{"_id":"668f23ee7c5ddad27f002404","slug":"villages-surrounded-by-floods-in-tilhar-crops-submerged-shahjahanpur-news-c-122-1-spn1003-122542-2024-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: तिलहर में बाढ़ से चौतरफा घिरे गांव, फसलें जलमग्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: तिलहर में बाढ़ से चौतरफा घिरे गांव, फसलें जलमग्न
विज्ञापन
गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद
शाहजहांपुर/तिलहर। तहसील क्षेत्र में रामगंगा समेत गर्रा और बहगुल नदियों की बाढ़ से करीब डेढ़ दर्जन गांव चौतरफा घिर गए हैं। कई गांवों के संपर्क मार्ग कट जाने से ग्रामीणों को सुरक्षित ठिकानों पर पलायन करने में भी दिक्कत हो रही है।
निगोही मार्ग गांव रटा के पास गर्रा का दो फुट पानी बह रहा है। लोग पानी में घुसकर वाहनों से निकल रहे हैं। रामगंगा का पानी गांव बरहा मोहब्बतपुर, अजमाबाद ,बिहारीपुर, रटा, रटी, चितीबोझी व घनश्यामपुर में घुस गया है। खुदागंज व गढ़िया रंगीन क्षेत्र के चार-चार गांव बाढ़ से घिर गए हैं।
इन गांवों की गलियों में पानी प्रवेश कर गया है। एसडीएम अंजलि गंगवार ने बाढ़ प्रभावित खुदागंज क्षेत्र व अन्य क्षेत्रों में बाढ़ और राहत चौकियों का निरीक्षण किया। गांव बरहा के प्रधान के पति अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि बाढ़ गर्रा के तटबंधों के ऊपर पहुंच जाने से गांव में पानी प्रवेश कर चुका है।
विज्ञापन
कठिना नदी उफान पर होने से पानी ढकिया रघा से गांव प्रहलादपुर होकर गर्रा नदी में जा रहा है। एसडीएम ने बताया कि खुदागंज क्षेत्र में बीसलपुर सीमा क्षेत्र में लगने वाले गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बताया कि गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित गांंवों की सैकड़ों एकड़ भूमि में बोई फसलें जलमग्न हो गई हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी पैदा हो गई है। संवाद
--
ग्रामीणों ने कहा-राहत नाकाफी
यहां पर जानवरों के लिए चारा नहीं है। बाढ़ पीड़ितों के लिए अब तक कोई राहत सामग्री भी नहीं पहुंची है। शासन-प्रशासन की व्यवस्थाएं बदहाल हैं। पीने के पानी की दिक्कत भी है।
- सत्येंद्र सिंह, गांव रटा
-- --
घरों में पानी भर गया है, बाहर निकलने की जगह नहीं बची है। प्रशासन को तत्काल राहत व्यवस्था करनी चाहिए। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सांप-बिच्छू का खतरा भी है।
- सादिक अली, गांव बिहारीपुर
-- -- -
जानवरों के लिए रखा हुआ भूसा बाढ़ के पानी में बह गया है। जानवर भूखे हैं। प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं पहुंचाई गई। स्थिति खराब हो रही है। बिजली न आने से अंधेरे में रात काटना भी मुश्किल हो जाएगा।
- रामवीर सिंह, रटा
--
जलालाबाद व कलान क्षेत्र के तटीय गांवों तक पहुंचा पानी, संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन ठप
शाहजहांपुर। दो दिन से जिले में बारिश का दौर थमा होने के बावजूद उत्तराखंड के बांधों-बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी की निकासी जारी रहने से जिले में सभी नदियों में पानी बढ़ रहा है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सुबह प्राप्त सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी लगभग 56 हजार क्यूसेक घटकर 58541 क्यूसेक हो गई है, लेकिन दो दिन पहले नरौरा से निकला 1.20 लाख क्यूसेक पानी बदायूं के कछला घाट होकर देर रात जिले की सीमा में पहुंचा तो मिर्जापुर से लेकर कलान के भैंसार बांध तक गंगा में उफान बढ़ गया।
किच्छा, खो, हरेली, रामनगर, पीली, लालपुर, धौरा व बहगुुल डाम से रामगंगा में 17644 क्यूसेक पानी निकला। पानी की यह मात्रा मंगलवार की तुलना में 28458 क्यूसेक कम है, लेकिन एक दिन पहले तक भारी निकासी वाला पानी यहां पहुंचने पर बाढ़ आपदा बढ़ा रहा है।
सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर ने बताया कि सुबह अजीजगंज डाम पर गर्रा का जलस्तर 148.60 मीटर मापा गया, लेकिन दिन में पानी बढ़ने से दोपहर बाद तक जलस्तर खतरे के निशान को लांघकर 148.85 मीटर हो गया।
उन्होंने बताया कि बांधों-बैराजों से रिलीज हो रहे पानी की मात्रा कम होने से गंगा, रामगंगा के जलस्तर में कमी आ सकती है। बारिश थमी रही तो खन्नौत में भी पानी घटेगा, लेकिन गर्रा में अभी दो दिन तक पानी बढ़ने के आसार है। एक्सईएन के अनुसार मिर्जापुर क्षेत्र के कीलापुर में तटबंध बाढ़ नहीं बल्कि बारिश से क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन उसे ठीक करा लिया गया है। संवाद
-- नदियों का जलस्तर (मीटर में): एक नजर
नदी खतरे का निशान मौजूदा जलस्तर जलस्तर में वृद्धि
गंगा 143.65 143.00 1.92
रामगंगा 161.50 160.68 0.22
गर्रा 148.80 148.85 0.30
खन्नौत 145.75 146.75 0.90
-- परौर क्षेत्र में फसलें डूबीं, दहेेलिया में भूमि का कटान
परौर। क्षेत्र में रामगंगा पूरे उफान पर आ गई है। हैदलपुर में तमाम किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। दहेलिया गांव में नदी की तेज धार किनारे की जमीनें लील रही है। रामगंगा का पानी मोहनपुर, नारायणनगर, बिचपुरी आदि गांवों के पास पहुंच जाने से ग्रामीण अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। कटान से नारायणनगर से परौर का पगडंडी वाला रास्ता कट गया है। हैदलपुर गांव की तरफ बाढ़ के रुख करने से सेठपाल कुशवाहा की चार बीघा मूंगफली, जगदीश व फूल सिंह का 20 बीघा मेंथा, राम शंकर कुशवाहा का 15 बीघा मेंथा और अन्य कई किसानों की फसलें रामगंगा में डूब गई हैं। दहेलिया गांव के किनारे लालता स्वरूप की जमीन बाढ़ में कट रही है। संवाद
--
कोलाघाट-कसारी मार्ग कटा, कमर तक पानी
जलालाबाद। मंगलवार रात से रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ तटीय गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो चला। देर रात कोलाघाट रोड से कसारी गांव को जाने वाला संपर्क मार्ग कट गया और वहां कमर की गहराई का पानी बह रहा है। आवागमन का रास्ता बंद हो जाने से ग्रामीण काफी परेशान हैं। कोलाघाट पुल से पहले रामगंगा और बहगुल नदियां एकाकार हो जाने से संपर्क मार्ग कटने के साथ कसारी गांव बाढ़ से घिरता जा रहा है।
पड़ोस के छोटी कसारी, मंझरा, अतरी, बीघापुर, सिठौली आदि गांवों तक पानी पहुंचने की आशंका है। संपर्क मार्ग कट जाने से लोग विभिन्न परेशानियों से जूझ रहे है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवागमन के लिए नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। संवाद
-- कसारी में आज आनी है बेटी की बरात
जलालाबाद। कसारी गांव के रामलड़ैते की बेटी नैना की बृहस्पतिवार को बरात आनी है, लेकिन गांंव समेत आसपास के सभी संपर्क मार्ग कट जाने से उनका परिवार बहुत परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि आने वाले दो तीन दिनों में गांव में तीन बेटियों की शादी है। आवागमन के सभी रास्तों पर पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। ऐसे में संबंधित परिवार बहुत परेशान हैं। संवाद
-- खुदागंज के बाढ़ प्रभावित गांवों से पलायन कर रहे ग्रामीण
खुदागंज। नदियों का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में गर्रा और बहगुल नदियां किनारे बसे करीब तीन दर्जन गांवों में कहर ढाने लगी हैं। तमाम किसानों की धान, मक्का समेत कई फसलें डूब चुकी हैं और अब बाढ़ गांवों की ओर बढ़ रही है। खुदागंज से निगोही और पुवायां जाने वाले रोड पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आवागमन बंद करा दिया है। हल्के चार पहिया वाहनों ओर दोपहिया वाहनों पर भी पाबंदी लागू की गई है। गर्रा ने तटीय गांव कंधरापुर, भाऊपुर, भगवतीपुर, खिरिया, रामेश्वर गौंटिया आदि को अपनी चपेट में ले लिया है। इन गांवों के संपर्क मार्ग टूट गए हैं। उधर, कठिना नदी के विकराल रूप लेने से किनारे के गांव मझिला, चमरुआ, सकतिया, इंद्रपुर आदि बाढ़ की चपेट में है। इंद्रपुर गांव में पानी भर जाने से लोग अपना सामान सुरक्षित जगह पर ले जा रहे हैं। संवाद
-- -- -
ऊनकलां के तमाम घरों में घुसा बाढ़ का पानी
निगोही। कठिना नदी में आई बाढ़ से ऊनकलां गांव के तमाम घरों में पानी घुस जाने से ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही मवेशियों के लिए चारे का भी संकट पैदा हो गया है। मंगलवार शाम से गांव के उत्तरी दिशा में आबादी के अंदर पानी घुस आया। गांव के शाहजुद्दीन खां, मनशेर खां, शमशुद्दीन खां, शफीक खां समेत दर्जनों घरों में पानी भर गया। गलियों में दरवाजों के बाहर पानी जमा होने से लोगों का बाहर निकलना कठिन हो गया। ग्राम प्रधान के भतीजे अनीस खां का कहना है कि तहसील स्तर से कोई भी सहायता अब तक गांव नहीं पहुंची है। उधर, रेलवे के अंडरपास में पानी भर जाने से बावर, नौगवां, हरपरा, चन्योरा आदि गांवों को जाने वाला रास्ता बंद हो जाने से ग्रामीणों को घर जाने को तीन से चार किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर सपा मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने डीएम को प्रार्थना पत्र भेजा है। संवाद
000
जैतीपुर के अस्पताल समेत गांवों में घुसा पानी
जैतीपुर। बहगुल नदी के किनारे बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित क्षेत्र के सुरजूपुर, बेहटा मुरादपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन ठहरने को मजबूर हो गया। बेहटा मुरादपुर के प्राथमिक विद्यालय में पानी भरने से बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। स्कूल के पास लगे बिजली ट्रांसफार्मर से करंट की आशंका से भयभीत शिक्षक स्कूल के अंदर बने रहे और आपूर्ति कटने के बाद ही बाहर निकले। सुरजूपुर में गलियों समेत हर घर जल योजना की टंकी के परिसर में पानी भर जाने से पेयजल आपूर्ति बंद रही। वहीं, रामगंगा किनारे धुबला करीमनगर, केसीनगला, रसीदपुर, ख़ूबपुर आदि गांवों के खेतों में पानी भरने लगा है। अस्पताल परिसर जलमग्न होने से लोगों को घुटनों तक पानी में घुसकर दवा लेने जाना पड़ा। सीएचसी प्रभारी ने स्टाफ के घरेलू सामान को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट करा दिया। एक बैलगाड़ी की मदद से स्टाफ को बाहर निकाला गया। आवासीय परिसर की विद्युत आपूर्ति काट दी गई ताकि शॉर्ट सर्किट या करंट न फैले। सीएचसी प्रभारी ने इमरजेंसी व प्रसूति सेवाएं कटरा व तिलहर सीएचसी से संचालित करने की व्यवस्था की, लेकिन बाढ़ में वहां तक जाना भी कठिन है। संवाद
-- नागरपाल-चांददापुुर मार्ग पर भरा गर्रा का पानी
सेहरामऊ दक्षिणी। क्षेत्र के गांव नागरपाल में गर्रा नदी पर बने पुल से चांदापुर जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग पर कमर से पानी बहने लगा है। इस कारण ग्रामीणों के रिश्तेदारों को लौटकर हरदोई बाइपास से बरेली मोड़ जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाली नहर रोड से निकलना पड़ा। इस रास्ते से उन्हें करीब 12 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करके चांदापुर तक जाना पड़ रहा है। संवाद
विज्ञापन
निगोही मार्ग गांव रटा के पास गर्रा का दो फुट पानी बह रहा है। लोग पानी में घुसकर वाहनों से निकल रहे हैं। रामगंगा का पानी गांव बरहा मोहब्बतपुर, अजमाबाद ,बिहारीपुर, रटा, रटी, चितीबोझी व घनश्यामपुर में घुस गया है। खुदागंज व गढ़िया रंगीन क्षेत्र के चार-चार गांव बाढ़ से घिर गए हैं।
विज्ञापन
इन गांवों की गलियों में पानी प्रवेश कर गया है। एसडीएम अंजलि गंगवार ने बाढ़ प्रभावित खुदागंज क्षेत्र व अन्य क्षेत्रों में बाढ़ और राहत चौकियों का निरीक्षण किया। गांव बरहा के प्रधान के पति अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि बाढ़ गर्रा के तटबंधों के ऊपर पहुंच जाने से गांव में पानी प्रवेश कर चुका है।
विज्ञापन
कठिना नदी उफान पर होने से पानी ढकिया रघा से गांव प्रहलादपुर होकर गर्रा नदी में जा रहा है। एसडीएम ने बताया कि खुदागंज क्षेत्र में बीसलपुर सीमा क्षेत्र में लगने वाले गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बताया कि गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित गांंवों की सैकड़ों एकड़ भूमि में बोई फसलें जलमग्न हो गई हैं। पशुओं के लिए चारे की समस्या भी पैदा हो गई है। संवाद
ग्रामीणों ने कहा-राहत नाकाफी
यहां पर जानवरों के लिए चारा नहीं है। बाढ़ पीड़ितों के लिए अब तक कोई राहत सामग्री भी नहीं पहुंची है। शासन-प्रशासन की व्यवस्थाएं बदहाल हैं। पीने के पानी की दिक्कत भी है।
- सत्येंद्र सिंह, गांव रटा
घरों में पानी भर गया है, बाहर निकलने की जगह नहीं बची है। प्रशासन को तत्काल राहत व्यवस्था करनी चाहिए। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सांप-बिच्छू का खतरा भी है।
- सादिक अली, गांव बिहारीपुर
जानवरों के लिए रखा हुआ भूसा बाढ़ के पानी में बह गया है। जानवर भूखे हैं। प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं पहुंचाई गई। स्थिति खराब हो रही है। बिजली न आने से अंधेरे में रात काटना भी मुश्किल हो जाएगा।
- रामवीर सिंह, रटा
जलालाबाद व कलान क्षेत्र के तटीय गांवों तक पहुंचा पानी, संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन ठप
शाहजहांपुर। दो दिन से जिले में बारिश का दौर थमा होने के बावजूद उत्तराखंड के बांधों-बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी की निकासी जारी रहने से जिले में सभी नदियों में पानी बढ़ रहा है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सुबह प्राप्त सूचनाओं के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी लगभग 56 हजार क्यूसेक घटकर 58541 क्यूसेक हो गई है, लेकिन दो दिन पहले नरौरा से निकला 1.20 लाख क्यूसेक पानी बदायूं के कछला घाट होकर देर रात जिले की सीमा में पहुंचा तो मिर्जापुर से लेकर कलान के भैंसार बांध तक गंगा में उफान बढ़ गया।
किच्छा, खो, हरेली, रामनगर, पीली, लालपुर, धौरा व बहगुुल डाम से रामगंगा में 17644 क्यूसेक पानी निकला। पानी की यह मात्रा मंगलवार की तुलना में 28458 क्यूसेक कम है, लेकिन एक दिन पहले तक भारी निकासी वाला पानी यहां पहुंचने पर बाढ़ आपदा बढ़ा रहा है।
सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर ने बताया कि सुबह अजीजगंज डाम पर गर्रा का जलस्तर 148.60 मीटर मापा गया, लेकिन दिन में पानी बढ़ने से दोपहर बाद तक जलस्तर खतरे के निशान को लांघकर 148.85 मीटर हो गया।
उन्होंने बताया कि बांधों-बैराजों से रिलीज हो रहे पानी की मात्रा कम होने से गंगा, रामगंगा के जलस्तर में कमी आ सकती है। बारिश थमी रही तो खन्नौत में भी पानी घटेगा, लेकिन गर्रा में अभी दो दिन तक पानी बढ़ने के आसार है। एक्सईएन के अनुसार मिर्जापुर क्षेत्र के कीलापुर में तटबंध बाढ़ नहीं बल्कि बारिश से क्षतिग्रस्त हुआ, लेकिन उसे ठीक करा लिया गया है। संवाद
नदी खतरे का निशान मौजूदा जलस्तर जलस्तर में वृद्धि
गंगा 143.65 143.00 1.92
रामगंगा 161.50 160.68 0.22
गर्रा 148.80 148.85 0.30
खन्नौत 145.75 146.75 0.90
परौर। क्षेत्र में रामगंगा पूरे उफान पर आ गई है। हैदलपुर में तमाम किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। दहेलिया गांव में नदी की तेज धार किनारे की जमीनें लील रही है। रामगंगा का पानी मोहनपुर, नारायणनगर, बिचपुरी आदि गांवों के पास पहुंच जाने से ग्रामीण अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। कटान से नारायणनगर से परौर का पगडंडी वाला रास्ता कट गया है। हैदलपुर गांव की तरफ बाढ़ के रुख करने से सेठपाल कुशवाहा की चार बीघा मूंगफली, जगदीश व फूल सिंह का 20 बीघा मेंथा, राम शंकर कुशवाहा का 15 बीघा मेंथा और अन्य कई किसानों की फसलें रामगंगा में डूब गई हैं। दहेलिया गांव के किनारे लालता स्वरूप की जमीन बाढ़ में कट रही है। संवाद
कोलाघाट-कसारी मार्ग कटा, कमर तक पानी
जलालाबाद। मंगलवार रात से रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ तटीय गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो चला। देर रात कोलाघाट रोड से कसारी गांव को जाने वाला संपर्क मार्ग कट गया और वहां कमर की गहराई का पानी बह रहा है। आवागमन का रास्ता बंद हो जाने से ग्रामीण काफी परेशान हैं। कोलाघाट पुल से पहले रामगंगा और बहगुल नदियां एकाकार हो जाने से संपर्क मार्ग कटने के साथ कसारी गांव बाढ़ से घिरता जा रहा है।
पड़ोस के छोटी कसारी, मंझरा, अतरी, बीघापुर, सिठौली आदि गांवों तक पानी पहुंचने की आशंका है। संपर्क मार्ग कट जाने से लोग विभिन्न परेशानियों से जूझ रहे है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवागमन के लिए नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। संवाद
जलालाबाद। कसारी गांव के रामलड़ैते की बेटी नैना की बृहस्पतिवार को बरात आनी है, लेकिन गांंव समेत आसपास के सभी संपर्क मार्ग कट जाने से उनका परिवार बहुत परेशान है। ग्रामीणों ने बताया कि आने वाले दो तीन दिनों में गांव में तीन बेटियों की शादी है। आवागमन के सभी रास्तों पर पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। ऐसे में संबंधित परिवार बहुत परेशान हैं। संवाद
खुदागंज। नदियों का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में गर्रा और बहगुल नदियां किनारे बसे करीब तीन दर्जन गांवों में कहर ढाने लगी हैं। तमाम किसानों की धान, मक्का समेत कई फसलें डूब चुकी हैं और अब बाढ़ गांवों की ओर बढ़ रही है। खुदागंज से निगोही और पुवायां जाने वाले रोड पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने आवागमन बंद करा दिया है। हल्के चार पहिया वाहनों ओर दोपहिया वाहनों पर भी पाबंदी लागू की गई है। गर्रा ने तटीय गांव कंधरापुर, भाऊपुर, भगवतीपुर, खिरिया, रामेश्वर गौंटिया आदि को अपनी चपेट में ले लिया है। इन गांवों के संपर्क मार्ग टूट गए हैं। उधर, कठिना नदी के विकराल रूप लेने से किनारे के गांव मझिला, चमरुआ, सकतिया, इंद्रपुर आदि बाढ़ की चपेट में है। इंद्रपुर गांव में पानी भर जाने से लोग अपना सामान सुरक्षित जगह पर ले जा रहे हैं। संवाद
ऊनकलां के तमाम घरों में घुसा बाढ़ का पानी
निगोही। कठिना नदी में आई बाढ़ से ऊनकलां गांव के तमाम घरों में पानी घुस जाने से ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही मवेशियों के लिए चारे का भी संकट पैदा हो गया है। मंगलवार शाम से गांव के उत्तरी दिशा में आबादी के अंदर पानी घुस आया। गांव के शाहजुद्दीन खां, मनशेर खां, शमशुद्दीन खां, शफीक खां समेत दर्जनों घरों में पानी भर गया। गलियों में दरवाजों के बाहर पानी जमा होने से लोगों का बाहर निकलना कठिन हो गया। ग्राम प्रधान के भतीजे अनीस खां का कहना है कि तहसील स्तर से कोई भी सहायता अब तक गांव नहीं पहुंची है। उधर, रेलवे के अंडरपास में पानी भर जाने से बावर, नौगवां, हरपरा, चन्योरा आदि गांवों को जाने वाला रास्ता बंद हो जाने से ग्रामीणों को घर जाने को तीन से चार किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर सपा मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने डीएम को प्रार्थना पत्र भेजा है। संवाद
000
जैतीपुर के अस्पताल समेत गांवों में घुसा पानी
जैतीपुर। बहगुल नदी के किनारे बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित क्षेत्र के सुरजूपुर, बेहटा मुरादपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन ठहरने को मजबूर हो गया। बेहटा मुरादपुर के प्राथमिक विद्यालय में पानी भरने से बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। स्कूल के पास लगे बिजली ट्रांसफार्मर से करंट की आशंका से भयभीत शिक्षक स्कूल के अंदर बने रहे और आपूर्ति कटने के बाद ही बाहर निकले। सुरजूपुर में गलियों समेत हर घर जल योजना की टंकी के परिसर में पानी भर जाने से पेयजल आपूर्ति बंद रही। वहीं, रामगंगा किनारे धुबला करीमनगर, केसीनगला, रसीदपुर, ख़ूबपुर आदि गांवों के खेतों में पानी भरने लगा है। अस्पताल परिसर जलमग्न होने से लोगों को घुटनों तक पानी में घुसकर दवा लेने जाना पड़ा। सीएचसी प्रभारी ने स्टाफ के घरेलू सामान को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट करा दिया। एक बैलगाड़ी की मदद से स्टाफ को बाहर निकाला गया। आवासीय परिसर की विद्युत आपूर्ति काट दी गई ताकि शॉर्ट सर्किट या करंट न फैले। सीएचसी प्रभारी ने इमरजेंसी व प्रसूति सेवाएं कटरा व तिलहर सीएचसी से संचालित करने की व्यवस्था की, लेकिन बाढ़ में वहां तक जाना भी कठिन है। संवाद
सेहरामऊ दक्षिणी। क्षेत्र के गांव नागरपाल में गर्रा नदी पर बने पुल से चांदापुर जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग पर कमर से पानी बहने लगा है। इस कारण ग्रामीणों के रिश्तेदारों को लौटकर हरदोई बाइपास से बरेली मोड़ जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाली नहर रोड से निकलना पड़ा। इस रास्ते से उन्हें करीब 12 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करके चांदापुर तक जाना पड़ रहा है। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद

गांव कसारी से पहले कटा रास्ता। संवाद