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Shahjahanpur News: कई विभाग मिलकर संवारेंगे नाहिल की सागर झील
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पुवायां के गांव नाहिल की सागर झील। संवाद
पुवायां। गांव नाहिल की सागर झील को पर्यटन स्थल और गो अभ्यारण्य बनाने के लिए कई विभाग मिलकर काम करेंगे। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने आठ नवंबर को झील की जमीन का मुआयना कर एसडीएम को प्रस्ताव बनाकर भेजने के लिए कहा था।
नाहिल के पास सागर झील के नाम 818 बीघा से अधिक जमीन है। लगभग 150 बीघा जमीन मत्स्यजीवी सहकारी समिति को दी गई है, यह जमीन 2028 में खाली हो जाएगी। लगभग 108 बीघा जमीन वन विभाग के पास है। शेष जमीन में कुछ खाली पड़ी है। कुछ जमीन लोगों ने कब्जा कर रखी है तो कुछ जमीन पर पानी भरा रहता है।
डीएम ने कब्जेदारों को भी स्वेच्छा से कब्जा हटा लेने के लिए कहा था। एसडीएम चित्रा निर्वाल ने बताया कि राजस्व विभाग के कर्मचारी जमीन को खाली कराएंगे। इसके लिए टीमें गठित की जाएंगी। झील की खोदाई का काम विकास विभाग कराएगा। इसके बाद उद्यान विभाग की ओर से बांस के पौधे रोपित किए जाएंगे। पीडब्ल्यूडी की ओर सड़क बनाने और मरम्मत का काम कराया जाएगा। बाउंड्रीवॉल भी कराई जाएगी, जिससे आगे चलकर फिर से अवैध कब्जे न हो सकें।
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नवीन परती और बंजर भूमि पर बनेगा गाे अभ्यारण्य
सागर झील में नवीन परती और बंजर भूमि भी शामिल है। इस भूमि पर जलजमाव नहीं होता है। नवीन परती और बंजर भूमि पर गो अभ्यारण्य बनने से तहसील भर में छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात मिल जाएगी।
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नाहिल के पास सागर झील के नाम 818 बीघा से अधिक जमीन है। लगभग 150 बीघा जमीन मत्स्यजीवी सहकारी समिति को दी गई है, यह जमीन 2028 में खाली हो जाएगी। लगभग 108 बीघा जमीन वन विभाग के पास है। शेष जमीन में कुछ खाली पड़ी है। कुछ जमीन लोगों ने कब्जा कर रखी है तो कुछ जमीन पर पानी भरा रहता है।
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डीएम ने कब्जेदारों को भी स्वेच्छा से कब्जा हटा लेने के लिए कहा था। एसडीएम चित्रा निर्वाल ने बताया कि राजस्व विभाग के कर्मचारी जमीन को खाली कराएंगे। इसके लिए टीमें गठित की जाएंगी। झील की खोदाई का काम विकास विभाग कराएगा। इसके बाद उद्यान विभाग की ओर से बांस के पौधे रोपित किए जाएंगे। पीडब्ल्यूडी की ओर सड़क बनाने और मरम्मत का काम कराया जाएगा। बाउंड्रीवॉल भी कराई जाएगी, जिससे आगे चलकर फिर से अवैध कब्जे न हो सकें।
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नवीन परती और बंजर भूमि पर बनेगा गाे अभ्यारण्य
सागर झील में नवीन परती और बंजर भूमि भी शामिल है। इस भूमि पर जलजमाव नहीं होता है। नवीन परती और बंजर भूमि पर गो अभ्यारण्य बनने से तहसील भर में छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात मिल जाएगी।