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इतिहास के विद्यार्थी अमीर खुसरो के साहित्य में तथ्यों और घटनाओं की पड़ताल करें : कुलपति

Thu, 24 Feb 2022 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:57 AM IST
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Students of history should check the facts in the literature of Amir Khusro: Vice Chancellor
जीएफ कॉलेज में सेमिनार को संबोधित करते कुलपति प्रो. केपी सिंह - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जीएफ कॉलेज में मंगलवार को अमीर खुसरो : एक इतिहासकार के रूप में (अमीर खुसरो : बहैसियत एक मोअर्रिख) विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। सेमिनार इतिहास विभाग और नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
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मुख्य अतिथि रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि इतिहास को सहेजना हमारे लिए बहुत आवश्यक है। जो पीढ़ी अपने इतिहास को नहीं सहेजती, उसका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि अमीर खुसरो जनता के साहित्यकार थे। अनेक बादशाहों के दरबार में रहते हुए भी उन्होंने अपनी जन चेतना को कुंठित नहीं होने दिया। इतिहास के विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वह उनके साहित्य में ऐसे तथ्यों और घटनाओं की पड़ताल करे।
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कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष सैयद मोइनुद्दीन की अध्यक्षता में हुए सेमिनार के मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. सैयद जमालुद्दीन ने कहा कि वर्तमान जब कई रूपों में हमें चुनौती देता हुआ प्रतीत होता है तो उससे निपटने के लिए हम अपनी संस्कृति और कला की ओर लौटते हैं। अमीर खुसरो ने पूरी दुनिया को साहित्य और संस्कृति की भाषा सिखाने का प्रयास किया।
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इससे पहले अरबी विभागाध्यक्ष वकील अहमद द्वारा तिलावते क़ुरान से सेमिनार का शुभारंभ हुआ। एनसीसी के कैडेट्स ने मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया। प्राचार्य डॉ. मोहम्मद तारिक ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ, शाल एवं स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। दूसरे सत्र में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वसीम राजा ने कहा कि खुसरो ने विभिन्न राजाओं के शासन काल में अपना जीवन व्यतीत करते हुए पूरे भारत का भ्रमण किया और अपनी सूक्ष्म दृष्टि से तथ्यों का अवलोकन करके उन्हें अपने साहित्य में स्थान दिया।
अलीगढ़ के ही प्रोफेसर परवेज ने अमीर खुसरो की इतिहास दृष्टि पर बात करते हुए कहा कि उनमें इतिहास को परखने की अद्भुत दृष्टि थी। अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनूप कुमार ने कहा कि अमीर ख़ुसरो सारे धार्मिक बंधनों से परे देवत्व के स्वरूप थे। ऋषिकेश, उत्तराखंड के प्रोफेसर सिराज मोहम्मद ने कहा कि अमीर ख़ुसरो के साहित्य को पढ़े बिना आरंभिक मध्यकालीन भारत का इतिहास नहीं लिखा जा सकता। जामिया विश्वविद्यालय के डॉ. नौशाद आलम ने अमीर खुसरो के साहित्य का परिचय देते हुए उसमें ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल की। संगोष्ठी का संचालन आयोजन सचिव डॉ. मनसूर अहमद सिद्दीकी ने किया।

इस दौरान महाविद्यालय की प्रबंध समिति के प्रबंधक मलिक अब्दुल वाहिद खान, कोषाध्यक्ष सैयद जुल्फिकार अहमद, इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. तनवीर हुसैन, डॉ. मोहम्मद तुफैल खान, डॉ. समन जहरा जैदी, डॉ. जमां खान, एजेड खान इंटर कॉलेज के प्रबंधक शकील अहमद अंसारी, आर्य महिला डिग्री कॉलेज की प्राचार्या डॉ. कनक रानी आदि मौजूद रहे।

जीएफ कॉलेज में सेमिनार में मौजूद शिक्षक व छात्र-छात्राएं

जीएफ कॉलेज में सेमिनार में मौजूद शिक्षक व छात्र-छात्राएं- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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