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सपा हाईकमान ने नीतू को दोबारा सौंपी साइकिल
शाहजहांपुर
Updated Sat, 19 Dec 2015 11:35 PM IST
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सपा हाईकमान ने जिला पंचायत चलाने के लिए अपनी साइकिल आखिरकार दोबारा नीतू सिंह को सौंप दी। चूंकि, पार्टी में अध्यक्ष पद को कई दावेदार थे, लिहाजा मुखिया के फैसले को लेकर अन्य टिकटार्थियों के खेमों तनाव पूर्ण शांति जैसा सन्नाटा पसरा है। उधर, अन्य पार्टियों में भी जिला पंचायत अध्यक्षी के संभावित प्रत्याशी को लेकर मंथन तेज हो गया है।
बता दें कि जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष नीतू सिंह ने अध्यक्ष पद की कमान 21 जनवरी 2013 को संभाली थी। दरअसल, उनसे पहले बसपा के बहादुर लाल आजाद अध्यक्ष पद पर आसीन थे। बसपा शासनकाल में 14 जनवरी 2011 को वह अध्यक्ष बने, लेकिन वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता सपा के हाथ आते ही उन्हें अपदस्थ करने की सियासी गोटियां बिछाए जाने लगीं।
यही हुआ भी। दस दिसंबर 2012 को अपने विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास होने पर आजाद को अध्यक्ष पद छोडना पड़ा। तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी ने पदेन प्रशासक के नाते 20 जनवरी 2013 तक जिला पंचायत की व्यवस्था संभाली। बाद में सपा मुखिया ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अध्यक्ष पद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता उपेंद्र पाल सिंह की पत्नी नीतू सिंह को बिठा दिया। इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के साथ कई दावेदार मैदान में होने से पार्टी टिकट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
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सपा के टिकट के लिए बसपा से एमएलसी जयेश प्रसाद के भाई जीवेश प्रसाद, राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा की पुत्रवधू अर्चना वर्मा और पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार के भाई सुरजन लाल भी दावेदारों में बताए जा रहे थे। पार्टी जिलाध्यक्ष तनवीर खां के अनुसार नीतू सिंह समेत चारों दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन नेतृत्व के फैसले को लेकर पार्टी के अंदर कोई मतभेद नहीं है।
जयेश की रणनीति तय करेगी बसपा प्रत्याशी
बसपा भले ही बहनजी के स्तर से अध्यक्ष पद का प्रत्याशी तय होने की बात कर रही हो, सच यही है कि पार्टी के एमएलसी जयेश प्रसाद की रणनीति से ही प्रत्याशी का फैसला होगा। दरअसल, एमएलसी ने भाई जीवेश को बसपा का सहारा लिए बगैर निर्दलीय जिताया। एक पदाधिकारी के अनुसार जयेश ने जीवेश के लिए टिकट मांगा तो प्राथमिकता उन्हीं को मिलेगी। अन्यथा की स्थिति में कांट के पूर्व ब्लॉक प्रमुख नरवीर सिंह के नाम पर मोहर लग सकती है। बसपा के जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह प्रत्याशी के सवाल पर सिर्फ इतना बोले कि रविवार को प्रमुख पदाधिकारियों की गोपनीय बैठक बुलाई है और उसी में प्रत्याशी तय होगा।
भाजपा खेमे को पैनल के फैसले का इंतजार
अध्यक्ष पद के पार्टी प्रत्याशी की घोषणा के लिए भाजपा खेमे को इसके लिए गठित पैनल के फैसले का इंतजार है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके वीरेंद्र पाल सिंह यादव के बेटे अजय प्रताप सहित कई अन्य जीते कंडीडेट टिकट चाह रहे हैं। पुवायां क्षेत्र से जिला पंचायत की मेंबरी जीते ठाकुर बलवीर सिंह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के नाते वरिष्ठता और परास्नातक योग्यता के आधार पर प्रत्याशी चुने जा सकते हैं, हालांकि, उन्होंने अपने स्तर से ऐसा कोई इरादा जाहिर नहीं किया। भाजपा जिलाध्यक्ष के अनुसार पैनल जिसे टिकट देगा, उसी को चुनाव लड़ाया जाएगा।
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बता दें कि जिला पंचायत की निवर्तमान अध्यक्ष नीतू सिंह ने अध्यक्ष पद की कमान 21 जनवरी 2013 को संभाली थी। दरअसल, उनसे पहले बसपा के बहादुर लाल आजाद अध्यक्ष पद पर आसीन थे। बसपा शासनकाल में 14 जनवरी 2011 को वह अध्यक्ष बने, लेकिन वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता सपा के हाथ आते ही उन्हें अपदस्थ करने की सियासी गोटियां बिछाए जाने लगीं।
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यही हुआ भी। दस दिसंबर 2012 को अपने विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पास होने पर आजाद को अध्यक्ष पद छोडना पड़ा। तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी ने पदेन प्रशासक के नाते 20 जनवरी 2013 तक जिला पंचायत की व्यवस्था संभाली। बाद में सपा मुखिया ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अध्यक्ष पद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता उपेंद्र पाल सिंह की पत्नी नीतू सिंह को बिठा दिया। इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित होने के साथ कई दावेदार मैदान में होने से पार्टी टिकट को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
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सपा के टिकट के लिए बसपा से एमएलसी जयेश प्रसाद के भाई जीवेश प्रसाद, राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा की पुत्रवधू अर्चना वर्मा और पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार के भाई सुरजन लाल भी दावेदारों में बताए जा रहे थे। पार्टी जिलाध्यक्ष तनवीर खां के अनुसार नीतू सिंह समेत चारों दावेदारों ने टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन नेतृत्व के फैसले को लेकर पार्टी के अंदर कोई मतभेद नहीं है।
जयेश की रणनीति तय करेगी बसपा प्रत्याशी
बसपा भले ही बहनजी के स्तर से अध्यक्ष पद का प्रत्याशी तय होने की बात कर रही हो, सच यही है कि पार्टी के एमएलसी जयेश प्रसाद की रणनीति से ही प्रत्याशी का फैसला होगा। दरअसल, एमएलसी ने भाई जीवेश को बसपा का सहारा लिए बगैर निर्दलीय जिताया। एक पदाधिकारी के अनुसार जयेश ने जीवेश के लिए टिकट मांगा तो प्राथमिकता उन्हीं को मिलेगी। अन्यथा की स्थिति में कांट के पूर्व ब्लॉक प्रमुख नरवीर सिंह के नाम पर मोहर लग सकती है। बसपा के जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह प्रत्याशी के सवाल पर सिर्फ इतना बोले कि रविवार को प्रमुख पदाधिकारियों की गोपनीय बैठक बुलाई है और उसी में प्रत्याशी तय होगा।
भाजपा खेमे को पैनल के फैसले का इंतजार
अध्यक्ष पद के पार्टी प्रत्याशी की घोषणा के लिए भाजपा खेमे को इसके लिए गठित पैनल के फैसले का इंतजार है। पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके वीरेंद्र पाल सिंह यादव के बेटे अजय प्रताप सहित कई अन्य जीते कंडीडेट टिकट चाह रहे हैं। पुवायां क्षेत्र से जिला पंचायत की मेंबरी जीते ठाकुर बलवीर सिंह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के नाते वरिष्ठता और परास्नातक योग्यता के आधार पर प्रत्याशी चुने जा सकते हैं, हालांकि, उन्होंने अपने स्तर से ऐसा कोई इरादा जाहिर नहीं किया। भाजपा जिलाध्यक्ष के अनुसार पैनल जिसे टिकट देगा, उसी को चुनाव लड़ाया जाएगा।