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Shahjahanpur News: गर्रा में जलस्तर बढ़ने से शहर के तटीय मोहल्लों पर बाढ़ का खतरा
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बैजनाथ। संवाद
शाहजहांपुर। गर्रा नदी का जलस्तर रविवार को तेजी से बढ़ने के कारण शहर के तटीय मोहल्लों के लोगों की बाढ़ को लेकर धड़कनें बढ़ गईं हैं। हालांकि, नदी अभी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है, उसे देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। नदी के आसपास बने मकानों से लोगों ने सुरक्षित ठिकानों के लिए पलायन करने के लिए अपना कीमती सामान बांधना शुरू कर दिया है।
रविवार को सुबह गर्रा का जलस्तर 147.30 मीटरगेज था, जो अपराह्न तीन बजे तक 20 सेमी बढ़ गया। प्रशासन का दावा है कि गर्रा में पानी की वृद्धि दर सुबह से कम हुई है, लेकिन जिस तेजी से उफान बढ़ रहा है, उससे खतरा बना हुआ है। शहर के पास उमरगंज गांव में नदी का बहाव खेतों तक पहुंच जाने से उपजाऊ कृषि भूमि कटने लगी हैं।
पानी धीरे-धीरे गांव में बढ़ना शुरू हो गया है। इस कारण आसपास बसे लोगों में घबराहट बढ़ गई है। तिलहर तहसील के खुदागंज क्षेत्र में चितीबोझी और रामेश्वरगंज गौंटिया गांव में पानी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने शनिवार रात 12 बजे से क्षेत्र के सभी अधिकारियों सहित लेखपालों, राजस्व निरीक्षकों, आपदा मित्रों आदि को विभिन्न स्थानों पर तैनात कर दिया है। साथ ही सिंचाई विभाग से नदियों की स्थिति पर लगातार रिपोर्ट ली जा रही है।
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प्रभावित क्षेत्रों का एडीएम ने लिया जायजा
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने रविवार को एसडीएम सदर समेत तहसीलदार और राजस्व कर्मचारियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने शहर के सुभाषनगर समेत लखनऊ-दिल्ली हाईवे के नगरिया मोड़, सहवेगपुर, ककरा कलां, अजीजगंज डाम, हाईवे के बाइपास वाले गर्रा पुल आदि स्थानों पर भ्रमण किया। इस दौरान उन्हाेंने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की समय से चेतावनी देने, उनके अस्थायी पुनर्वास की व्यवस्थाएं कराने आदि के दिशा निर्देश दिए।
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गंगा, रामगंगा में फिर बढ़ा उफान, खतरे में आए 40 से ज्यादा गांव
कलान/जलालाबाद/परौर। कलान के भैंसार बांध पर रविवार को सुबह गंगा का जलस्तर 143.58 मीटरगेज था, जो दो घंटे बाद दो सेमी बढ़ गया। अब गंगा खतरे के निशान से सिर्फ पांच सेमी नीचे रह गई है। रात में पानी बढ़ने पर बाढ़ के हालात विकट होने तय हैं। जलालाबाद-शमाशाबाद हाईवे पर चौरा से बिसोला गांव तक तीन किमी हिस्से में दो फुट से ज्यादा पानी बहने से रविवार को सातवें दिन भी हाईवे पर यातायात बंद रहा। मिर्जापुर क्षेत्र में इस्लामनगर, आजादनगर, पैलानी उत्तर, कटैया नगला, ततार, कमतरी, मस्जिदनगला, मोतीनगला आदि गांवों के चारों ओर पानी बढ़ने से कई संपर्क मार्ग डूब गए हैं। संवाद
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टापू में बदले रामगंगा के तटीय गांव, तिकोला में फिर चली नाव
जलालाबाद क्षेत्र में कोला घाट पुल के पास रामगंगा के किनारे कसारी, सिठोली, बीघापुर, अतरी निजामपुर और बहगुल के तट पर बसे थाथरमई, उइला, संगाहे, कुंडरा, पहाड़पुर, हवा मड़ईया, मडइया गुजरान और तिकोला समेत खंडहर क्षेत्र के नासुतिया, केरा, शेरपुर चूरघुटी, बलदेबपुर, शाहपुर, भुलभुलागंज उमरपुर, मंगटोरा आदि गांव बाढ़ के निशाने पर आ गए हैं। मदनापुर क्षेत्र के कोना याकूबपुर, मंझोला, मोहनिया, मंझा आदि गांवों के आसपास भी पानी बढ़ रहा है। तिकोला पुल के आगे संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने से वहां फिर से नाव चलने लगी है। यही हाल कसारी जाने वाले रास्ते का है। ग्रामीणों के अनुसार रविवार दोपहर से अब तक एक फुट पानी बढ़ चुका है।
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परौर में नहीं थमा कटान, फसलें खराब होने से किसान परेशान
परौर। रामगंगा में तेजी से पानी बढ़ने के बावजूद मोहनपुर और नारायणनगर पश्चिमी में भूमि कटान कम नहीं हुआ। सिंचाई विभाग बंबू क्रेट में बालू की बोरियां लगाकर उन्हें कटान वाले हिस्से में लगा रहा है, लेकिन पानी का वेग ज्यादा होने से अस्थायी ठोकरें कटान रोकने में कारगर साबित नहीं हो रहीं हैं। आसपास के खेतों में पानी फिर से भरने लगा है। इस वजह से लंबे समय से डूबी फसलें सड़कर नष्ट होने से किसान परेशान हो उठे हैं। नारायणनगर के लालाराम कुशवाहा, शीशपाल कुशवाहा, सरवन लाल, ओमप्रकाश, हरिओम आदि ने बताया कि उनकी बाजरा, मक्का, मूंगफली, मूली, सोया, पालक आदि फसलें नष्ट हो गईं हैं। संवाद
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बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का दर्द
चार दिन पहले तक बाढ़ का पानी भरा रहने से लोगों को विभिन्न तरह की दिक्कतें हुईं। पानी कम हो जाने के बाद वे लोग काफी राहत महसूस कर रहे थे लेकिन फिर से पानी बढ़ जाने की उम्मीद नहीं थी।
- राधेश्याम, डुही जदीद (जलालाबाद)
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पानी से फसलों के बर्बाद होने का खतरा बढ़ने से लोग ज्यादा परेशान हैं। कई लोगों ने कर्ज का पैसा फसलों को तैयार करने में लगाया है। उनके लिए यह बाढ़ किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है।
-बैजनाथ, उइला (जलालाबाद)
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लगातार पानी मे डूबे रहने से मूंगफली, उर्द, बाजरा की फसल पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मक्का व धान की फसल को भी अच्छा खासा नुकसान होगा। यदि दोबारा पानी नहीं बढ़ता है तो काफी हद तक फसल बच जाएगी।
-विनय, तिकोला (जलालाबाद)
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पिछले 25 वर्ष से रामगंगा से भूमि कटान और बाढ़ का सामना कर रहा हूं। हर साल की तरह इस बार भी कई फसलें खराब हो गईं। सिंचाई विभाग बचाव का दिखावा करता है।
-प्रेमचंद्र कुशवाहा, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
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इस बार सब्जी की खेती की है। एक खेत में मूली लगाई थी, लेकिन फसल बाढ़ में डूबकर खराब हो गई। अब परिवार का खर्च चलाने में दिक्कत होगी। प्रशासन से अभी कोई मदद नहीं मिली है।
-संजीव कुमार, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
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गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन अभी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे है। शनिवार रात 12 बजे से जलस्तर में वृद्धि की दर धीमी हुई है। खन्नौत भी खतरे के निशान से 1.70 मीटर नीचे बह रही है। तटीय क्षेत्रों में जन सुरक्षा के लिहाज से निगरानी बढ़ा दी गई है और वहां के लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है।
-अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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रविवार को सुबह गर्रा का जलस्तर 147.30 मीटरगेज था, जो अपराह्न तीन बजे तक 20 सेमी बढ़ गया। प्रशासन का दावा है कि गर्रा में पानी की वृद्धि दर सुबह से कम हुई है, लेकिन जिस तेजी से उफान बढ़ रहा है, उससे खतरा बना हुआ है। शहर के पास उमरगंज गांव में नदी का बहाव खेतों तक पहुंच जाने से उपजाऊ कृषि भूमि कटने लगी हैं।
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पानी धीरे-धीरे गांव में बढ़ना शुरू हो गया है। इस कारण आसपास बसे लोगों में घबराहट बढ़ गई है। तिलहर तहसील के खुदागंज क्षेत्र में चितीबोझी और रामेश्वरगंज गौंटिया गांव में पानी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने शनिवार रात 12 बजे से क्षेत्र के सभी अधिकारियों सहित लेखपालों, राजस्व निरीक्षकों, आपदा मित्रों आदि को विभिन्न स्थानों पर तैनात कर दिया है। साथ ही सिंचाई विभाग से नदियों की स्थिति पर लगातार रिपोर्ट ली जा रही है।
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प्रभावित क्षेत्रों का एडीएम ने लिया जायजा
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने रविवार को एसडीएम सदर समेत तहसीलदार और राजस्व कर्मचारियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने शहर के सुभाषनगर समेत लखनऊ-दिल्ली हाईवे के नगरिया मोड़, सहवेगपुर, ककरा कलां, अजीजगंज डाम, हाईवे के बाइपास वाले गर्रा पुल आदि स्थानों पर भ्रमण किया। इस दौरान उन्हाेंने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की समय से चेतावनी देने, उनके अस्थायी पुनर्वास की व्यवस्थाएं कराने आदि के दिशा निर्देश दिए।
गंगा, रामगंगा में फिर बढ़ा उफान, खतरे में आए 40 से ज्यादा गांव
कलान/जलालाबाद/परौर। कलान के भैंसार बांध पर रविवार को सुबह गंगा का जलस्तर 143.58 मीटरगेज था, जो दो घंटे बाद दो सेमी बढ़ गया। अब गंगा खतरे के निशान से सिर्फ पांच सेमी नीचे रह गई है। रात में पानी बढ़ने पर बाढ़ के हालात विकट होने तय हैं। जलालाबाद-शमाशाबाद हाईवे पर चौरा से बिसोला गांव तक तीन किमी हिस्से में दो फुट से ज्यादा पानी बहने से रविवार को सातवें दिन भी हाईवे पर यातायात बंद रहा। मिर्जापुर क्षेत्र में इस्लामनगर, आजादनगर, पैलानी उत्तर, कटैया नगला, ततार, कमतरी, मस्जिदनगला, मोतीनगला आदि गांवों के चारों ओर पानी बढ़ने से कई संपर्क मार्ग डूब गए हैं। संवाद
टापू में बदले रामगंगा के तटीय गांव, तिकोला में फिर चली नाव
जलालाबाद क्षेत्र में कोला घाट पुल के पास रामगंगा के किनारे कसारी, सिठोली, बीघापुर, अतरी निजामपुर और बहगुल के तट पर बसे थाथरमई, उइला, संगाहे, कुंडरा, पहाड़पुर, हवा मड़ईया, मडइया गुजरान और तिकोला समेत खंडहर क्षेत्र के नासुतिया, केरा, शेरपुर चूरघुटी, बलदेबपुर, शाहपुर, भुलभुलागंज उमरपुर, मंगटोरा आदि गांव बाढ़ के निशाने पर आ गए हैं। मदनापुर क्षेत्र के कोना याकूबपुर, मंझोला, मोहनिया, मंझा आदि गांवों के आसपास भी पानी बढ़ रहा है। तिकोला पुल के आगे संपर्क मार्ग पानी में डूब जाने से वहां फिर से नाव चलने लगी है। यही हाल कसारी जाने वाले रास्ते का है। ग्रामीणों के अनुसार रविवार दोपहर से अब तक एक फुट पानी बढ़ चुका है।
परौर में नहीं थमा कटान, फसलें खराब होने से किसान परेशान
परौर। रामगंगा में तेजी से पानी बढ़ने के बावजूद मोहनपुर और नारायणनगर पश्चिमी में भूमि कटान कम नहीं हुआ। सिंचाई विभाग बंबू क्रेट में बालू की बोरियां लगाकर उन्हें कटान वाले हिस्से में लगा रहा है, लेकिन पानी का वेग ज्यादा होने से अस्थायी ठोकरें कटान रोकने में कारगर साबित नहीं हो रहीं हैं। आसपास के खेतों में पानी फिर से भरने लगा है। इस वजह से लंबे समय से डूबी फसलें सड़कर नष्ट होने से किसान परेशान हो उठे हैं। नारायणनगर के लालाराम कुशवाहा, शीशपाल कुशवाहा, सरवन लाल, ओमप्रकाश, हरिओम आदि ने बताया कि उनकी बाजरा, मक्का, मूंगफली, मूली, सोया, पालक आदि फसलें नष्ट हो गईं हैं। संवाद
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का दर्द
चार दिन पहले तक बाढ़ का पानी भरा रहने से लोगों को विभिन्न तरह की दिक्कतें हुईं। पानी कम हो जाने के बाद वे लोग काफी राहत महसूस कर रहे थे लेकिन फिर से पानी बढ़ जाने की उम्मीद नहीं थी।
- राधेश्याम, डुही जदीद (जलालाबाद)
पानी से फसलों के बर्बाद होने का खतरा बढ़ने से लोग ज्यादा परेशान हैं। कई लोगों ने कर्ज का पैसा फसलों को तैयार करने में लगाया है। उनके लिए यह बाढ़ किसी बड़ी आपदा से कम नहीं है।
-बैजनाथ, उइला (जलालाबाद)
लगातार पानी मे डूबे रहने से मूंगफली, उर्द, बाजरा की फसल पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मक्का व धान की फसल को भी अच्छा खासा नुकसान होगा। यदि दोबारा पानी नहीं बढ़ता है तो काफी हद तक फसल बच जाएगी।
-विनय, तिकोला (जलालाबाद)
पिछले 25 वर्ष से रामगंगा से भूमि कटान और बाढ़ का सामना कर रहा हूं। हर साल की तरह इस बार भी कई फसलें खराब हो गईं। सिंचाई विभाग बचाव का दिखावा करता है।
-प्रेमचंद्र कुशवाहा, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
इस बार सब्जी की खेती की है। एक खेत में मूली लगाई थी, लेकिन फसल बाढ़ में डूबकर खराब हो गई। अब परिवार का खर्च चलाने में दिक्कत होगी। प्रशासन से अभी कोई मदद नहीं मिली है।
-संजीव कुमार, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
गर्रा नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन अभी खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर नीचे है। शनिवार रात 12 बजे से जलस्तर में वृद्धि की दर धीमी हुई है। खन्नौत भी खतरे के निशान से 1.70 मीटर नीचे बह रही है। तटीय क्षेत्रों में जन सुरक्षा के लिहाज से निगरानी बढ़ा दी गई है और वहां के लोगों को भी सतर्क किया जा रहा है।
-अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

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