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आतिशबाजी से दूर रहें दमा, एलर्जी वाले

Sat, 29 Oct 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर। Updated Sat, 29 Oct 2016 11:42 PM IST
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Stay away from fireworks asthma, allergic
दिवाली - फोटो : अमर उजाला
दिवाली के मौके पर जहरीला धुआं बिगाड़ देगा सेहत
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आंख-कान के रोगियों का घरों के अंदर रहना बेहतर 

दिवाली के मौके पर रविवार शाम से आसमान सतरंगी आतिशबाजी से नहाने के साथ कानफोड़ू पटाखेबाजी होना तय है। इस दौरान पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं से प्रदूषण के साथ दमा और एलर्जी के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस दौरान दमा, एलर्जी, आंख और कान के रोगी घरों के अंदर रहें तो बेहतर होगा। 
हर साल दिवाली से पहले शासन-प्रशासन आतिशबाजी का दुष्प्रभाव सीमित करने के लिए गाइड लाइन जारी करता है। आतिशबाजी विक्रेताओं समेत जन सामान्य को रंगबिरंगी रोशनी छोड़ने वाली फुलझड़ियों, अनार और तेज धमाका करने वाले पटाखों मेें इस्तेमाल रसायनों के घातक प्रभाव का उल्लेख करते हुए निर्धारित सीमा से अधिक शोर करने वाले पटाखों और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले आतिशबाजी आइटमों की खरीद-फरोख्त नहीं करने की सलाह दी जाती है। 
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इस बार भी डीएम राम गणेश ने अधिक आवाज वाले पटाखे नहीं खरीदने और आतिशबाजी के दौरान बच्चों को अकेला नहीं छोड़ने की सलाह दी, लेकिन त्यौहार से जुड़ी परंपरा निभाने के जुनून में बीमारियां परोसने वाले आतिशबाजी आइटमों की बंपर बिक्री हो रही है। इसे देखते अगले कुछ दिनों में डॉक्टरों के यहां दमा, एलर्जी, आंख-कान और खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ने के आसार हैं। 
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आतिशबाजी में प्रतिबंधित रसायन का घालमेल
गंधक और पोटाश के मेल से बनने वाली बारूद के पटाखे दशकों से किशोरों-बच्चों को लुभाते आए हैं, लेकिन अब पटाखों की आवाज बढ़ाने के लिए पोटेशियम और सोडियम नाइट्रेट के साथ घातक पोटेशियम क्लोरेट भी इस्तेमाल होने लगा है, जबकि इस रसायन के इस्तेमाल पर वर्ष 1992 से प्रतिबंध है। पटाखा व्यवसाइयों के अनुसार पटाखों के मसाले में चीन ने पोटेशियम क्लोेरेट मिलाने की पहल की और अब बिक्री प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए भारतीय आतिशबाजी निर्माताओं ने भी यह रसायन इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसी तरह चमकीले रंग छोड़ने वाले कैडमियम, सल्फर, मैग्नीशियम, कॉपर आदि रसायन भी जीवधारियों पर विषाक्त प्रभाव छोड़ते हैं।  


बचाव को कारगर उपाय
0 दमा-एलर्जी की नियमित डोज लेकर बाहर निकलें।
0 जहरीले धुएं से बचाव को मेडिकेटेड मॉस्क लगाएं।
0 तेज रोशनी के वक्त आंख पर काला चश्मा चढ़ाएं।
0 तेज आवाज से बचने के लिए कानों में रुई लगाएं। 
0 आंख में जलन होने पर ताजे पानी के छींटें मारें।
0 धुएं से परेशान लोग चेहरे पर गीला कपड़ा लपेटें।


वातावरण में प्रदूषण बढ़ने के साथ दमा और एलर्जी के मरीज पहले से बढ़ रहे हैं। अब दिवाली पर आतिशबाजी से यह समस्या और विकट होगी। अच्छा होगा कि लोग आतिशबाजी के जहरीले प्रभाव से बचाव को सजग रहें तो इलाज की जरूरत नहीं पड़ेगी। शारीरिक स्थिति असामान्य महसूस होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तत्काल नजदीकी चिकित्सक से संपर्क कर उचित परामर्श लें, अन्यथा जहरीला धुआं ब्रोंकाइटिस, गले में जलन और फेफड़े से संबंधित रोगोें का कारण बनेगा।
-डॉ. राजीव सिंह, फिजीशियन, कच्चा कटरा
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