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Shahjahanpur News: चित्रकूट धाम और नवधा भक्ति की महिमा का किया बखान
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फैक्ट्री इस्टेट के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में उपस्थित श्रद्धाल
- फोटो : पटाखों के धमाके के बादगली मोहल्ला में छाया धुआं।संवाद
शाहजहांपुर। फैक्ट्री इस्टेट के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में बुधवार को कथा वाचक आचार्य पंडित जितेंद्र मिश्रा ने चित्रकूट धाम और भगवान की नवधा भक्ति की महिमा का बखान किया।
उन्होंने श्रीराम चरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या कांड के बाद अरण्य कांड हमें यह सीख देता है कि जीवन रूपी अयोध्या में जब तक अरण्य रूपी संघर्ष नहीं आता, तब तक जीवन का असली मूल्य नहीं पता चलता। कथा वाचक ने किष्किंधा कांड को विचार का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस कांड के कथा क्रम में विचारों का समावेश है, किंतु कोई काम नही किया जाता है।
आगे सुंदरकांड में विचार भी किया जाता है और तत्काल आवश्यक कार्य भी किए जाते हैं। लंका कांड में बिना विचार किए सब काम किए जाते हैं। इस कांड से सीख मिलती है कि बिना विचार किए काम करने से सोने के मकान भी नष्ट हो जाते हैं। अंत में उत्तर कांड से हमें श्रीराम कथा से सबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होते हैं।
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आज की कथा के मुख्य यजमान विद्युत निगम से सेवा निवृत्त कृष्ण कुमार शर्मा रहे। व्यवस्था में मंदिर के मुख्य पुजारी शिव सागर लाल शुक्ला, मंदिर ट्रस्ट के सचिव मदन मोहन त्रिपाठी, विमलेश तिवारी, मिथिलेश मिश्रा, अमित कुमार अवस्थी, पवन कुमार सिंह आदि का सहयोग रहा।
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उन्होंने श्रीराम चरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या कांड के बाद अरण्य कांड हमें यह सीख देता है कि जीवन रूपी अयोध्या में जब तक अरण्य रूपी संघर्ष नहीं आता, तब तक जीवन का असली मूल्य नहीं पता चलता। कथा वाचक ने किष्किंधा कांड को विचार का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस कांड के कथा क्रम में विचारों का समावेश है, किंतु कोई काम नही किया जाता है।
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आगे सुंदरकांड में विचार भी किया जाता है और तत्काल आवश्यक कार्य भी किए जाते हैं। लंका कांड में बिना विचार किए सब काम किए जाते हैं। इस कांड से सीख मिलती है कि बिना विचार किए काम करने से सोने के मकान भी नष्ट हो जाते हैं। अंत में उत्तर कांड से हमें श्रीराम कथा से सबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त होते हैं।
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आज की कथा के मुख्य यजमान विद्युत निगम से सेवा निवृत्त कृष्ण कुमार शर्मा रहे। व्यवस्था में मंदिर के मुख्य पुजारी शिव सागर लाल शुक्ला, मंदिर ट्रस्ट के सचिव मदन मोहन त्रिपाठी, विमलेश तिवारी, मिथिलेश मिश्रा, अमित कुमार अवस्थी, पवन कुमार सिंह आदि का सहयोग रहा।