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Shahjahanpur News: पुवायां के हरपाल ने 12 घंटे में पूरी की बॉर्डर अल्ट्रा रन 2024
Wed, 18 Dec 2024 01:21 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 18 Dec 2024 01:21 AM IST
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बॉर्डर अल्ट्रा रन प्रतियोगिता में भाग लेते हरपाल सिंह। स्रोत हरपाल
पुवायां। कस्बे के गांव गुलौली निवासी हरपाल सिंह ने 12 घंटे में 100 किमी की बॉर्डर अल्ट्रा रन-2024 पूरी कर ली। यह रेस भारतीय सैनिकों के सम्मान में राजस्थान के दुर्गम रेतीले और चुनौतीपूर्ण रास्तों पर जैसलमेल से लोंगेवाला तक हर वर्ष आयोजित की जाती है।
हरपाल ने बताया कि बॉर्डर अल्ट्रा रन का आयोजन द हेल रेस संस्था कराती है। अल्ट्रा मैराथन का मकसद 1971 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में उन्हें श्रद्धांजलि देना और देशभक्ति का जज्बा बढ़ाना है। रेस 50, 100 और 160 किमी की तीन कैटेगरी में आयोजित होती है। 14 और 15 दिसंबर को आयोजित प्रतियोगिता में तीनों कैटेगरी में 800 से अधिक धावकों ने भाग लिया था। सौ किमी रेस में लगभग 322 धावकों ने भाग लिया था।
हरपाल के पिता सुखचैन सिंह किसान हैं और मां कुलविंदर कौर गृहिणी हैं। अब हरपाल का लक्ष्य अगले वर्ष लद्दाख में आयोजित मैराथन में भाग लेना है। हरपाल सिंह ने बताया कि रेस बेहद कठिन है। इसे पार करना ही उपलब्धि मानी जाती है। ऊंचे टीलों वाले रेगिस्तान, समतल मार्ग, आंशिक रूप से घुमावदार, शुष्क मार्ग पर नौ से लेकर 30 डिग्री तापमान के बीच दौड़ना काफी कठिन होता है। तीन सौ से अधिक धावकों में आधे लोग ही रेस पूरी कर सके हैं।
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नोएडा की एक आईटी कंपनी में कार्यरत हरपाल सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और दोस्तों और कोच रब्बी सिंह को दिया हैं, जिन्होंने पूरे सफर के दौरान उनका मनोबल बढ़ाया।
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हरपाल ने बताया कि बॉर्डर अल्ट्रा रन का आयोजन द हेल रेस संस्था कराती है। अल्ट्रा मैराथन का मकसद 1971 के युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों की याद में उन्हें श्रद्धांजलि देना और देशभक्ति का जज्बा बढ़ाना है। रेस 50, 100 और 160 किमी की तीन कैटेगरी में आयोजित होती है। 14 और 15 दिसंबर को आयोजित प्रतियोगिता में तीनों कैटेगरी में 800 से अधिक धावकों ने भाग लिया था। सौ किमी रेस में लगभग 322 धावकों ने भाग लिया था।
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हरपाल के पिता सुखचैन सिंह किसान हैं और मां कुलविंदर कौर गृहिणी हैं। अब हरपाल का लक्ष्य अगले वर्ष लद्दाख में आयोजित मैराथन में भाग लेना है। हरपाल सिंह ने बताया कि रेस बेहद कठिन है। इसे पार करना ही उपलब्धि मानी जाती है। ऊंचे टीलों वाले रेगिस्तान, समतल मार्ग, आंशिक रूप से घुमावदार, शुष्क मार्ग पर नौ से लेकर 30 डिग्री तापमान के बीच दौड़ना काफी कठिन होता है। तीन सौ से अधिक धावकों में आधे लोग ही रेस पूरी कर सके हैं।
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नोएडा की एक आईटी कंपनी में कार्यरत हरपाल सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और दोस्तों और कोच रब्बी सिंह को दिया हैं, जिन्होंने पूरे सफर के दौरान उनका मनोबल बढ़ाया।