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Shahjahanpur News: फॉगिंग आधी-अधूरी...मच्छरों का प्रकोप पूरा
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बंटी, महमंद हद्दफ
शाहजहांपुर। मच्छरों की रोकथाम के नाम पर नगर निगम हर माह 8.24 लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन शहरवासियों को मच्छरों से राहत नहीं मिल पा रही है। बड़े वार्डों में एक बार फॉगिंग के लिए मशीन में 20 लीटर डीजल दिया जाता है। इससे पूरे वार्ड में छिड़काव नहीं हो पाता। अगले सप्ताह दोबारा नंबर आने तक मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। वहीं, अधिकांश वार्डों में एंटीलार्वा का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है। इससे मच्छरों की रोकथाम की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगर निगम में 60 वार्ड हैं। रोजाना दस वार्डों में फॉगिंग की जाती है। हफ्ते में एक बार वार्ड का नंबर आता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अब तक 48 डेंगू के मामले मिले हैं। अक्तूबर में चार और सितंबर में 13 मामले सामने आए। मलेरिया का वर्तमान में कोई मामला नहीं है, लेकिन जनवरी से अब तक 288 मामले मिल चुके हैं। संचारी रोग माह में मच्छरों की रोकथाम के लिए साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव किया जाना है।
नगर निगम के पास 16 फॉगिंग मशीनें हैं। चार जोन में सात टीमें रोस्टर के अनुसार अलग-अलग वार्डों में फॉगिंग करती हैं। एक मशीन को मच्छर मारने की दवा के साथ 20 लीटर डीजल दिया जाता है। वार्ड बड़े होने के कारण एक बार में पूरे क्षेत्र में छिड़काव नहीं हो पाता। इसके बाद अगले सप्ताह दोबारा नंबर आता है।
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एंटीलार्वा का नहीं होता छिड़काव, फॉगिंग की मारक क्षमता कम
नगर निगम की ओर से कुछ वीआईपी क्षेत्रों को छोड़कर शहर के बाकी वार्डों में एंटीलार्वा का छिड़काव नहीं किया जाता है। एंटीलार्वा के छिड़काव से मच्छर पानी में पनप नहीं पाते हैं। इसलिए मच्छरों की संख्या कम रहती है। फॉगिंग मशीन से छोड़ा जाने वाला केमिकल कारगर नहीं होता है। इसके छिड़काव से मच्छर भाग तो जाते हैं, लेकिन मरते नहीं हैं। इसका असर कम होते ही मच्छर फिर आ जाते हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक नौ नवंबर को फॉगिंग बंद कर दी जाएगी।
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फॉगिंग : एक नजर में
8.24 लाख प्रतिमाह खर्च होते हैं।
27,484 रुपये प्रतिदिन है खर्च।
16 फॉगिंग मशीनों का हो रहा संचालन
247 लीटर रोजाना होता है डीजल खर्च
39 लीटर पेट्रोल खर्च होता है प्रतिदिन
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वार्ड में फॉगिंग समय से नहीं की जा रही है। इसकी शिकायत नगर आयुक्त से की है। नगर आयुक्त ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 31 अक्तूबर को पूरे वार्ड में फॉगिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
- शिवओम सक्सेना, मक्कू बजरिया
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वार्ड काफी बड़ा है एक बार में फॉगिंग नहीं हो पाती है। इसके लिए दूसरे सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। इसी बीच मच्छर और पनप जाते हैं। एक साथ पूरे वार्ड में फॉगिंग की जाए तो मच्छर कम हो सकते हैं।
- नवनीत विनय सक्सेना, सुभाषनगर
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हमारे मोहल्ले में इस सीजन में एक बार भी फॉगिंग नहीं हुई और न ही एंटीलार्वा का छिड़काव हुआ। मच्छरों की वजह से रात में सोना मुश्किल हो गया है। निगम की ओर से फॉगिंग करानी चाहिए।
- बंटी, महमंद हद्दफ
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घर के पीछे से बड़ा नाला गुजरता है। इसकी वजह से मच्छर का प्रकोप अधिक रहता है। नगर निगम में कई बार फॉगिंग कराने के लिए शिकायत कराई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- राजू श्रीवास्तव, मक्कू बजरिया
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फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव लगातार कराया जा रहा है। इसके लिए सात टीमें गठित की गई है। अगर कहीं से शिकायत आती है तो तुरंत वहां पर टीमें भेजकर एंटीलार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जाती है।
- भान सिंह, अपर नगर आयुक्त
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नगर निगम में 60 वार्ड हैं। रोजाना दस वार्डों में फॉगिंग की जाती है। हफ्ते में एक बार वार्ड का नंबर आता है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अब तक 48 डेंगू के मामले मिले हैं। अक्तूबर में चार और सितंबर में 13 मामले सामने आए। मलेरिया का वर्तमान में कोई मामला नहीं है, लेकिन जनवरी से अब तक 288 मामले मिल चुके हैं। संचारी रोग माह में मच्छरों की रोकथाम के लिए साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव किया जाना है।
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नगर निगम के पास 16 फॉगिंग मशीनें हैं। चार जोन में सात टीमें रोस्टर के अनुसार अलग-अलग वार्डों में फॉगिंग करती हैं। एक मशीन को मच्छर मारने की दवा के साथ 20 लीटर डीजल दिया जाता है। वार्ड बड़े होने के कारण एक बार में पूरे क्षेत्र में छिड़काव नहीं हो पाता। इसके बाद अगले सप्ताह दोबारा नंबर आता है।
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एंटीलार्वा का नहीं होता छिड़काव, फॉगिंग की मारक क्षमता कम
नगर निगम की ओर से कुछ वीआईपी क्षेत्रों को छोड़कर शहर के बाकी वार्डों में एंटीलार्वा का छिड़काव नहीं किया जाता है। एंटीलार्वा के छिड़काव से मच्छर पानी में पनप नहीं पाते हैं। इसलिए मच्छरों की संख्या कम रहती है। फॉगिंग मशीन से छोड़ा जाने वाला केमिकल कारगर नहीं होता है। इसके छिड़काव से मच्छर भाग तो जाते हैं, लेकिन मरते नहीं हैं। इसका असर कम होते ही मच्छर फिर आ जाते हैं। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक नौ नवंबर को फॉगिंग बंद कर दी जाएगी।
फॉगिंग : एक नजर में
8.24 लाख प्रतिमाह खर्च होते हैं।
27,484 रुपये प्रतिदिन है खर्च।
16 फॉगिंग मशीनों का हो रहा संचालन
247 लीटर रोजाना होता है डीजल खर्च
39 लीटर पेट्रोल खर्च होता है प्रतिदिन
वार्ड में फॉगिंग समय से नहीं की जा रही है। इसकी शिकायत नगर आयुक्त से की है। नगर आयुक्त ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए 31 अक्तूबर को पूरे वार्ड में फॉगिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
- शिवओम सक्सेना, मक्कू बजरिया
वार्ड काफी बड़ा है एक बार में फॉगिंग नहीं हो पाती है। इसके लिए दूसरे सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। इसी बीच मच्छर और पनप जाते हैं। एक साथ पूरे वार्ड में फॉगिंग की जाए तो मच्छर कम हो सकते हैं।
- नवनीत विनय सक्सेना, सुभाषनगर
हमारे मोहल्ले में इस सीजन में एक बार भी फॉगिंग नहीं हुई और न ही एंटीलार्वा का छिड़काव हुआ। मच्छरों की वजह से रात में सोना मुश्किल हो गया है। निगम की ओर से फॉगिंग करानी चाहिए।
- बंटी, महमंद हद्दफ
घर के पीछे से बड़ा नाला गुजरता है। इसकी वजह से मच्छर का प्रकोप अधिक रहता है। नगर निगम में कई बार फॉगिंग कराने के लिए शिकायत कराई गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- राजू श्रीवास्तव, मक्कू बजरिया
फॉगिंग और एंटीलार्वा का छिड़काव लगातार कराया जा रहा है। इसके लिए सात टीमें गठित की गई है। अगर कहीं से शिकायत आती है तो तुरंत वहां पर टीमें भेजकर एंटीलार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जाती है।
- भान सिंह, अपर नगर आयुक्त

बंटी, महमंद हद्दफ

बंटी, महमंद हद्दफ

बंटी, महमंद हद्दफ

बंटी, महमंद हद्दफ