथा जिले में डाकघरों की संख्या 177 तक पहुंच गई थी।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि नई पीढ़ी शायद ही यह विश्वास करे कि पुलिसकर्मी ग्रामीण इलाकों में ऊंटों के माध्यम से पत्र पहुंचाते थे। आज जहां कचहरी है, वह स्थान कभी ऊंटों के रखने का था। अंग्रेजों के समय डाक के साथ-साथ टेलीग्राफ की लाइंस का बिछाया जाना क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुआ। तब आज के जीपीओ का नाम ‘पोस्ट तथा टेलीग्राफ का संयुक्त ऑफिस’ था। शाहजहांपुर से तिलहर तथा रोजा गारंटीड आफिस के लिए मेटल रोड के साथ साथ टेलीग्राफ लाइन बिछाई गई थी। जब रेल आई तो रोजा को छोड़कर सभी स्थानों के लिए टेलीग्राफ लाइन को रेल लाइन के साथ जोड़ दिया गया।
संचार क्रांति के दौर में वजूद बचाने की जंग लड़ रहा विभाग
वर्तमान में जिले में 304 डाकघर उपलब्ध हैं। जहां पर स्पीड पोस्ट, एक्सप्रेस पार्सल पोस्ट, इंस्टेंट मनी ऑर्डर, बिजनेस पोस्ट, ई-पोस्ट, पोस्टल सेविंग व कई बचत योजनाएं भी उपलब्ध हैं। डाक विभाग अब बैंकिंग सेवा व मार्केटिंग के क्षेत्र में उतरने लगा है। लोगों को जरूरत का अच्छा सामान उपलब्ध कराने के लिए डाक विभाग ने मेघदूत कंपनी के उत्पादों की बिक्री शुरू की है। गंगाजल, मास्क, एलईडी आदि सामान मिल जाएगा।
डाकघर में बन सकेंगे आधार कार्ड
अब आधार कार्ड के लिए आम आदमी को भटकना नहीं पड़ेगा। डाक विभाग द्वारा शुरू की गई डाकघर में ही अब आधार कार्ड बनाए जाएंगे। इतना ही नहीं इसी काउंटर से आधार कार्ड में संशोधन व अन्य कार्य भी किए जाएंगे।
रेलवे के आरक्षित टिकट की बुकिंग भी कराएं
अब रेल टिकट के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आरक्षित टिकट के लिए नजदीक के स्टेशन तक नहीं जाना होगा। डाकघर के कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर रेलवे के आरक्षित टिकटों की बुकिंग कराई जा सकती है।
एटीएम भी लगाया
डाक विभाग ने मुख्य डाकघर में अपना एटीएम भी लगवाया है। इससे किसी भी बैंक से पेमेंट लिया जा सकता है। इस सुविधा का लाभ पोस्ट ऑफिस के खाताधारक उठा रहे हैं।
आधार इनबिल्ड पेमेंट सिस्टम
इस सिस्टम से किसी भी पोस्टमैन या ग्रामीण क्षेत्र के शाखा डाकपाल या सहायक शाखा डाकपाल द्वारा किसी भी बैंक में जमा धन निकाला जा सकता है। इस सुविधा से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बैंक तक जाने की जरूरत नहीं है।
डाक विभाग आम लोगों से जुड़ा है। बेहतर व कम दरों पर जरूरी सामान मुहैया कराने के लिए डाक विभाग ने मार्केटिंग व बैंकिंग सुविधाओं की शुरुआत की है। आम लोगों को आधार कार्ड बनवाने से लेकर रेलवे के आरक्षित टिकट तक डाकघरों से उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- एपी सिंह, पोस्ट मास्टर, मुख्य डाकघर शाहजहांपुर।