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मुद्दा : स्वच्छता के दावे तमाम, संसाधनों के नहीं इंतजाम
Sat, 29 Apr 2023 01:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sat, 29 Apr 2023 01:06 AM IST
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शाहजहांपुर। नगर निगम के पहले महापौर के सामने शहर की सफाई व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी। पांच साल पहले बना नगर निगम शहर से रोजाना निकलने वाले 150 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था करने में नाकाम साबित हुआ है। शहर में अब भी गलियों से लेकर सड़कों तक कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाना महापौर के लिए आसान नहीं होगा।
नगर निगम के अधिकारी स्वच्छता के लाख दावे कर रहे हों लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। वर्ष 2018 में नगर पालिका परिषद को नगर निगम का दर्जा दिया गया। नगर निगम बनने के बाद शहर का दायरा दायरा बढ़ गया। नगर निगम में शहर से सटे कई गांव भी शामिल हो गए। वार्ड भी बढ़कर 60 हो गए। नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या भी चार लाख से अधिक है।
सफाई व्यवस्था के लिहाज से शहर को पांच जोन में बांटा गया है। इसे देखते हुए संसाधन भी बढ़ाए गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली, जेसीबी, रोबोट, पोकलैंड आदि संसाधन सफाई व्यवस्था के लिए जुटाए गए। सफाईकर्मियों की संख्या कम होने पर संविदा और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को लगाया गया। इसके बाद भी शहर को साफ-सुथरा नहीं बनाया जा सका है। संबंधित अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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नगर निगम में कर्मचारियों की कमी
मानक के अनुसार 10 हजार व्यक्तियों पर 28 सफाई कर्मचारी तैनात होने चाहिए। नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या चार लाख से अधिक है। नगर निगम में वर्तमान में 510 नियमित कर्मचारी के स्थान पर 301, संविदा कर्मचारियों में 392 के स्थान पर 160 जबकि 547 आउटसोर्सिंग कर्मचारी तैनात हैं। इनमें करीब 150 कर्मचारी अन्य कामों में लगाए गए हैं, इनका सफाई से कोई लेना-देना नहीं है।
डंपिंग ग्राउंड में लगे रहते हैं कूड़े के ढेर
नगर निगम क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर 26 डंपिंग ग्राउंड बनाए गए हैं। जहां कूड़ा निस्तारित किया जाता है। नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो प्रतिदिन शहर से लगभग 150 मीट्रिक टन कूड़े का उठान होता है। कूड़ा निस्तारण के लिए वर्तमान में दो एमआरएफ सेंटर चल रहे हैं। फायर स्टेशन के पास बना एमआरएफ सेंटर करीब एक करोड़ की लागत से बनवाया गया है, लेकिन उसमें कूड़ा निस्तारण करने वाली एक मशीन खराब हो गई है। दूसरी भी कभी-कभी चलती है। यही हाल ककराकलां स्थित एमआरएफ सेंटर का है। यह भी करीब एक करोड़ की लागत से बना हैै, लेकिन यह पूरी क्षमता से नहीं चलता है। लिहाजा कूड़े का सही से निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
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उपलब्ध संसाधन
ट्रैक्टर-ट्रॉली-12
छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली-6
टाटा मैजिक वाहन-2
जेसीबी-3
लोडर-1
कंटेनर-3
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कूड़ा उठान की व्यवस्था ध्वस्त
शहर में कूड़ा उठान की व्यवस्था के लिए 50 ई-रिक्शा लगाए गए हैं। इन पर घर-घर से कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा है, लेकिन ये कुछ ही मोहल्लों में चल रहे हैं। इसके साथ ही कूड़ेदान भी गायब हो गए हैं। जिसकी वजह से गंदगी फैली रहती है।
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वर्जन-
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को पांच जोन में बांटा गया है। सफाई व्यवस्था रखने के बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। अधिकारी भी सफाई व्यवस्था देखने के लिए भ्रमण करते रहते हैं। - संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त
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नगर निगम के अधिकारी स्वच्छता के लाख दावे कर रहे हों लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। वर्ष 2018 में नगर पालिका परिषद को नगर निगम का दर्जा दिया गया। नगर निगम बनने के बाद शहर का दायरा दायरा बढ़ गया। नगर निगम में शहर से सटे कई गांव भी शामिल हो गए। वार्ड भी बढ़कर 60 हो गए। नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या भी चार लाख से अधिक है।
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सफाई व्यवस्था के लिहाज से शहर को पांच जोन में बांटा गया है। इसे देखते हुए संसाधन भी बढ़ाए गए। ट्रैक्टर-ट्रॉली, जेसीबी, रोबोट, पोकलैंड आदि संसाधन सफाई व्यवस्था के लिए जुटाए गए। सफाईकर्मियों की संख्या कम होने पर संविदा और आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को लगाया गया। इसके बाद भी शहर को साफ-सुथरा नहीं बनाया जा सका है। संबंधित अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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नगर निगम में कर्मचारियों की कमी
मानक के अनुसार 10 हजार व्यक्तियों पर 28 सफाई कर्मचारी तैनात होने चाहिए। नगर निगम क्षेत्र की जनसंख्या चार लाख से अधिक है। नगर निगम में वर्तमान में 510 नियमित कर्मचारी के स्थान पर 301, संविदा कर्मचारियों में 392 के स्थान पर 160 जबकि 547 आउटसोर्सिंग कर्मचारी तैनात हैं। इनमें करीब 150 कर्मचारी अन्य कामों में लगाए गए हैं, इनका सफाई से कोई लेना-देना नहीं है।
डंपिंग ग्राउंड में लगे रहते हैं कूड़े के ढेर
नगर निगम क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर 26 डंपिंग ग्राउंड बनाए गए हैं। जहां कूड़ा निस्तारित किया जाता है। नगर निगम के अधिकारियों की मानें तो प्रतिदिन शहर से लगभग 150 मीट्रिक टन कूड़े का उठान होता है। कूड़ा निस्तारण के लिए वर्तमान में दो एमआरएफ सेंटर चल रहे हैं। फायर स्टेशन के पास बना एमआरएफ सेंटर करीब एक करोड़ की लागत से बनवाया गया है, लेकिन उसमें कूड़ा निस्तारण करने वाली एक मशीन खराब हो गई है। दूसरी भी कभी-कभी चलती है। यही हाल ककराकलां स्थित एमआरएफ सेंटर का है। यह भी करीब एक करोड़ की लागत से बना हैै, लेकिन यह पूरी क्षमता से नहीं चलता है। लिहाजा कूड़े का सही से निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
उपलब्ध संसाधन
ट्रैक्टर-ट्रॉली-12
छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली-6
टाटा मैजिक वाहन-2
जेसीबी-3
लोडर-1
कंटेनर-3
कूड़ा उठान की व्यवस्था ध्वस्त
शहर में कूड़ा उठान की व्यवस्था के लिए 50 ई-रिक्शा लगाए गए हैं। इन पर घर-घर से कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा है, लेकिन ये कुछ ही मोहल्लों में चल रहे हैं। इसके साथ ही कूड़ेदान भी गायब हो गए हैं। जिसकी वजह से गंदगी फैली रहती है।
वर्जन-
नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को पांच जोन में बांटा गया है। सफाई व्यवस्था रखने के बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। अधिकारी भी सफाई व्यवस्था देखने के लिए भ्रमण करते रहते हैं। - संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त