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द ग्रेट राजा मास्टर ने दिया पूरे मनोयोग से किए गए कार्य से सफलता मिलने का संदेश
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गांधी भवन प्रेक्षागृह में नाटक का मंचन करते कलाकार
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। पूरे मनोयाग से किया कार्य ही सफलता का सूचक है, अन्यथा असफलता ही हाथ लगती है। फिर चाहे जिंदगी की जंग हो अथवा अपनी असफलताओं को पूरा करने का जज्बा होना। ऐसा ही कुछ संदेश ‘द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी’ नाटक का रहा। जिसका मंचन गांधी भवन प्रेक्षागृह में किया गया। इस दौरान हंसी ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट से प्रेक्षागृह गूंजता रहा।
मंथन आर्ट्स की ओर से शुक्रवार शाम 07.30 बजे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य निर्देशक जरीफ मलिक आनंद ने दी जलाकर नाटक का शुभारंभ किया। इसके बाद दिनेश भारती द्वारा लिखित हास्य नाटक द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी में एक टेलर मास्टर के व्यावसायिक अंतरद्वंद्वों को रेखांकित किया। एक टेलर मास्टर का दिनोंदिन गिरता पुश्तैनी व्यवसाय है, तो दूसरी ओर उसके अंत:करण में दबा कलाकार जो मौका देखकर सिर उठाने की कोशिश करता है।
टेलर मास्टर अपनी द ग्रेट राजा मास्टर टेलरिंग कंपनी को द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी बनाने का निर्णय लेता है। इसके लिए वो बतौर अभिनेता अपनी दुकान में काम करने वाले टेलर व आसपास के लोगों को अभिनय का जिम्मा सौंप देता है। अभिनय की बारीकी से दूर-दूर तक वास्ता न रखने वाले मंच पर उतरते हैं तो जो हास्य स्थितियां मंचन के दौरान उत्पन्न होती हैं, वही इस नाटक का कथानक था। अनुभव के अभाव में एक उत्कृष्ट प्रस्तुति तैयार करने का दारोमदार टेलर मास्टर की रचनात्मक प्रतिभा पर है। नाटक का पटाक्षेप इस आत्मबोध के साथ होता है कि वह मंच पर नहीं, बल्कि दर्जीगिरी में ही कलाकारी कर सकता है।
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नाटक के कलाकार पारस दीक्षित ने राजा मास्टर, रीना राठौर-चम्पाकली, दुर्गेश कुमार-दिलेनादां, शीतल मिश्रा-अनारकली, सूरज कुमार-मैलुआ, नदीम अख्तर-गाजर गाजीपुरी, मोहित कनौजिया-चम्पाकली के बाप, दानिश अली-पत्रकार, ऐश्वर्य कृष्ण मिश्रा-लोटा मुरादाबादी, यश त्रिपाठी-सिपाही, फैजान खान-नर्तक का किरदार निभाया। नाटक का निर्देशन शिवा सक्सेना व संचालन इंदू अजनबी ने किया। मंच से परे सोनू सक्सेना, शंकर वर्मा, आशीष शर्मा का सहयोग रहा। अंकित मिश्रा, मनोज मंजुल, अतुल अवस्थी, नितेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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मंथन आर्ट्स की ओर से शुक्रवार शाम 07.30 बजे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य निर्देशक जरीफ मलिक आनंद ने दी जलाकर नाटक का शुभारंभ किया। इसके बाद दिनेश भारती द्वारा लिखित हास्य नाटक द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी में एक टेलर मास्टर के व्यावसायिक अंतरद्वंद्वों को रेखांकित किया। एक टेलर मास्टर का दिनोंदिन गिरता पुश्तैनी व्यवसाय है, तो दूसरी ओर उसके अंत:करण में दबा कलाकार जो मौका देखकर सिर उठाने की कोशिश करता है।
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टेलर मास्टर अपनी द ग्रेट राजा मास्टर टेलरिंग कंपनी को द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी बनाने का निर्णय लेता है। इसके लिए वो बतौर अभिनेता अपनी दुकान में काम करने वाले टेलर व आसपास के लोगों को अभिनय का जिम्मा सौंप देता है। अभिनय की बारीकी से दूर-दूर तक वास्ता न रखने वाले मंच पर उतरते हैं तो जो हास्य स्थितियां मंचन के दौरान उत्पन्न होती हैं, वही इस नाटक का कथानक था। अनुभव के अभाव में एक उत्कृष्ट प्रस्तुति तैयार करने का दारोमदार टेलर मास्टर की रचनात्मक प्रतिभा पर है। नाटक का पटाक्षेप इस आत्मबोध के साथ होता है कि वह मंच पर नहीं, बल्कि दर्जीगिरी में ही कलाकारी कर सकता है।
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नाटक के कलाकार पारस दीक्षित ने राजा मास्टर, रीना राठौर-चम्पाकली, दुर्गेश कुमार-दिलेनादां, शीतल मिश्रा-अनारकली, सूरज कुमार-मैलुआ, नदीम अख्तर-गाजर गाजीपुरी, मोहित कनौजिया-चम्पाकली के बाप, दानिश अली-पत्रकार, ऐश्वर्य कृष्ण मिश्रा-लोटा मुरादाबादी, यश त्रिपाठी-सिपाही, फैजान खान-नर्तक का किरदार निभाया। नाटक का निर्देशन शिवा सक्सेना व संचालन इंदू अजनबी ने किया। मंच से परे सोनू सक्सेना, शंकर वर्मा, आशीष शर्मा का सहयोग रहा। अंकित मिश्रा, मनोज मंजुल, अतुल अवस्थी, नितेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।