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तेज हवा चलने से गन्ना और धान की फसलें गिरीं, किसान चिंतित
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मिर्जापुर में गिरी धान की फसल को देखता किसान। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। दो दिन से हवा की रफ्तार 17 से 45 किमी प्रति घंटे तक सीमित रहने पर कई जगह धान और गन्ना की फसल खेतों में पलट गई। करीब एक लाख हेक्टेयर में बोए गए गन्ना की 60 फीसदी से अधिक बंधाई भी हो चुकी है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान के पौधे बालियां पड़ने से वजनी हो रहे हैं। उनका कहना है कि धान को गिरने से बचाने के लिए खेतों से पानी की निकासी को बेहतर बनाना होगा।
इस वर्ष जनपद के 2.13 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर धान की रोपाई हुई है और हवा की गति बढ़ने के अनुपात में धान की फसल को नुकसान भी बढ़ जाएगा। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि दो दिन से हवा के दबाव में सामान्य से ज्यादा कमी और पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होने के बावजूद बारिश की गति बेहद धीमी है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह से शाम तक 14 मिमी पानी बरसा और देर रात से शुक्रवार सुबह आठ बजे तक 58 मिमी बारिश हुई।
उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में बारिश के साथ तेज हवा चलने से बासमती धान समेत गन्ना, ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल आदि फसलों को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के आयुष प्रताप सिंह विभु, प्रेमशंकर पांडेय, पुरुषोत्तम सिंह, संतन पाल सिंह यादव, नूर मोहम्मद आदि किसानों का कहना है कि पहले बारिश कम होने से उनकी जमा पूंजी फसलों की खाद पानी पर खर्च कर दी और अब तैयार फसलें बारिश के साथ तेज हवा में गिरकर नष्ट हो रहीं हैं।
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कांट क्षेत्र के गांव गंगानगर निवासी प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा के अनुसार उन्होंने 50 एकड़ कृषि फार्म पर गन्ना उगाया और उसकी चार बार बंधाई भी कराई, लेकिन बीते दिन तेज हवा से अधिकांश गन्ना खेत में गिर गया। उनका कहना है कि ज्यादा लंबाई वाली प्रजातियों का गन्ना ज्यादा गिर रहा है। उन्होंने बताया कि मौसम सामान्य होने पर मजदूर लगाकर गिरा हुआ गन्ना खड़ा कराकर उसकी एक बंधाई और करानी पड़ेगी। इसके बावजूद गिरे हुए गन्ना की पैदावार और चीनी परता में कमी आने से किसानों के साथ चीनी मिलों को भी नुकसान होगा।
अल्हागंज में तीसरे दिन भी ठप रही बिजली आपूर्ति
अल्हागंज। बारिश के साथ चली तेज हवा से 33 केवी हाईटेंशन लाइन में आई खराबी ठीक नहीं हो पाने से कस्बा समेत आसपास के तमाम गांवों में शुक्रवार को तीसरे दिन भी बिजली आपूर्ति ठप रही। बिजली नहीं आने से नगर पंचायत की पेयजलापूर्ति व्यवस्था भी ठप है। बता देें कि दो दिन पहले बारिश का पानी केबिल बाक्स में चला जाने से उपकेंद्र पर लगी दो ट्रॉलियों में शार्ट सर्किट से आग लग गई और इसी वजह से लाइन मेें भी खराबी आ गई थी। विभागीय कर्मचारी भी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि बिजली आपूर्ति कब तक शुरू हो सकेगी।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीशचंद्र पाठक ने बताया कि मौसम साफ होने पर फसलों का सर्वे कराया जाएगा। विभागीय अधिकारियों समेत कृषि सहायकों की न्याय पंचायत स्तर पर टीमें सक्रिय की जाएंगी। ऋणी किसानों अथवा फसलों का बीमा कराने वाले किसानों को बीमा कंपनी की ओर से नियमानुसार क्षतिपूर्ति की जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि तेज हवा में बांधा जा चुका गन्ना भी गिर रहा है। धान के पौधे बालियां निकलने के कारण ऊपर से भारी हो रहे हैं। इसीलिए बारिश में भीगी धान की फसल हवा के हल्के दबाव से गिर रही है। किसान अपने खेतों से बारिश का पानी निकालने पर पूरा ध्यान दें क्योंकि खेत जितनी जल्दी सूखेंगे, फसलों की जड़ें मजबूती से जमी रहेंगी।
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इस वर्ष जनपद के 2.13 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर धान की रोपाई हुई है और हवा की गति बढ़ने के अनुपात में धान की फसल को नुकसान भी बढ़ जाएगा। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि दो दिन से हवा के दबाव में सामान्य से ज्यादा कमी और पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होने के बावजूद बारिश की गति बेहद धीमी है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह से शाम तक 14 मिमी पानी बरसा और देर रात से शुक्रवार सुबह आठ बजे तक 58 मिमी बारिश हुई।
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उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में बारिश के साथ तेज हवा चलने से बासमती धान समेत गन्ना, ज्वार, बाजरा, मक्का, तिल आदि फसलों को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्र के आयुष प्रताप सिंह विभु, प्रेमशंकर पांडेय, पुरुषोत्तम सिंह, संतन पाल सिंह यादव, नूर मोहम्मद आदि किसानों का कहना है कि पहले बारिश कम होने से उनकी जमा पूंजी फसलों की खाद पानी पर खर्च कर दी और अब तैयार फसलें बारिश के साथ तेज हवा में गिरकर नष्ट हो रहीं हैं।
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कांट क्षेत्र के गांव गंगानगर निवासी प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा के अनुसार उन्होंने 50 एकड़ कृषि फार्म पर गन्ना उगाया और उसकी चार बार बंधाई भी कराई, लेकिन बीते दिन तेज हवा से अधिकांश गन्ना खेत में गिर गया। उनका कहना है कि ज्यादा लंबाई वाली प्रजातियों का गन्ना ज्यादा गिर रहा है। उन्होंने बताया कि मौसम सामान्य होने पर मजदूर लगाकर गिरा हुआ गन्ना खड़ा कराकर उसकी एक बंधाई और करानी पड़ेगी। इसके बावजूद गिरे हुए गन्ना की पैदावार और चीनी परता में कमी आने से किसानों के साथ चीनी मिलों को भी नुकसान होगा।
अल्हागंज में तीसरे दिन भी ठप रही बिजली आपूर्ति
अल्हागंज। बारिश के साथ चली तेज हवा से 33 केवी हाईटेंशन लाइन में आई खराबी ठीक नहीं हो पाने से कस्बा समेत आसपास के तमाम गांवों में शुक्रवार को तीसरे दिन भी बिजली आपूर्ति ठप रही। बिजली नहीं आने से नगर पंचायत की पेयजलापूर्ति व्यवस्था भी ठप है। बता देें कि दो दिन पहले बारिश का पानी केबिल बाक्स में चला जाने से उपकेंद्र पर लगी दो ट्रॉलियों में शार्ट सर्किट से आग लग गई और इसी वजह से लाइन मेें भी खराबी आ गई थी। विभागीय कर्मचारी भी यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि बिजली आपूर्ति कब तक शुरू हो सकेगी।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीशचंद्र पाठक ने बताया कि मौसम साफ होने पर फसलों का सर्वे कराया जाएगा। विभागीय अधिकारियों समेत कृषि सहायकों की न्याय पंचायत स्तर पर टीमें सक्रिय की जाएंगी। ऋणी किसानों अथवा फसलों का बीमा कराने वाले किसानों को बीमा कंपनी की ओर से नियमानुसार क्षतिपूर्ति की जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि तेज हवा में बांधा जा चुका गन्ना भी गिर रहा है। धान के पौधे बालियां निकलने के कारण ऊपर से भारी हो रहे हैं। इसीलिए बारिश में भीगी धान की फसल हवा के हल्के दबाव से गिर रही है। किसान अपने खेतों से बारिश का पानी निकालने पर पूरा ध्यान दें क्योंकि खेत जितनी जल्दी सूखेंगे, फसलों की जड़ें मजबूती से जमी रहेंगी।