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चार साल में नहीं बन सका सौ बेड का अस्पताल, खतरे में राजकीय मेडिकल कॉलेज की मान्यता
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शाहजहांपुर। जिले में कद्दावर मंत्रियों के होने के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में सौ बेड का अस्पताल बनकर तैयार नहीं हो सका है। चार साल बाद भी सिर्फ 30 प्रतिशत काम पूर्ण हो पाया है। निर्माण एजेंसी के ठेकेदार से लेकर मंत्री व अधिकारी तक जोर लगाकर हार गए पर निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ सका। हालात यही रहे तो राजकीय मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट आ सकता है।
2016 में सपा शासन में राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव रखने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जिगनेरा आए थे। उस समय राजकीय मेडिकल कॉलेज और सौ बेड के अस्पताल के लिए 193 करोड़ रुपये का बजट तय हुआ था। मेडिकल कॉलेज के भवन को बनाकर हैंडओवर कर दिया गया। सौ बेड के अस्पताल को 2018 में बनाकर अधिकारियों की सुपुर्दगी में देना था। उसका काम उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम अभी तक पूर्ण नहीं कर सका। निर्माण कार्य को देखने के लिए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना समेत शासन के कई अधिकारी पहुंचे। उन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही पर नाराजगी जताई। जिला स्तर के अधिकारियों ने भी शासन स्तर पर ठेकेदार की शिकायत की। दो दिन पहले आए कारागार व होमगार्ड राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति व महिला कल्याण व बाल विकास पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने निर्माणाधीन अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने भी निर्माण कार्य की धीमी गति को देखकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने चेताया था कि कार्य पूर्ण न होने के कारण एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) द्वारा एमबीबीएस की 100 सीट की पूर्ण मान्यता मिलने में कठिनाई हो सकती है।
कॉलेज की मान्यता बचाने को 100 बेड अस्पताल का निर्माण पूरा होना जरूरी
राजकीय मेडिकल कॉलेज की मान्यता को बचाने के लिए सौ बेड के अस्पताल का निर्माण होना जरूरी है। वर्तमान समय में अस्पताल के पास 330 बेड का इंतजाम है। यह जिले की जनसंख्या और आने वाले मरीजों को देखते हुए काफी साबित नहीं हो रहे हैं। अस्पताल में रोज ओपीडी में करीब 1500 मरीज आते हैं। यहां के बेड भी फुल रहते हैं। मरीजों का अतिरिक्त बेड डालकर उपचार करना पड़ता है। हाल यह है कि स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज कराना पड़ता है। मरीजों को चिकित्सीय सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए 100 बेड अस्पताल के निर्माण कार्य पूर्ण होने का इंतजार किया जा रहा। अधिकारियों के मुताबिक, मान्यता के लिए 430 बेड होना चाहिए। उसी को ध्यान में रखकर मेडिकल कॉलेज परिसर के पीछे की ओर सौ बेड का भवन बनाने की मंजूरी मिली थी। यदि काम पूर्ण नहीं होता तो मान्यता पर खतरा होने की संभावना बन जाएगी।
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छह मिस्त्री और 15 मजदूरों के सहारे चल रहा काम
100 बेड के अस्पताल का ढांचा बनकर तैयार हो गया। कुछ जगह पर प्लॉस्टर किया जा रहा है। निर्माण कार्य की गति ज्यादा धीमी है। सोमवार को छह मिस्त्री और 15 मजदूर कार्य करते हुए नजर आए। इतने बड़े भवन में कम श्रमिक लगाए जाने के कारण ही निर्माण में लेट-लतीफी हो रही है।
सरकार ने नहीं बढ़ाया बजट
-राजकीय मेडिकल कॉलेज और सौ बेड के अस्पताल के निर्माण के लिए 193 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इस बजट में ही सौ बेड अस्पताल भी बनना था। 2016 के बाद अभी तक अस्पताल के लिए कोई अतिरिक्त बजट स्वीकृति नहीं दी गई। अहम बात यह है कि उस समय के ईंट, सरिया, रेता और बजरी के दाम और अब के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
इतने छात्र-छात्राएं कर रहे पढ़ाई
330 एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं
240 पैरा मेडिकल के विद्यार्थी
60 सीटें बीएससी नर्सिंग के लिए हाल में आवंटित हुईं हैं।
- 100 बेड के अस्पताल के निर्माण में तेजी लाने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार के साथ ही मौखिक कहा जा चुका है। इसके बाद भी काम तेजी नहीं पकड़ सका। यदि सौ बेड का अस्पताल नहीं बना तो मान्यता पर भी खतरा आ सकता है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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2016 में सपा शासन में राजकीय मेडिकल कॉलेज की नींव रखने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जिगनेरा आए थे। उस समय राजकीय मेडिकल कॉलेज और सौ बेड के अस्पताल के लिए 193 करोड़ रुपये का बजट तय हुआ था। मेडिकल कॉलेज के भवन को बनाकर हैंडओवर कर दिया गया। सौ बेड के अस्पताल को 2018 में बनाकर अधिकारियों की सुपुर्दगी में देना था। उसका काम उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम अभी तक पूर्ण नहीं कर सका। निर्माण कार्य को देखने के लिए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना समेत शासन के कई अधिकारी पहुंचे। उन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही पर नाराजगी जताई। जिला स्तर के अधिकारियों ने भी शासन स्तर पर ठेकेदार की शिकायत की। दो दिन पहले आए कारागार व होमगार्ड राज्यमंत्री धर्मवीर प्रजापति व महिला कल्याण व बाल विकास पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने निर्माणाधीन अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने भी निर्माण कार्य की धीमी गति को देखकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने चेताया था कि कार्य पूर्ण न होने के कारण एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) द्वारा एमबीबीएस की 100 सीट की पूर्ण मान्यता मिलने में कठिनाई हो सकती है।
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कॉलेज की मान्यता बचाने को 100 बेड अस्पताल का निर्माण पूरा होना जरूरी
राजकीय मेडिकल कॉलेज की मान्यता को बचाने के लिए सौ बेड के अस्पताल का निर्माण होना जरूरी है। वर्तमान समय में अस्पताल के पास 330 बेड का इंतजाम है। यह जिले की जनसंख्या और आने वाले मरीजों को देखते हुए काफी साबित नहीं हो रहे हैं। अस्पताल में रोज ओपीडी में करीब 1500 मरीज आते हैं। यहां के बेड भी फुल रहते हैं। मरीजों का अतिरिक्त बेड डालकर उपचार करना पड़ता है। हाल यह है कि स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज कराना पड़ता है। मरीजों को चिकित्सीय सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए 100 बेड अस्पताल के निर्माण कार्य पूर्ण होने का इंतजार किया जा रहा। अधिकारियों के मुताबिक, मान्यता के लिए 430 बेड होना चाहिए। उसी को ध्यान में रखकर मेडिकल कॉलेज परिसर के पीछे की ओर सौ बेड का भवन बनाने की मंजूरी मिली थी। यदि काम पूर्ण नहीं होता तो मान्यता पर खतरा होने की संभावना बन जाएगी।
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छह मिस्त्री और 15 मजदूरों के सहारे चल रहा काम
100 बेड के अस्पताल का ढांचा बनकर तैयार हो गया। कुछ जगह पर प्लॉस्टर किया जा रहा है। निर्माण कार्य की गति ज्यादा धीमी है। सोमवार को छह मिस्त्री और 15 मजदूर कार्य करते हुए नजर आए। इतने बड़े भवन में कम श्रमिक लगाए जाने के कारण ही निर्माण में लेट-लतीफी हो रही है।
सरकार ने नहीं बढ़ाया बजट
-राजकीय मेडिकल कॉलेज और सौ बेड के अस्पताल के निर्माण के लिए 193 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इस बजट में ही सौ बेड अस्पताल भी बनना था। 2016 के बाद अभी तक अस्पताल के लिए कोई अतिरिक्त बजट स्वीकृति नहीं दी गई। अहम बात यह है कि उस समय के ईंट, सरिया, रेता और बजरी के दाम और अब के दामों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
इतने छात्र-छात्राएं कर रहे पढ़ाई
330 एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं
240 पैरा मेडिकल के विद्यार्थी
60 सीटें बीएससी नर्सिंग के लिए हाल में आवंटित हुईं हैं।
- 100 बेड के अस्पताल के निर्माण में तेजी लाने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार के साथ ही मौखिक कहा जा चुका है। इसके बाद भी काम तेजी नहीं पकड़ सका। यदि सौ बेड का अस्पताल नहीं बना तो मान्यता पर भी खतरा आ सकता है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज