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Shahjahanpur News: गौरैया संरक्षण के लिए घर में बनाया बगीचा, रोज करते हैं पक्षी सेवा
Wed, 20 Mar 2024 01:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:08 AM IST
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अपने बगीचे में बैठे व्यापारी किशोर गुप्ता। संवाद
शाहजहांपुर। शहर में यूनियन बैंक की गली में रहने वाले व्यापारी किशोर गुप्ता पिछले आठ साल से गौरैया के संरक्षण में जुटे हुए हैं। सुबह होते ही उनके आंगन में गौरैया की चहचहाहट भरी मधुर आवाज मन को प्रफुल्लित कर देती है।
उन्होंने 2016 में आवास बनवाया था। उनको शुरुआत से ही पक्षियों और हरियाली से काफी लगाव है। इसलिए घर के लॉन में एक बड़ा बगीचा बनाया, जो दूसरी मंजिल तक फैला हुआ है। बगीचे के पौधों को बंदरों से बचाने के लिए पूरे घर में लोहे के जाल लगवाए हैं। धीरे-धीरे पौधे बढ़ने लगे तो पक्षियों ने अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में उनके बगीचे में गौरैया की मधुर चहचहाहट सुनाई देने लगी।
किशोर ने बताया कि सुबह छह बजे से उनकी शुरुआत पेड़-पौधों को पानी देने से होती है। इस दौरान काफी गौरैया बगीचे में एकत्र हो जाती हैं और पानी में भीगकर फुदकती हैं। वह करीब दो घंटे का समय अपने बगीचे में गुजारते हैं। गौरैया ने कई पेड़ों पर अपने घोंसले बना लिए हैं। हरा-भरा वातावरण मिलने से गौरैया के अलावा अन्य छोटी चिड़ियों के भी बगीचे में घरौंदे हैं। इन पक्षियों के लिए किशोर ने अपने बगीचे में फलों के पेड़ लगा रखे हैं, जिसमें अमरूद, बेर, नींबू आदि शामिल है। वह बगीचे में पानी और दाना से भरे बर्तन रखते हैं, जिससे गौरैया समेत अन्य चिड़िया खाती हैं।
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स्कूलों में घोंसले लगाकर गौरैया का कर रहे संरक्षण
पुवायां। नगर निवासी संजीव मेहरोत्रा पक्षी प्रेमी हैं। उनके नगर में ही तीन स्कूल चल रहे हैं। उन्होंने गौरैया के संरक्षण के लिए तीनों स्कूलों में कुल 30 घोंसले पेड़ों में लटका रखे हैं। इनमें रोजाना दाना डाला जाता है। इसके साथ ही पक्षियों के पानी पीने के लिए भी दो दर्जन से अधिक डिब्बे लगा रखे हैं। वह रोजाना चिड़ियों और कौओं को दाना और नमकीन खिलाते हैं। संवाद
ऐसे बढ़ेगा गौरैया का कुनबा
- छत, पार्क और बालकनी में बर्तन में दाना पानी भरकर रखें।
- प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा करें।
- घर के बाहर ऊंचाई व सुरक्षित जगह लकड़ी के घोंसले लटका सकते हैं।
- आंगन व पार्कों में कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस, चांदनी के पौधे लगाएं।
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उन्होंने 2016 में आवास बनवाया था। उनको शुरुआत से ही पक्षियों और हरियाली से काफी लगाव है। इसलिए घर के लॉन में एक बड़ा बगीचा बनाया, जो दूसरी मंजिल तक फैला हुआ है। बगीचे के पौधों को बंदरों से बचाने के लिए पूरे घर में लोहे के जाल लगवाए हैं। धीरे-धीरे पौधे बढ़ने लगे तो पक्षियों ने अपना बसेरा बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में उनके बगीचे में गौरैया की मधुर चहचहाहट सुनाई देने लगी।
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किशोर ने बताया कि सुबह छह बजे से उनकी शुरुआत पेड़-पौधों को पानी देने से होती है। इस दौरान काफी गौरैया बगीचे में एकत्र हो जाती हैं और पानी में भीगकर फुदकती हैं। वह करीब दो घंटे का समय अपने बगीचे में गुजारते हैं। गौरैया ने कई पेड़ों पर अपने घोंसले बना लिए हैं। हरा-भरा वातावरण मिलने से गौरैया के अलावा अन्य छोटी चिड़ियों के भी बगीचे में घरौंदे हैं। इन पक्षियों के लिए किशोर ने अपने बगीचे में फलों के पेड़ लगा रखे हैं, जिसमें अमरूद, बेर, नींबू आदि शामिल है। वह बगीचे में पानी और दाना से भरे बर्तन रखते हैं, जिससे गौरैया समेत अन्य चिड़िया खाती हैं।
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स्कूलों में घोंसले लगाकर गौरैया का कर रहे संरक्षण
पुवायां। नगर निवासी संजीव मेहरोत्रा पक्षी प्रेमी हैं। उनके नगर में ही तीन स्कूल चल रहे हैं। उन्होंने गौरैया के संरक्षण के लिए तीनों स्कूलों में कुल 30 घोंसले पेड़ों में लटका रखे हैं। इनमें रोजाना दाना डाला जाता है। इसके साथ ही पक्षियों के पानी पीने के लिए भी दो दर्जन से अधिक डिब्बे लगा रखे हैं। वह रोजाना चिड़ियों और कौओं को दाना और नमकीन खिलाते हैं। संवाद
ऐसे बढ़ेगा गौरैया का कुनबा
- छत, पार्क और बालकनी में बर्तन में दाना पानी भरकर रखें।
- प्रजनन के समय उनके अंडों की सुरक्षा करें।
- घर के बाहर ऊंचाई व सुरक्षित जगह लकड़ी के घोंसले लटका सकते हैं।
- आंगन व पार्कों में कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस, चांदनी के पौधे लगाएं।

अपने बगीचे में बैठे व्यापारी किशोर गुप्ता। संवाद

अपने बगीचे में बैठे व्यापारी किशोर गुप्ता। संवाद