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राष्ट्रहित में होनी चाहिए मंत्री की सोच: श्रवणानंद
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 28 Feb 2015 12:03 AM IST
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एसएस कॉलेज में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन विदुर चरित्र का वर्णन किया गया। कथाव्यास श्रवणानंद सरस्वती ने कहा कि मंत्री को कभी भय या लोभ के वशीभूत होकर मंत्रणा नहीं करनी चाहिए। मंत्री को हमेशा राष्ट्रहित में सोचना चाहिए। यह राष्ट्र का उत्थान में सहायक होगा।
कथा व्यास ने कहा कि विदुर ने बिना भय के धृतराष्ट्र से दुर्योधन के विषय बात की थी। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हुए दुर्योधन की नीति को गलत करार दिया था। गोस्वामी तुलसीदास ने भी गुरु, सचिव और वैद्य से झूठ नहीं बोलने की बात की है। कहा कि इंद्रियों को भोग के लिए जितनी अधिक सामग्रियां दी जाएंगी उतनी ही भोगों में अधिक फंसेगी। इसलिए इंद्रियों को जीतकर मनुष्य को अपना लक्ष्य तय करना चाहिए।
चतुर्थ स्कंध का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि कोई भी धार्मिक कार्य किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं करना चाहिए। इससे उसका पुण्य समाप्त हो जाता है। प्रतिष्ठा से प्राप्त किया हुआ धन ही टिकाऊ होता है। अनीत से कमाया गया धन घर को बर्बाद कर देता है। हमें कर्मनिष्ठ होकर कार्य करना चाहिए, जिससे राष्ट्र की संप्रभुता बनी रहे और राष्ट्र का उत्थान हो। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम कोई भी व्यक्ति कैसे भी ले भगवान उसकी फरियाद जरूर सुनते हैं।
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इससे पूर्व स्वामी चिन्मयानंद ने वृन्दावन के आचार्य रामावतार एवं रविशंकर के साथ भागवत जी का पूजन किया। मुख्य यजमान रजनीश गुप्त सपत्नीक रहे। कथा से पूर्व राधिका शरण ने भजन, गजेंद्र उपाख्यान ने भी उपदेश दिए। सुबह के सत्र में मुख्य यजमान डॉ. सत्यप्रकाश मिश्र ने पत्नी समेत यज्ञ का पूजन किया।
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कथा व्यास ने कहा कि विदुर ने बिना भय के धृतराष्ट्र से दुर्योधन के विषय बात की थी। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हुए दुर्योधन की नीति को गलत करार दिया था। गोस्वामी तुलसीदास ने भी गुरु, सचिव और वैद्य से झूठ नहीं बोलने की बात की है। कहा कि इंद्रियों को भोग के लिए जितनी अधिक सामग्रियां दी जाएंगी उतनी ही भोगों में अधिक फंसेगी। इसलिए इंद्रियों को जीतकर मनुष्य को अपना लक्ष्य तय करना चाहिए।
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चतुर्थ स्कंध का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि कोई भी धार्मिक कार्य किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं करना चाहिए। इससे उसका पुण्य समाप्त हो जाता है। प्रतिष्ठा से प्राप्त किया हुआ धन ही टिकाऊ होता है। अनीत से कमाया गया धन घर को बर्बाद कर देता है। हमें कर्मनिष्ठ होकर कार्य करना चाहिए, जिससे राष्ट्र की संप्रभुता बनी रहे और राष्ट्र का उत्थान हो। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम कोई भी व्यक्ति कैसे भी ले भगवान उसकी फरियाद जरूर सुनते हैं।
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इससे पूर्व स्वामी चिन्मयानंद ने वृन्दावन के आचार्य रामावतार एवं रविशंकर के साथ भागवत जी का पूजन किया। मुख्य यजमान रजनीश गुप्त सपत्नीक रहे। कथा से पूर्व राधिका शरण ने भजन, गजेंद्र उपाख्यान ने भी उपदेश दिए। सुबह के सत्र में मुख्य यजमान डॉ. सत्यप्रकाश मिश्र ने पत्नी समेत यज्ञ का पूजन किया।