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भैंसी नदी को पार कर पाना आसान नहीं है नेताजी
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पुवायां। पुवायां क्षेत्र से विधानसभा चुनाव लड़ रहे नेताओं को पुवायां-खुटार हाईवे पर भैंसी नदी के पुल के मुद्दे सेे पार करना आसान न होगा। भैंसी नदी पुल नहीं बन पाना बड़ा मुद्दा है। लगभग 15 वर्ष से लोग भैंसी नदी के पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक पुल का पुनर्निर्माण न कराए जाने से मतदाता बहुत खफा हैं। रेलवे लाइन, रोजगार के अवसर आदि पर भी मतदाता नेताओं की बोलती बंद करने को तैयार बैठे हैं।
खुटार-पुवायां मार्ग पर भैंसी नदी का पुल है। पुल अत्यंत जर्जर है, जिस कारण इस मार्ग पर कई बार आवागमन बंद हो चुका है। इस पुल से रोजाना 500 से अधिक वाहन गुजरते हैं। पड़ोसी देश नेपाल के अलावा पलिया, भीरा, मैलानी, खुटार, गंगसरा आदि के यात्रियों को शाहजहांपुर, बरेली, दिल्ली आदि जाने के लिए इसी पुल से गुजरना होता है। लोहे के एंगिलों पर लकड़ी के पटलों से बना पुल इतना जर्जर हैं कि किसी भी दिन धराशाई हो सकता है।
रेलव लाइन पर भी लोग मांग रहे नेताओं से जवाब
मैलानी से फर्रुखाबाद रेल लाइन अंग्रेजों के समय में उखाड़ दी गई थी। इसके बाद पुवायां विधानसभा से लेकर जलालाबाद तक के लोग रेलवे लाइन की डलवाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन किसी भी दल के नेता ने इस संबंध में गंभीर प्रयास करने की जरूरत नहीं समझी। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी रेलवे लाइन का मामला जस का तस है।
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बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा
क्षेत्र के शिक्षित युवाओं को लोकल स्तर पर कोई रोजगार नहीं मिलता है। कारण है कि यहां बड़े कारखाने आदि नहीं हैं। इस दिशा में भी नेताओं ने प्रयास नहीं किए। पुवायां क्षेत्र के तमाम युवा रोजगार की तलाश में उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की जाकर नौकरी करते हैं। युवा क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फार्मेसी आदि के सरकारी कालेज आदि नहीं खोले जाने पर भी सवाल उठा रहे हैं।
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खुटार-पुवायां मार्ग पर भैंसी नदी का पुल है। पुल अत्यंत जर्जर है, जिस कारण इस मार्ग पर कई बार आवागमन बंद हो चुका है। इस पुल से रोजाना 500 से अधिक वाहन गुजरते हैं। पड़ोसी देश नेपाल के अलावा पलिया, भीरा, मैलानी, खुटार, गंगसरा आदि के यात्रियों को शाहजहांपुर, बरेली, दिल्ली आदि जाने के लिए इसी पुल से गुजरना होता है। लोहे के एंगिलों पर लकड़ी के पटलों से बना पुल इतना जर्जर हैं कि किसी भी दिन धराशाई हो सकता है।
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रेलव लाइन पर भी लोग मांग रहे नेताओं से जवाब
मैलानी से फर्रुखाबाद रेल लाइन अंग्रेजों के समय में उखाड़ दी गई थी। इसके बाद पुवायां विधानसभा से लेकर जलालाबाद तक के लोग रेलवे लाइन की डलवाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन किसी भी दल के नेता ने इस संबंध में गंभीर प्रयास करने की जरूरत नहीं समझी। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी रेलवे लाइन का मामला जस का तस है।
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बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा
क्षेत्र के शिक्षित युवाओं को लोकल स्तर पर कोई रोजगार नहीं मिलता है। कारण है कि यहां बड़े कारखाने आदि नहीं हैं। इस दिशा में भी नेताओं ने प्रयास नहीं किए। पुवायां क्षेत्र के तमाम युवा रोजगार की तलाश में उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की जाकर नौकरी करते हैं। युवा क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फार्मेसी आदि के सरकारी कालेज आदि नहीं खोले जाने पर भी सवाल उठा रहे हैं।