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सुशासन और लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक : कुलपति
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शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद (एसएस) विश्वविद्यालय के विधि संकाय की ओर से शनिवार को सुशासन, लोकतंत्र एवं नागरिक उत्तरदायित्व विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी में कुलपति पीबी सिंह ने कहा कि सुशासन और लोकतंत्र एक-दूसरे के पूरक हैं।
प्राचार्य जेएस ओझा ने कहा कि भारतीय संविधान लोकतंत्र की आत्मा है। यह देश का सर्वोच्च कानून है जो नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का अधिकार देता है।
पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के हाथों में होती है। नागरिकों को अधिकार और स्वतंत्रता के साथ कुछ उत्तरदायित्व भी निभाने होते हैं। मृदुल शुक्ला ने कहा कि सुशासन शासन को पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित कुमार यादव ने किया।
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प्राचार्य जेएस ओझा ने कहा कि भारतीय संविधान लोकतंत्र की आत्मा है। यह देश का सर्वोच्च कानून है जो नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का अधिकार देता है।
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पवन कुमार गुप्ता ने बताया कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के हाथों में होती है। नागरिकों को अधिकार और स्वतंत्रता के साथ कुछ उत्तरदायित्व भी निभाने होते हैं। मृदुल शुक्ला ने कहा कि सुशासन शासन को पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी बनाता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित कुमार यादव ने किया।
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