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Shahjahanpur News: धूल और भूसे के कणों से बढ़ा सांसों पर संकट
Sun, 27 Apr 2025 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 27 Apr 2025 01:13 AM IST
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शाहजहांपुर। धूल और भूसे के कणों से सांस लेने में परेशानी के मरीज बढ़े हैं। कुछ लोगों को एलर्जी की भी समस्या हो रही है। अधिकतर मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की कटाई व भूसा निकासी के दौरान मास्क पहनें या गमछे से मुंह व नाक को ढंक लें। बच्चों को दूर रखने की हिदायत भी दी है।
गेहूं की कटाई के दौरान भूसा निकालने के दौरान धूल और भूसे के महीन कण वातावरण में तैरते रहते हैं। सांस के जरिये ये शरीर के अंदर जाकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अस्थमा के रोगियों को ज्यादा दिक्कत होती हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की डाॅ. अंकिता सिंह ने बताया कि इस प्रक्रिया को तो रोका नहीं जा सकता, लेकिन लोगों को सावधानी बरतनी होगी। दमा के साथ ही आंखों में एलर्जी, लालिमा, खुजली की भी दिक्कत हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक, रोजाना ही दो-चार मरीज सांस की समस्या लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। वहीं, भीषण गर्मी के चलते उल्टी-दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में शनिवार को 1553 पर्चे बने। वहीं, शुक्रवार को 1447 और बृहस्पतिवार को 1507 पर्चें बने थे। पूर्व में यह संख्या 800 से 1000 के बीच रहा करती थी।
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ये बरतें सावधानी
-गेहूं कटाई-निकासी वाले स्थल से दूर रहें। मास्क पहनकर बाहर निकलें। दमा रोगी अपनी दवा अपने साथ में रखें। रोजाना तीन-चार लीटर पानी जरूर पीयें। शरीर में पानी की कमी होने पर तुरंत ओआरएस का घोल पीयें। सर्दी-जुकाम के मरीज के सीधे संपर्क में न आएं। (जैसा कि डॉ. अंकिता वर्मा ने बताया।)
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गेहूं की कटाई के दौरान भूसा निकालने के दौरान धूल और भूसे के महीन कण वातावरण में तैरते रहते हैं। सांस के जरिये ये शरीर के अंदर जाकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अस्थमा के रोगियों को ज्यादा दिक्कत होती हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज की डाॅ. अंकिता सिंह ने बताया कि इस प्रक्रिया को तो रोका नहीं जा सकता, लेकिन लोगों को सावधानी बरतनी होगी। दमा के साथ ही आंखों में एलर्जी, लालिमा, खुजली की भी दिक्कत हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक, रोजाना ही दो-चार मरीज सांस की समस्या लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं। वहीं, भीषण गर्मी के चलते उल्टी-दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में शनिवार को 1553 पर्चे बने। वहीं, शुक्रवार को 1447 और बृहस्पतिवार को 1507 पर्चें बने थे। पूर्व में यह संख्या 800 से 1000 के बीच रहा करती थी।
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ये बरतें सावधानी
-गेहूं कटाई-निकासी वाले स्थल से दूर रहें। मास्क पहनकर बाहर निकलें। दमा रोगी अपनी दवा अपने साथ में रखें। रोजाना तीन-चार लीटर पानी जरूर पीयें। शरीर में पानी की कमी होने पर तुरंत ओआरएस का घोल पीयें। सर्दी-जुकाम के मरीज के सीधे संपर्क में न आएं। (जैसा कि डॉ. अंकिता वर्मा ने बताया।)
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