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देश के हालात पहले से बदतर: मुनव्वर राना
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां (शाहजहांपुर)।
Updated Mon, 29 May 2017 12:02 AM IST
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शायर मुनव्वर राना
- फोटो : अमर उजाला
हुकूमत कमजोर होने से बढ़ा अपराधों का ग्राफ
साहित्य तक दलित, हिंदू, मुस्लिम में बंटा
अगर नेहरू और जिन्ना की मां भी बातचीत में शामिल होती तो नहीं होता देश का बंटवारा
पुवायां में कवि सम्मेलन और मुशायरे में शामिल होने आए देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि देश का माहौल पहले से और ज्यादा बदतर है। इसका कारण है कि कमजोर हुकूमत के कारण अपराधों का ग्राफ बढ़ गया है। शायरी और कविता में आई गिरावट का कारण उन्होंने संचार क्रांति को बताते हुए कहा कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा बेवकूफ भारत में रहते हैं, यहां खाने को रोटी भले ही न हो, लेकिन महंगा मोबाइल जरूर होना चाहिए। कीमती मोबाइल स्टेटस सिंबल बन गया है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता के आवास पर हरिओम त्रिवेदी ने उनसे बातचीत की।
सवाल : देश में संचार क्रांति से शायरी और कविता पर क्या असर पड़ा है।
जवाब : बहुत बुरा असर पड़ा है। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स ऐप पर ऐसे ऐसे लोग शायरी और कविता लिखते हैं, जिन्हें कविता और शायरी के बारे में कुछ नहीं पता है। संचार क्रांति से समाज में बुराइयों का प्रवेश हुआ है, लोगों के सोशल प्लेटफार्म पर पांच हजार मित्र हैं, लेकिन घर में भाई तक से बोलचाल नहीं है। चिट्ठी गुजरे जमाने की बात हो गई है। कलम से दोस्ती चली गई। आने वाली पीढ़ी चिट्ठी के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ेगी। दुनिया भर में सबसे ज्यादा बेवकूफ भारत में रहते हैं। लोगों को खाने को रोटी भले ही न मिले, लेकिन महंगा और एक से अधिक मोबाइल होना चाहिए। दूसरे मुल्कों में लोग घर में आते ही मोबाइल बंद कर देते हैं और लैंडलाइन फोन का प्रयोग करते हैं।
सवाल : साहित्य में भी गिरावट आई है क्या?
जवाब : हां बिल्कुल। साहित्य अब हिंदी, उर्दू के अलावा दलित, सवर्ण में बंट गया है, जो साहित्य जगत के लिए चिंता की बात है। कुछ लोग मंच पर कहते हैं हिंदी गजल, गजल हिंदी, उर्दू, पंजाबी कैसे हो सकती है। गजल तो गजल है। गजल महबूव से बातें करने का जरिया है।
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सवाल : आपने मां पर बहुत लिखा है।
जवाब : हां मुझे फख्र है कि देश भर में मैंने मां पर सबसे ज्यादा लिखा है, सबको अपनी मां से बहुत ही ज्यादा मोहब्बत होनी चाहिए। घर में चाहें कुछ भी न हो, लेकिन मां जरूर हो।
सवाल : आपने अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटाया था, आखिर क्यों?
जवाब : देश के हालात से क्षुब्ध होकर। मुल्क आजाद है, लेकिल कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं। पुलिस कार्रवाई जाति और धर्म के आधार पर करे तो सम्मान का क्या मतलब? पुलिस की बर्बाद की गई जिंदगी आबाद नहीं हो सकती। भ्रष्टाचार नक्सल समस्या का जनक है। देश के हालात बेहद खराब हैं।
सवाल : आपके हिसाब से इसका हल क्या होना चाहिए।
जवाब : मेरा बताया समस्या का हल हुकूमत को रास नहीं आएगा। मेरा मानना है कि दलित, हिंदू, मुसलमान को देखकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर समस्या में काफी हद तक सुधार हो सकेगा।
सवाल : सम्मान वापस करने के बाद आप प्रधानमंत्री से मिले थे और उन्हें गुलदस्ता सौंपा था, यह दोहरा व्यवहार समझ से परे रहा।
जवाब : बिल्कुल मैं प्रधानमंत्री से मिला था, लेकिन मेरी मां के निधन पर प्रधानमंत्री ने एक हस्तलिखित पत्र मुझे भेज कर संवेदना व्यक्त की थी। मोदी का फोटो अपनी मां को लड्डू खिलाते हुए मैंने देखा था। इसके अलावा मोदी बिना किसी निमंत्रण के पाकिस्तान गए थे और नवाज शरीफ की मां से मिले थे। मोदी को अपनी मां से बेपनाह मोहब्बत है, मुझे भी है। इसी कारण मैं मोदी जी से मिला था। मां से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है। देश के आजाद होने के समय यदि नेहरू और जिन्ना की मां भी दोनों की बातचीत में शामिल होती तो देश का बंटवारा नहीं होता। पाकिस्तान चले गए लोगों को यहां से जाने का बहुत दुख है।
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साहित्य तक दलित, हिंदू, मुस्लिम में बंटा
अगर नेहरू और जिन्ना की मां भी बातचीत में शामिल होती तो नहीं होता देश का बंटवारा
पुवायां में कवि सम्मेलन और मुशायरे में शामिल होने आए देश के मशहूर शायर मुनव्वर राना ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि देश का माहौल पहले से और ज्यादा बदतर है। इसका कारण है कि कमजोर हुकूमत के कारण अपराधों का ग्राफ बढ़ गया है। शायरी और कविता में आई गिरावट का कारण उन्होंने संचार क्रांति को बताते हुए कहा कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा बेवकूफ भारत में रहते हैं, यहां खाने को रोटी भले ही न हो, लेकिन महंगा मोबाइल जरूर होना चाहिए। कीमती मोबाइल स्टेटस सिंबल बन गया है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता के आवास पर हरिओम त्रिवेदी ने उनसे बातचीत की।
सवाल : देश में संचार क्रांति से शायरी और कविता पर क्या असर पड़ा है।
जवाब : बहुत बुरा असर पड़ा है। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स ऐप पर ऐसे ऐसे लोग शायरी और कविता लिखते हैं, जिन्हें कविता और शायरी के बारे में कुछ नहीं पता है। संचार क्रांति से समाज में बुराइयों का प्रवेश हुआ है, लोगों के सोशल प्लेटफार्म पर पांच हजार मित्र हैं, लेकिन घर में भाई तक से बोलचाल नहीं है। चिट्ठी गुजरे जमाने की बात हो गई है। कलम से दोस्ती चली गई। आने वाली पीढ़ी चिट्ठी के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ेगी। दुनिया भर में सबसे ज्यादा बेवकूफ भारत में रहते हैं। लोगों को खाने को रोटी भले ही न मिले, लेकिन महंगा और एक से अधिक मोबाइल होना चाहिए। दूसरे मुल्कों में लोग घर में आते ही मोबाइल बंद कर देते हैं और लैंडलाइन फोन का प्रयोग करते हैं।
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सवाल : साहित्य में भी गिरावट आई है क्या?
जवाब : हां बिल्कुल। साहित्य अब हिंदी, उर्दू के अलावा दलित, सवर्ण में बंट गया है, जो साहित्य जगत के लिए चिंता की बात है। कुछ लोग मंच पर कहते हैं हिंदी गजल, गजल हिंदी, उर्दू, पंजाबी कैसे हो सकती है। गजल तो गजल है। गजल महबूव से बातें करने का जरिया है।
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सवाल : आपने मां पर बहुत लिखा है।
जवाब : हां मुझे फख्र है कि देश भर में मैंने मां पर सबसे ज्यादा लिखा है, सबको अपनी मां से बहुत ही ज्यादा मोहब्बत होनी चाहिए। घर में चाहें कुछ भी न हो, लेकिन मां जरूर हो।
सवाल : आपने अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटाया था, आखिर क्यों?
जवाब : देश के हालात से क्षुब्ध होकर। मुल्क आजाद है, लेकिल कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं। पुलिस कार्रवाई जाति और धर्म के आधार पर करे तो सम्मान का क्या मतलब? पुलिस की बर्बाद की गई जिंदगी आबाद नहीं हो सकती। भ्रष्टाचार नक्सल समस्या का जनक है। देश के हालात बेहद खराब हैं।
सवाल : आपके हिसाब से इसका हल क्या होना चाहिए।
जवाब : मेरा बताया समस्या का हल हुकूमत को रास नहीं आएगा। मेरा मानना है कि दलित, हिंदू, मुसलमान को देखकर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर समस्या में काफी हद तक सुधार हो सकेगा।
सवाल : सम्मान वापस करने के बाद आप प्रधानमंत्री से मिले थे और उन्हें गुलदस्ता सौंपा था, यह दोहरा व्यवहार समझ से परे रहा।
जवाब : बिल्कुल मैं प्रधानमंत्री से मिला था, लेकिन मेरी मां के निधन पर प्रधानमंत्री ने एक हस्तलिखित पत्र मुझे भेज कर संवेदना व्यक्त की थी। मोदी का फोटो अपनी मां को लड्डू खिलाते हुए मैंने देखा था। इसके अलावा मोदी बिना किसी निमंत्रण के पाकिस्तान गए थे और नवाज शरीफ की मां से मिले थे। मोदी को अपनी मां से बेपनाह मोहब्बत है, मुझे भी है। इसी कारण मैं मोदी जी से मिला था। मां से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है। देश के आजाद होने के समय यदि नेहरू और जिन्ना की मां भी दोनों की बातचीत में शामिल होती तो देश का बंटवारा नहीं होता। पाकिस्तान चले गए लोगों को यहां से जाने का बहुत दुख है।