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Shahjahanpur News: पुराने धर्मशाला भवन को ध्वस्त करने के लिए लगाई जेसीबी
Thu, 24 Oct 2024 02:58 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 24 Oct 2024 02:58 AM IST
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जलालाबाद में धर्मशाला का ध्वस्तीकरण करती जेसीबी। संवाद
जलालाबाद। भगवान परशुराम मंदिर के पास बनी धर्मशालाओं के पुराने भवन को ध्वस्त करने के लिए बुधवार से इस काम में जुटे मजदूरों को हटाकर वहां जेसीबी लगा दी गई। इससे पुराने धर्मशाला भवन तोड़ने के काम में तेजी आ गई है। साथ ही परशुराम मंदिर परिसर के आसपास सुंदरीकरण के लिए निर्माण कार्य भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
यहां नया सत्संग भवन, श्रद्धालु विश्राम कक्ष, मंदिर ट्रस्ट का कार्यालय आदि बनाए जाने हैं। इसके लिए शासन ने 19 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर पहली किस्त के तौर पर पांच करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने इस काम का ठेका मेरठ की कंपनी मेसर्स एसके ट्रेडर्स को दिया है। ठेकेदार ने मजदूरों के जरिये मंगलवार से पुराने धर्मशाला भवन तोड़ने का काम शुरू कराया।
इससे पुराने भवन और उनका मलबा हटाने में होने वाली देरी को लेकर अमर उजाला ने 22 अक्तूबर के अंक में विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। निर्माण कंपनी के ठेकेदार का कहना था कि पुराने धर्मशाला भवनों का रास्ता संकरा है। इससे वहां तक जेसीबी ले जाना संभव नहीं है, जिसका अफसरों ने संज्ञान लिया और संकरे रास्ते में बने चबूतरों को तोड़कर जेसीबी पहुंचाई गई। इसके बाद काम में तेजी आई है।
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यहां नया सत्संग भवन, श्रद्धालु विश्राम कक्ष, मंदिर ट्रस्ट का कार्यालय आदि बनाए जाने हैं। इसके लिए शासन ने 19 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर पहली किस्त के तौर पर पांच करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। कार्यदायी संस्था यूपी प्रोजेक्ट कर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने इस काम का ठेका मेरठ की कंपनी मेसर्स एसके ट्रेडर्स को दिया है। ठेकेदार ने मजदूरों के जरिये मंगलवार से पुराने धर्मशाला भवन तोड़ने का काम शुरू कराया।
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इससे पुराने भवन और उनका मलबा हटाने में होने वाली देरी को लेकर अमर उजाला ने 22 अक्तूबर के अंक में विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। निर्माण कंपनी के ठेकेदार का कहना था कि पुराने धर्मशाला भवनों का रास्ता संकरा है। इससे वहां तक जेसीबी ले जाना संभव नहीं है, जिसका अफसरों ने संज्ञान लिया और संकरे रास्ते में बने चबूतरों को तोड़कर जेसीबी पहुंचाई गई। इसके बाद काम में तेजी आई है।
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