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खुटार इलाके के हर्रायपुर जंगल में युवक-युवती के शव लटके मिले
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खुटार (शाहजहांपुर)। खुटार-पूरनपुर मार्ग स्थित हर्रायपुर जंगल में रविवार को एक युवक और युवती के शव पेड़ से लटके मिले। दोनों के गले में एक ही साड़ी का अलग-अलग सिरे से फंदा लगा हुआ था। दोनों अलग-अलग समुदाय के थे और शादीशुदा होने के बावजूद दोनों ने चार साल पहले प्रेम विवाह किया था। इसके बाद वे घर छोड़कर हरियाणा चले गए थे। अचानक दोनों के शव लटके मिलने से लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वहीं, युवक की पत्नी ने हत्या का आरोप लगाया है।
युवक खुटार कस्बे के मोहल्ला देवस्थान निवासी दिवाकर मिश्रा (45) टेंपो चालक था। युवती लखीमपुर खीरी के थाना मैलानी के गांव उजागरपुर निवासी खलीलन (40) थी। पुलिस के मुताबिक खलीलन का पहला पति नसीर दिव्यांग है, जो ठेके पर मजदूरों से काम कराता है। दिवाकर अपने टेंपो में मजदूरों को लाता ले जाता था। उसी दौरान दिवाकर और नसीर के बीच दोस्ती होने के साथ घर आना जाना हो गया। घर आते-जाते दिवाकर और नसीर की पत्नी खलीलन के बीच प्रेम प्रसंग हो गया। करीब चार वर्ष पहले दोनों घर से भाग कर हरियाणा चले गए। दिवाकर हरियाणा में ही काम करने लगा लेकिन वह अपने घर आता जाता था।
लगभग डेढ़ माह पूर्व दिवाकर और खलीलन खुटार आए थे। खलीलन को मैलानी क्षेत्र के गांव खरेहटा में किसी के घर रखने के बाद दिवाकर अपने घर खरेहटा चला गया। हालांकि वह खलीलन के पास आता जाता रहता था। छह अगस्त को दिवाकर घर से गया था, जिसके बाद नहीं लौटा। वह अक्सर घर से खलीलन के पास चला जाता था, इस कारण परिवार के लोगों ने भी तलाश करने का प्रयास नहीं किया।
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रविवार को जंगल गए कुछ लोगों ने युवक-युवती के शव पेड़ पर लटके देखे। इसकी चर्चा फैली तो भारी भीड़ जमा हो गई। खुटार थाना प्रभारी जयशंकर सिंह भी मौके पर जा पहुंचे। पुलिस ने देखा तो युवती के हाथ पर मार्कर से लिखा था कि इस घटना के जिम्मेदार यासीन और नाजरा होंगे।
परिजन ने युवती का शव लेने से किया इनकार
दिवाकर की पहली पत्नी से एक पुत्री है, जिसकी एक वर्ष पूर्व शादी हो चुकी है। उधर, खलीलन के पहले पति से दो पुत्र और एक पुत्री है। खलीलन की पुत्री की भी शादी हो चुकी है। खलीलन के पुत्र ने मौके पर जाने और शव लेने से इनकार कर दिया है। दिवाकर की पत्नी ने मौके पर पहुंचकर रोते हुए आरोप लगाया कि खलीलन के साथ शादी करने पर कुछ लोग नाराज थे। खलीलन के पक्ष के लोगों ने ही दोनों की हत्या की है। जानकारी पाकर सीओ नवनीत कुमार नायक ने मौका मुआयना किया है। एएसपी ग्रामीण अपर्णा गौतम ने भी खुटार थाने पहुंचकर जानकारी ली।
खुटार थाना क्षेत्र के जंगल में युवक-युवती के शव लटके मिलने की सूचना मिली थी। सीओ पुवायां और खुटार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अग्रिम कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी।
- अपर्णा गौतम एएसपी ग्रामीण शाहजहांपुर
आत्महत्या या हत्या : पुलिस को तमाम सवालों के तलाशने होंगे जवाब
- खरेहटा और खुटार के नजदीक जंगल, फिर क्यों गए 15 किमी दूर
- हाथ पर घटना के जिम्मेदार नाजरा और खलीकन है कौन?
खुटार। युवक और युवती के जंगल में लटके मिले शवों को लेकर मामला हत्या और आत्महत्या के बीच फंस गया है। तमाम ऐसी चीजें सामने आई हैं, जिनको लेकर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।
युवती की ससुराल खीरी के थाना मैलानी के गांव उजागरपुर में थी। युवती के वर्तमान में जिस गांव खरेहटा में रुके होने की चर्चा है, वह भी उजागरपुर से कुछ ही दूरी पर है। दोनों ही गांवों से खीरी रेंज का जंगल एक किमी के अंदर है। इसके अलावा यदि खुटार आना हो तो खीरी की मैलानी रेंज और खुटार रेंज के जंगल पड़ते हैं। खुटार कस्बे से जंगल मात्र एक किमी दूरी पर हैं। बड़ा सवाल यह है कि दिवाकर और खलीकन लगभग 25 किमी दूर हर्रायपुर के जंगल में कैसे पहुंचे? अगर मामले को आत्महत्या मानें तो दोनों ने नजदीक के जंगल के स्थान पर दूरी का जंगल क्यों चुना और जंगल में किस वाहन से पहुंचे?
अगर मामला हत्या की दृष्टि से देखें तो खलीकन को हाथ पर यह लिखने का मौका क्यों दिया गया कि इस घटना के लिए यासीन और नाजरा जिम्मेदार होंगे। अगर दोनों ने आत्महत्या की है तो यासीन और नाजरा घटना के लिए किस तरह जिम्मेदार हैं? यासीन और नाजरा कौन हैं? खलीकन के बड़े बेटे ने बताया कि उनकी मां शिक्षित नहीं थीं। ऐसे में खलीकन के हाथ पर दिवाकर ने लिखा हो सकता है। संभव है कि दिवाकर यासीन और नाजरा के बारे में जानता था। मगर दिवाकर के परिवार के लोग ज्यादा जानकारी देने से बच रहे हैं।
फंदा लगाने के लिए कहां से आई साड़ी
जिस पेड़ से खलीलन और दिवाकर लटके मिले हैं, उस पर एक थैला भी लटका मिला है। थैले में दोनों के कुछ कपड़े मिले हैं। दिवाकर और खलीलन एक ही साड़ी के दोनों सिरों से लटके हुए थे। ऐसे में सवाल है कि खलीलन सलवार कुर्ता पहनती थी तो लटकने के लिए साड़ी कहां से आई? साड़ी के पास ही डाल से एक दुपट्टा भी बंधा मिला है। इससे प्रतीत होता है कि पहले दुपट्टे से लटकने का प्रयास किया गया लेकिन बाद में साड़ी का फंदा बनाया गया।
खर्चीली थी खलीलन, पति से ज्यादा दिन नहीं बनी
गांव उजागरपुर के लोग बताते हैं कि नसीर का एक हाथ गेहूं की गहाई करते समय थ्रेशर में फंसकर कट गया था। वह एक पैर से पहले ही दिव्यांग था। शादी होने के बाद खलीलन को पति के दिव्यांग होने का पता चल सका। खलीलन काफी खर्चीली भी थी। चार वर्ष पूर्व प्रेम प्रसंग के चलते वह दिवाकर के साथ चली गई थी। तब से गांव नहीं आई है।
बेटे ने शव लेने से किया इंकार
खलीलन के पुत्र को मां के जंगल में लटके होने की जानकारी मिली लेकिन उसने कोई संबंध नहीं होने तथा मौके पर जाकर शव लेने से इनकार कर दिया। उधर दिवाकर की पत्नी, पुत्री सहित परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और आरोप लगाया कि खलीलन के पक्ष के लोगों ने दोनों की हत्या की है। खलीलन के पुत्र ने बताया कि उसकी मां कुछ दिन से गांव खरेहटा में रह रही थी। मगर इस संबंध में गांव खरेहटा के लोगों ने जानकारी होने से इनकार किया।
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युवक खुटार कस्बे के मोहल्ला देवस्थान निवासी दिवाकर मिश्रा (45) टेंपो चालक था। युवती लखीमपुर खीरी के थाना मैलानी के गांव उजागरपुर निवासी खलीलन (40) थी। पुलिस के मुताबिक खलीलन का पहला पति नसीर दिव्यांग है, जो ठेके पर मजदूरों से काम कराता है। दिवाकर अपने टेंपो में मजदूरों को लाता ले जाता था। उसी दौरान दिवाकर और नसीर के बीच दोस्ती होने के साथ घर आना जाना हो गया। घर आते-जाते दिवाकर और नसीर की पत्नी खलीलन के बीच प्रेम प्रसंग हो गया। करीब चार वर्ष पहले दोनों घर से भाग कर हरियाणा चले गए। दिवाकर हरियाणा में ही काम करने लगा लेकिन वह अपने घर आता जाता था।
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लगभग डेढ़ माह पूर्व दिवाकर और खलीलन खुटार आए थे। खलीलन को मैलानी क्षेत्र के गांव खरेहटा में किसी के घर रखने के बाद दिवाकर अपने घर खरेहटा चला गया। हालांकि वह खलीलन के पास आता जाता रहता था। छह अगस्त को दिवाकर घर से गया था, जिसके बाद नहीं लौटा। वह अक्सर घर से खलीलन के पास चला जाता था, इस कारण परिवार के लोगों ने भी तलाश करने का प्रयास नहीं किया।
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रविवार को जंगल गए कुछ लोगों ने युवक-युवती के शव पेड़ पर लटके देखे। इसकी चर्चा फैली तो भारी भीड़ जमा हो गई। खुटार थाना प्रभारी जयशंकर सिंह भी मौके पर जा पहुंचे। पुलिस ने देखा तो युवती के हाथ पर मार्कर से लिखा था कि इस घटना के जिम्मेदार यासीन और नाजरा होंगे।
परिजन ने युवती का शव लेने से किया इनकार
दिवाकर की पहली पत्नी से एक पुत्री है, जिसकी एक वर्ष पूर्व शादी हो चुकी है। उधर, खलीलन के पहले पति से दो पुत्र और एक पुत्री है। खलीलन की पुत्री की भी शादी हो चुकी है। खलीलन के पुत्र ने मौके पर जाने और शव लेने से इनकार कर दिया है। दिवाकर की पत्नी ने मौके पर पहुंचकर रोते हुए आरोप लगाया कि खलीलन के साथ शादी करने पर कुछ लोग नाराज थे। खलीलन के पक्ष के लोगों ने ही दोनों की हत्या की है। जानकारी पाकर सीओ नवनीत कुमार नायक ने मौका मुआयना किया है। एएसपी ग्रामीण अपर्णा गौतम ने भी खुटार थाने पहुंचकर जानकारी ली।
खुटार थाना क्षेत्र के जंगल में युवक-युवती के शव लटके मिलने की सूचना मिली थी। सीओ पुवायां और खुटार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अग्रिम कार्रवाई जांच के बाद की जाएगी।
- अपर्णा गौतम एएसपी ग्रामीण शाहजहांपुर
आत्महत्या या हत्या : पुलिस को तमाम सवालों के तलाशने होंगे जवाब
- खरेहटा और खुटार के नजदीक जंगल, फिर क्यों गए 15 किमी दूर
- हाथ पर घटना के जिम्मेदार नाजरा और खलीकन है कौन?
खुटार। युवक और युवती के जंगल में लटके मिले शवों को लेकर मामला हत्या और आत्महत्या के बीच फंस गया है। तमाम ऐसी चीजें सामने आई हैं, जिनको लेकर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।
युवती की ससुराल खीरी के थाना मैलानी के गांव उजागरपुर में थी। युवती के वर्तमान में जिस गांव खरेहटा में रुके होने की चर्चा है, वह भी उजागरपुर से कुछ ही दूरी पर है। दोनों ही गांवों से खीरी रेंज का जंगल एक किमी के अंदर है। इसके अलावा यदि खुटार आना हो तो खीरी की मैलानी रेंज और खुटार रेंज के जंगल पड़ते हैं। खुटार कस्बे से जंगल मात्र एक किमी दूरी पर हैं। बड़ा सवाल यह है कि दिवाकर और खलीकन लगभग 25 किमी दूर हर्रायपुर के जंगल में कैसे पहुंचे? अगर मामले को आत्महत्या मानें तो दोनों ने नजदीक के जंगल के स्थान पर दूरी का जंगल क्यों चुना और जंगल में किस वाहन से पहुंचे?
अगर मामला हत्या की दृष्टि से देखें तो खलीकन को हाथ पर यह लिखने का मौका क्यों दिया गया कि इस घटना के लिए यासीन और नाजरा जिम्मेदार होंगे। अगर दोनों ने आत्महत्या की है तो यासीन और नाजरा घटना के लिए किस तरह जिम्मेदार हैं? यासीन और नाजरा कौन हैं? खलीकन के बड़े बेटे ने बताया कि उनकी मां शिक्षित नहीं थीं। ऐसे में खलीकन के हाथ पर दिवाकर ने लिखा हो सकता है। संभव है कि दिवाकर यासीन और नाजरा के बारे में जानता था। मगर दिवाकर के परिवार के लोग ज्यादा जानकारी देने से बच रहे हैं।
फंदा लगाने के लिए कहां से आई साड़ी
जिस पेड़ से खलीलन और दिवाकर लटके मिले हैं, उस पर एक थैला भी लटका मिला है। थैले में दोनों के कुछ कपड़े मिले हैं। दिवाकर और खलीलन एक ही साड़ी के दोनों सिरों से लटके हुए थे। ऐसे में सवाल है कि खलीलन सलवार कुर्ता पहनती थी तो लटकने के लिए साड़ी कहां से आई? साड़ी के पास ही डाल से एक दुपट्टा भी बंधा मिला है। इससे प्रतीत होता है कि पहले दुपट्टे से लटकने का प्रयास किया गया लेकिन बाद में साड़ी का फंदा बनाया गया।
खर्चीली थी खलीलन, पति से ज्यादा दिन नहीं बनी
गांव उजागरपुर के लोग बताते हैं कि नसीर का एक हाथ गेहूं की गहाई करते समय थ्रेशर में फंसकर कट गया था। वह एक पैर से पहले ही दिव्यांग था। शादी होने के बाद खलीलन को पति के दिव्यांग होने का पता चल सका। खलीलन काफी खर्चीली भी थी। चार वर्ष पूर्व प्रेम प्रसंग के चलते वह दिवाकर के साथ चली गई थी। तब से गांव नहीं आई है।
बेटे ने शव लेने से किया इंकार
खलीलन के पुत्र को मां के जंगल में लटके होने की जानकारी मिली लेकिन उसने कोई संबंध नहीं होने तथा मौके पर जाकर शव लेने से इनकार कर दिया। उधर दिवाकर की पत्नी, पुत्री सहित परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और आरोप लगाया कि खलीलन के पक्ष के लोगों ने दोनों की हत्या की है। खलीलन के पुत्र ने बताया कि उसकी मां कुछ दिन से गांव खरेहटा में रह रही थी। मगर इस संबंध में गांव खरेहटा के लोगों ने जानकारी होने से इनकार किया।