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Shahjahanpur News: बरेली मोड़ से जलालाबाद तक सफर खतरनाक
Mon, 23 Dec 2024 12:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 23 Dec 2024 12:51 AM IST
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जलालाबाद में शाहजहांपुर हाईवे पर ग्राम कलक्टरगंज से पुरैना के बीच उखड़ी पड़ी सड़क। संवाद
कांट/जलालाबाद। बरेली मोड़ से लेकर जलालाबाद के याकूबपुर तिराहे तक लगभग 28 किमी तक का सफर खतरनाक है। गड्ढों और छुट्टा पशुओं के कारण यहां कोहरे में हादसे का डर रहता है।
लिपुलेख-भिंड हाईवे के इस हिस्से को चौड़ा करके फोरलेन बनाया जाना है। इसके लिए कई जगह हाईवे की दोनों पटरियों को खोदकर छोड़ दिया गया, क्योंकि निर्माण कार्य मेंं अतिक्रमण और पेड़ काटने की वन विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। अधूरे हाईवे पर बरेली मोड़ से आगे बढ़ते ही खतरे दिखने लगते हैं। कहीं सड़कों पर वाहन खड़े होने तो कहीं गड्ढों और छुट्टा पशुओं के जमावड़े से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
बरेली मोड़ से आगे बढ़ते ही सबसे पहले ददरौल मोड़ पर छुट्टा पशुओं का झुंड सफर में बाधक बनता है। जमौर में इंडियन ऑयल के बाटलिंग प्लांट से लेकर पेपर मिल तक कई ट्रक हाइवे की एक लेन पर खड़े दिखते हैं। पिपरौला में कृभको खाद कारखाना से पहले हाईवे पर बजरी-कोलतार की ऊपरी परत उखड़ जाने से वहां गड्ढे हो गए हैं। इसलिए वहां से लोग अपने वाहनों की रफ्तार धीमी करके आगे बढ़ते हैं।
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खाद कारखाना के गेट से दोनों ओर करीब 100-100 मीटर दूर तक खाद लेने आए ट्रकों की कतार से हाईवे की एक लेन पूरी तरह घिरी मिली। पिपरौला गांव के पास हाईवे के बीच में खड़े छुट्टा पशुओं के झुंड को हांककर किनारे करके लोग आगे बढ़ते हैं। पिपरौला से तीन किमी आगे कांट तक राहगीरों को कहीं गड्ढों तो कहीं छुट्टा पशुओं से जूझना पड़ रहा है। हाईवे के इस पूरे हिस्से की पटरियां गायब हैं।
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कांट से जलालाबाद तक कई गांवों के मोड़ बने दुर्घटनास्थल
कांट से 15 किमी दूर जलालाबाद की ओर बढ़ने पर कई गावों के मोड़ दुर्घटना स्थल बन गए हैं। हाईवे के इस हिस्से में गड्ढों की भरमार है क्योंकि फोरलेन स्वीकृत होने के बाद से हाईवे की मरम्मत का काम रोक दिया गया। फोरलेन बनाने से पहले होने वाले काम के तहत निर्माण कंपनी ने कई जगह हाईवे को खोदकर वहां रोड़ा डाल दिया है। गंगा एक्सप्रेस-वे और उसका इंटरचेंज बनाने के कार्य के कारण दो जगह रूट को डाइवर्ट भी किया गया है। हाईवे से जुड़े कलक्टरगंज, उबरिया व पुरैना गांव के संपर्क मार्ग के मोड़ ऐसे ठिकाने हैं, जहां आये दिन हादसे हो रहे हैं। इसी हाईवे पर विश्रामनगर, नगरिया व ककरहा गांव के सामने छुट्टा पशु भी सुरक्षित आवागमन में बाधक बने हुए हैं।
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छुट्टा पशुओं की चपेट में आने से हो चुके कई जानलेवा हादसे
जिले में छुट्टा पशुओं के कारण आए दिन होने वाले हादसों में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। गत 18 दिसंबर को मदनापुर क्षेत्र में कार के सामने छुट्टा पशुओं के आ जाने से कार में सवार कांट क्षेत्र के गांव नगला बनवारी निवासी रियासत अली और उनकी पत्नी आमना बेग समेत परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई। इससे पूर्व, इसी हाईवे पर छुट्टा पशुओं से अन्य कई लोगों की मौत हो चुकी है और घायलाें को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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लिपुलेख-भिंड हाईवे के इस हिस्से को चौड़ा करके फोरलेन बनाया जाना है। इसके लिए कई जगह हाईवे की दोनों पटरियों को खोदकर छोड़ दिया गया, क्योंकि निर्माण कार्य मेंं अतिक्रमण और पेड़ काटने की वन विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। अधूरे हाईवे पर बरेली मोड़ से आगे बढ़ते ही खतरे दिखने लगते हैं। कहीं सड़कों पर वाहन खड़े होने तो कहीं गड्ढों और छुट्टा पशुओं के जमावड़े से आए दिन हादसे हो रहे हैं।
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बरेली मोड़ से आगे बढ़ते ही सबसे पहले ददरौल मोड़ पर छुट्टा पशुओं का झुंड सफर में बाधक बनता है। जमौर में इंडियन ऑयल के बाटलिंग प्लांट से लेकर पेपर मिल तक कई ट्रक हाइवे की एक लेन पर खड़े दिखते हैं। पिपरौला में कृभको खाद कारखाना से पहले हाईवे पर बजरी-कोलतार की ऊपरी परत उखड़ जाने से वहां गड्ढे हो गए हैं। इसलिए वहां से लोग अपने वाहनों की रफ्तार धीमी करके आगे बढ़ते हैं।
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खाद कारखाना के गेट से दोनों ओर करीब 100-100 मीटर दूर तक खाद लेने आए ट्रकों की कतार से हाईवे की एक लेन पूरी तरह घिरी मिली। पिपरौला गांव के पास हाईवे के बीच में खड़े छुट्टा पशुओं के झुंड को हांककर किनारे करके लोग आगे बढ़ते हैं। पिपरौला से तीन किमी आगे कांट तक राहगीरों को कहीं गड्ढों तो कहीं छुट्टा पशुओं से जूझना पड़ रहा है। हाईवे के इस पूरे हिस्से की पटरियां गायब हैं।
कांट से जलालाबाद तक कई गांवों के मोड़ बने दुर्घटनास्थल
कांट से 15 किमी दूर जलालाबाद की ओर बढ़ने पर कई गावों के मोड़ दुर्घटना स्थल बन गए हैं। हाईवे के इस हिस्से में गड्ढों की भरमार है क्योंकि फोरलेन स्वीकृत होने के बाद से हाईवे की मरम्मत का काम रोक दिया गया। फोरलेन बनाने से पहले होने वाले काम के तहत निर्माण कंपनी ने कई जगह हाईवे को खोदकर वहां रोड़ा डाल दिया है। गंगा एक्सप्रेस-वे और उसका इंटरचेंज बनाने के कार्य के कारण दो जगह रूट को डाइवर्ट भी किया गया है। हाईवे से जुड़े कलक्टरगंज, उबरिया व पुरैना गांव के संपर्क मार्ग के मोड़ ऐसे ठिकाने हैं, जहां आये दिन हादसे हो रहे हैं। इसी हाईवे पर विश्रामनगर, नगरिया व ककरहा गांव के सामने छुट्टा पशु भी सुरक्षित आवागमन में बाधक बने हुए हैं।
छुट्टा पशुओं की चपेट में आने से हो चुके कई जानलेवा हादसे
जिले में छुट्टा पशुओं के कारण आए दिन होने वाले हादसों में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। गत 18 दिसंबर को मदनापुर क्षेत्र में कार के सामने छुट्टा पशुओं के आ जाने से कार में सवार कांट क्षेत्र के गांव नगला बनवारी निवासी रियासत अली और उनकी पत्नी आमना बेग समेत परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई। इससे पूर्व, इसी हाईवे पर छुट्टा पशुओं से अन्य कई लोगों की मौत हो चुकी है और घायलाें को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

जलालाबाद में शाहजहांपुर हाईवे पर ग्राम कलक्टरगंज से पुरैना के बीच उखड़ी पड़ी सड़क। संवाद