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Shahjahanpur News: एक यूनिट रक्त से मिलती हैं तीन जिंदगियां
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डॉ. जीतूराज सिंह। संवाद
शाहजहांपुर। आपका केवल एक यूनिट रक्त तीन अलग-अलग लोगों की जान बचाने में मदद कर सकता है। रक्तदान केवल एक दान नहीं, बल्कि किसी परिवार के लिए उम्मीद, किसी मरीज के लिए नया जीवन और किसी जरूरतमंद के लिए मुस्कान है। 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस पर राजकीय मेडिकल कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।
रक्तकोष विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. जीतूराज सिंह ने बताया कि रक्तदान एक सुरक्षित और जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसे हर स्वस्थ व्यक्ति को अपनाना चाहिए। रक्तदान से किसी भी तरह की कमजोरी नहीं होती, बल्कि यह दिल के दौरे के खतरे को कम करने और शरीर में आयरन के स्तर को संतुलित रखने में मददगार है।
मानव शरीर में इतनी क्षमता होती है कि अगर एक यूनिट रक्तदान कर रहे हैं तो अगले 24 घंटों में बोनमैरो उसकी भरपाई करना शुरू कर देता है। कुछ लोगों को संक्रमण का डर होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आजकल रक्तदान में प्रयुक्त सभी सामान डिस्पोजेबल होता है। यदि आपको कोई गंभीर संक्रामक बीमारी है, आप गर्भवती हैं, या रक्तदान के दिन आपको हल्का बुखार या सर्दी-जुकाम है, तो आपको ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए।
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उनका कहना है कि संस्थाएं शिविर के जरिए रक्तदान कराती हैं। इन शिविरों का उद्देश्य केवल रक्त एकत्र करना नहीं, बल्कि लोगों को यह एहसास कराना है कि उनका एक छोटा-सा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है।
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यह बरतें सावधानी
- स्वस्थ व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 से 65 वर्ष है, वह रक्तदान कर सकता है।
- रक्तदाता का हिमोग्लोबिन 12.5 एवं वजन 45 किग्रा से कम नहीं होना चाहिए।
- हर तीन महीने के बाद किया जा सकता है रक्तदान।
-रक्तदान खाली पेट नहीं करें, इससे पहले सामान्य भोजन जरूरी।
- फार्म भरते समय सही और सभी जानकारी पूरी ईमानदारी से दें।
- रक्तदान के बाद आगामी 24 घटे तक धूम्रपान, तंबाकू, शराब का इस्तेमाल नहीं करें।
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इनके लिए काम आता आपका खून
- सड़क दुर्घटना या अन्य आपदा में घायलों के लिए।
-प्रसव के दौरान मां के लिए।
- नवजात शिशु का रक्त बदलने के लिए।
- थैलेसीमिया, हिमोफिलिया, कैंसर आदि के मरीजों के लिए।
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रक्तकोष विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. जीतूराज सिंह ने बताया कि रक्तदान एक सुरक्षित और जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसे हर स्वस्थ व्यक्ति को अपनाना चाहिए। रक्तदान से किसी भी तरह की कमजोरी नहीं होती, बल्कि यह दिल के दौरे के खतरे को कम करने और शरीर में आयरन के स्तर को संतुलित रखने में मददगार है।
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मानव शरीर में इतनी क्षमता होती है कि अगर एक यूनिट रक्तदान कर रहे हैं तो अगले 24 घंटों में बोनमैरो उसकी भरपाई करना शुरू कर देता है। कुछ लोगों को संक्रमण का डर होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आजकल रक्तदान में प्रयुक्त सभी सामान डिस्पोजेबल होता है। यदि आपको कोई गंभीर संक्रामक बीमारी है, आप गर्भवती हैं, या रक्तदान के दिन आपको हल्का बुखार या सर्दी-जुकाम है, तो आपको ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए।
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उनका कहना है कि संस्थाएं शिविर के जरिए रक्तदान कराती हैं। इन शिविरों का उद्देश्य केवल रक्त एकत्र करना नहीं, बल्कि लोगों को यह एहसास कराना है कि उनका एक छोटा-सा प्रयास किसी की जिंदगी बचा सकता है।
यह बरतें सावधानी
- स्वस्थ व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 से 65 वर्ष है, वह रक्तदान कर सकता है।
- रक्तदाता का हिमोग्लोबिन 12.5 एवं वजन 45 किग्रा से कम नहीं होना चाहिए।
- हर तीन महीने के बाद किया जा सकता है रक्तदान।
-रक्तदान खाली पेट नहीं करें, इससे पहले सामान्य भोजन जरूरी।
- फार्म भरते समय सही और सभी जानकारी पूरी ईमानदारी से दें।
- रक्तदान के बाद आगामी 24 घटे तक धूम्रपान, तंबाकू, शराब का इस्तेमाल नहीं करें।
इनके लिए काम आता आपका खून
- सड़क दुर्घटना या अन्य आपदा में घायलों के लिए।
-प्रसव के दौरान मां के लिए।
- नवजात शिशु का रक्त बदलने के लिए।
- थैलेसीमिया, हिमोफिलिया, कैंसर आदि के मरीजों के लिए।