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सपाइयों को अब ‘घर की रार’ थमने के आसार
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Sun, 01 Jan 2017 11:27 PM IST
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विधानसभा चुनाव में टिकटोें के बटवारे को लेकर मुलायम सिंह यादव के घर में हुई रार से वे कार्यकर्ता खुद को बेवजह पिसता महसूस कर रहे हैं, जिन्हें न तो पद की चाह है और न ही पार्टी टिकट के दावेदार हैं। ऐसे कार्यकर्ता लखनऊ तक की दौड़ लगाने के बजाय जिले मेें मौजूद रहकर मुखिया के परिवार में विवाद थमने की बाट जोह रहे हैं। उधर, सभी प्रत्याशी और प्रमुख नेता रविवार को भी लखनऊ में डेरा डाले रहे। दो दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सपा से निष्कासित किए जाने के बाद से जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं में अपने भविष्य को लेकर बेचैनी साफ नजर आने लगी थी। नेतृत्व और संगठन स्तर पर अपनी स्थिति भांपने के लिए जिले की सभी छह विधानसभा सीटों के प्रत्याशी लखनऊ रवाना हो गए थे। जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर तनवीर खां ने भी लखनऊ में डेरा डाल लिया था। यही नहीं, मुख्यमंत्री के समर्थन में लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव पंकज वर्मा सराफ, सपा के जिला महासचिव रणंजय सिंह यादव, नगर अध्यक्ष कपिल सिंह वर्मा आदि भी पदों से इस्तीफे देकर लखनऊ पहुंच गए। रविवार को यह सभी मुख्यमंत्री द्वारा बुलाए गए अधिवेशन में मौजूद रहकर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के गवाह बने। इधर, मोहल्ला बिजलीपुरा में जेल रोड पर स्थित सपा दफ्तर रविवार को थोड़ी देर के लिए खुलने के बावजूद वहां रविवार की छुट्टी जैसा माहौल रहा। दोपहर बाद कार्यालय प्रभारी हफीज अहमद अंसारी के लखनऊ से लौटने पर पार्टी दफ्तर में कार्यकर्ताओं की आमद हुई। राजधानी से मिली खबरों पर खुशी जाहिर करते हुए कार्यकर्ताओें ने अखिलेश जिंदाबाद के नारे बुलंद किए।
जिला इकाई और फ्रंटल संगठनों में फेरबदल संभव
अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यहां के विधानसभा प्रत्याशियों में बदलाव के कोई आसार नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भरोसेमंद सूत्र जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों के मौजूदा स्वरूप में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
बताया गया कि तनवीर खां को शहर सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के कारण चुनाव होने तक जिलाध्यक्ष के ओहदे पर किसी अन्य वरिष्ठ नेता को बिठाया जा सकता है। जिलाध्यक्ष पद के संभावित चेहरों में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान में डीसीबी चेयरमैन प्रदीप पांडेय, एमएलसी अमित यादव रिंकू, पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार, अखिलेश के समर्थन में लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे चुके पंकज वर्मा सराफ, अल्पसंख्यक सभा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सैयद रिजवान अहमद आदि के नाम लिए जा रहे हैं।
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पद की लालसा नहीं, पार्टी फले-फूले: तनवीर
अखिलेश के लिए जिलाध्यक्ष पद कुर्बान कर लखनऊ में डटे शहर सीट से प्रत्याशी तनवीर खां कहते हैं कि उन्हें पद की कोई लालसा नहीं, सिर्फ यही इच्छा है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पार्टी फले-फूले और संरक्षक के तौर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव का सबको आशीर्वाद मिलता रहे। उन्होंने कहा कि पद के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत और हक का पक्ष लेते हुए वह मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं।
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जिला इकाई और फ्रंटल संगठनों में फेरबदल संभव
अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यहां के विधानसभा प्रत्याशियों में बदलाव के कोई आसार नहीं हैं, लेकिन पार्टी के भरोसेमंद सूत्र जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों के मौजूदा स्वरूप में बदलाव के संकेत दे रहे हैं।
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बताया गया कि तनवीर खां को शहर सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के कारण चुनाव होने तक जिलाध्यक्ष के ओहदे पर किसी अन्य वरिष्ठ नेता को बिठाया जा सकता है। जिलाध्यक्ष पद के संभावित चेहरों में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान में डीसीबी चेयरमैन प्रदीप पांडेय, एमएलसी अमित यादव रिंकू, पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार, अखिलेश के समर्थन में लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा दे चुके पंकज वर्मा सराफ, अल्पसंख्यक सभा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सैयद रिजवान अहमद आदि के नाम लिए जा रहे हैं।
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पद की लालसा नहीं, पार्टी फले-फूले: तनवीर
अखिलेश के लिए जिलाध्यक्ष पद कुर्बान कर लखनऊ में डटे शहर सीट से प्रत्याशी तनवीर खां कहते हैं कि उन्हें पद की कोई लालसा नहीं, सिर्फ यही इच्छा है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पार्टी फले-फूले और संरक्षक के तौर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव का सबको आशीर्वाद मिलता रहे। उन्होंने कहा कि पद के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत और हक का पक्ष लेते हुए वह मुख्यमंत्री के साथ खड़े हैं।