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आखिर मकसद में कामयाब हो ही गए आसाराम के गुर्गे
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 13 Jul 2015 11:30 PM IST
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आसाराम के गुर्गे कृपाल सिंह की हत्या करके पहली बार अपने मकसद में कामयाब हुए हैं। वैसे लगभग दो साल के अंतराल में आसाराम ने पीड़ित परिवार को तोड़ने और अपना पक्ष मजबूत करने के लिए कोई कोरकसर बाकी नहीं छोड़ी। फिर चाहे वह पीड़िता को बालिग साबित करने के लिए फर्जी टीसी का मामला रहा हो या फिर शहर में समय-समय पर सत्संग करने और पीड़िता के पिता के घर घुसकर कोई अनहोनी को अंजाम देने की बात हो, किसी में भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली, लेकिन इस बार पुलिस की चूक कहें या फिर होनी को दोष दिया जाए कि कृपाल सिंह आसाराम के गुर्गों की भेंट चढ़ गए।
आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली नाबालिग बिटिया को बालिग साबित करने के लिए आसाराम ने अपने गुर्गों को यहां भेजना शुरू किया, ताकि वह मनमाफिक जन्मतिथि वाली फर्जी टीसी बनवाकर कोर्ट में दाखिल कर सकें। पहले आसाराम के लखनऊ वाले कुछ गुर्गे नगर पालिका पहुंचे और वहां पटल सहायक को लालच देकर फर्जी टीसी की मांग की, लेकिन यहां बात नहीं बनी। इसके बाद ये लोग उस स्कूल पहुंचे जहां बिटिया ने आरंभिक शिक्षा पाई थी। यहां प्रधानाचार्य उनकी राह में रोड़ा बनकर खड़े हो गए और प्रलोभन के तौर पर उन्हें पचास लाख रुपये तक का लालच दिया गया, लेकिन वह फर्जी टीसी देने को जब राजी नहीं हुए तो उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई और एक दिन उनके स्कूल आवास पर अखबार में लपेटकर 315 बोर का जीवित कारतूस तथा धमकी भरे दो पत्र भेजे गए। फिर भी वह टीसी नहीं ले पाए। इसके बावजूद दो स्कूलों ने टीसी देकर मामले के तूल जरूर दिया।
इसी तरह रुद्रपुर आश्रम में सत्संग के लिए कई जिलों से साधक बसों में भरकर पहुंचने लगे, तब पुलिस-प्रशासन ने सत्संग नहीं होने दिया और साधक आश्रम गेट के सामने ही नतमस्तक होकर बैंरग हो गए। इसी तरह जीआईसी मैदान में संत सम्मेलन भी रोका गया, कई बार संदिग्ध लोगों को पीड़िता के घर के आसपास देखा गया, इसमें महिलाएं और युवतियां भी थीं, लेकिन वह भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकीं। बीच-बीच में शहर में आसाराम के साहित्य (पत्र-पत्रिकाओं) को भी शहर में बंटवाया गया। इनके माध्यम से यह साबित करने का प्रयास किया गया कि पीड़िता दोषी और बालिग है और आसाराम निर्दोष हैं।
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अब तक क्यों सीज नहीं हुआ रुद्रपुर आश्रम
शाहजहांपुर। आसाराम का रुद्रपुर स्थित आश्रम सीज नहीं करने के पीछे भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरू में जब यहां दूर-दूर से सत्संगी आने लगे तो जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए आश्रम में सत्संग नहीं होने दिया और पीएससी तथा पुलिस लगाकर सुरक्षा बढ़ा दी। कई महीनों तक आश्रम में पीएसी का पहरा रहा। खास बात तो यह रही कि तब भी आश्रम से आसाराम के सेवादार घनश्याम को वहां से नहीं हटाया गया और पीएसी की सुरक्षा में वह आश्रम में ही मौज करता रहा। उसे गाय पालने का बहाना दे दिया गया। गाय तो किसी भी गोशाला अथवा गांव वाले को दी जा सकती थी, लेकिन सेवादार को आश्रय देना और आश्रम सीज नहीं करने के पीछे प्रशासन की क्या मंशा थी, यह किसी के गले नहीं उतर रहा है। अब पीड़िता के पिता ने प्रशासन से एक बार फिर आश्रम सीज करने की मांग उठाई है।
आसपास के लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से आश्रम में रात को संदिग्ध गतिविधियां बढ़ गई थीं। संदिग्ध लोगों का गाडिय़ों से देर रात आना-जाना बढ़ जाता था। कृपाल की हत्या के बाद पुलिस ने आश्रम के सेवादार घनश्याम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। साथ ही आश्रम गेट पर ताला डाल दिया गया है। इस घटना के बाद से गांव वाले भी सकते में हैं। आम लोगों का कहना है कि जब आश्रम में सारी गतिविधियां ठप हैं तो फिर वहां सेवादार क्यों तैनात रहा। उसे यहां से क्यों नहीं भगाया गया। कहा तो यह भी जा रहा है कि आश्रम में रहकर घनश्याम सारी गतिविधियों को अपने आका तक पहुंचाता था।
कृपाल को दिया गया था लालच
पिछले दो-तीन माह से रुद्रपुर आश्रम से शहर को असहज करने वाली गतिविधियां जोर पकड़ रही थीं। आश्रम का एकमात्र सेवादार घनश्याम यहां बाहरी गुर्गों को बुलाकर पूरी जानकारी देता था और ऊपर से मिलने वाले दिशा-निर्देशों का पालन करता था। सुरक्षा के लिहाज से यह प्रक्रिया रात को ही चलती थी। चूंकि इस ओर पुलिस का कोई ध्यान ही नहीं था, इसलिए घनश्याम ने खूब मौके का फायदा उठाते हुए कृपाल सिंह से भी संपर्क साध लिया। बताया जाता है कि उसने कृपाल सिंह को आसाराम का साथ देने के लिए काफी लालच भी दिया था। जिस दिन कृपाल पर कातिलाना हमला हुआ, उस दिन भी घनश्याम से कृपाल की बात हुई थी।
आश्रम की तलाशी से बच रही पुलिस
इतना सब कुछ होने के बाद भी पुलिस रुद्रपुर आश्रम की तलाशी लेने से बच रही है। एक बार फिर गाय का बहाना करते हुए पुलिस सेवादार घनश्याम का ही पक्ष ले रही है। साथ ही आश्रम के कमल्रों में ताला पड़ा होने की बात कहकर पल्ला झाडने की कोशिश की जा रही है। यदि वहां के सभी कमरों की गहनता से तलाशी ली जाए तो पुलिस को काफी अहम सबूत मिल सकते हैं।
तीन दिन पहले भी दिखे थे संदिग्ध
शाहजहांपुर। पीड़िता के घर के पास तीन दिन पहले भी संदिग्ध दिखाई दिए थे। ये लोग लाल रंग की बाइक लिए थे और बिटिया के घर के सामने कुछ दूरी पर पान के खोखे पर खड़े देखे गए। बिटिया के पिता ने बताया कि कृपाल सिंह पर हमले से पहले उन्हें ही निशाना बनाने की योजना आसाराम के गुर्गों ने बनाई होगी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। वह बताते हैं कि उन्होंने घर के सामने कुछ दूरी पर पान के एक खोखे पर लाल मोटरसाइकिल लिए दो-तीन लोगों को देखा था, यह लोग दिन में कई बार दिखाई दिए। इस पर उन्हें शक हुआ और इसकी जानकारी घर पर तैनात पुलिसकर्मियों को दी। इसके बाद पुलिसकर्मी गेट के बाहर आकर खड़े हुए तो वह लोग भाग गए। उसके बाद कोई दिखाई नहीं दिया।
विधायक खन्ना ने लिया हालचाल
शाहजहांपुर। आसाराम प्रकरण के गवाह कृपाल सिंह की मौत के बाद बने हालात की जानकारी लेने और पीड़ित परिवार को हौसला देने के लिए सोमवार को पुलिस अधिकारियों के अलावा नगर विधायक सुरेश खन्ना भी बिटिया के घर पहुंचे और बिटिया के पिता से बात कर उनकी हिम्मत बढ़ाई। इससे पूर्व सुबह के समय एसओजी की टीम और उसके बाद एसपी सिटी राजेश कुमार ने बिटिया के पिता से लंबी पूछताछ की।
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आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली नाबालिग बिटिया को बालिग साबित करने के लिए आसाराम ने अपने गुर्गों को यहां भेजना शुरू किया, ताकि वह मनमाफिक जन्मतिथि वाली फर्जी टीसी बनवाकर कोर्ट में दाखिल कर सकें। पहले आसाराम के लखनऊ वाले कुछ गुर्गे नगर पालिका पहुंचे और वहां पटल सहायक को लालच देकर फर्जी टीसी की मांग की, लेकिन यहां बात नहीं बनी। इसके बाद ये लोग उस स्कूल पहुंचे जहां बिटिया ने आरंभिक शिक्षा पाई थी। यहां प्रधानाचार्य उनकी राह में रोड़ा बनकर खड़े हो गए और प्रलोभन के तौर पर उन्हें पचास लाख रुपये तक का लालच दिया गया, लेकिन वह फर्जी टीसी देने को जब राजी नहीं हुए तो उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई और एक दिन उनके स्कूल आवास पर अखबार में लपेटकर 315 बोर का जीवित कारतूस तथा धमकी भरे दो पत्र भेजे गए। फिर भी वह टीसी नहीं ले पाए। इसके बावजूद दो स्कूलों ने टीसी देकर मामले के तूल जरूर दिया।
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इसी तरह रुद्रपुर आश्रम में सत्संग के लिए कई जिलों से साधक बसों में भरकर पहुंचने लगे, तब पुलिस-प्रशासन ने सत्संग नहीं होने दिया और साधक आश्रम गेट के सामने ही नतमस्तक होकर बैंरग हो गए। इसी तरह जीआईसी मैदान में संत सम्मेलन भी रोका गया, कई बार संदिग्ध लोगों को पीड़िता के घर के आसपास देखा गया, इसमें महिलाएं और युवतियां भी थीं, लेकिन वह भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सकीं। बीच-बीच में शहर में आसाराम के साहित्य (पत्र-पत्रिकाओं) को भी शहर में बंटवाया गया। इनके माध्यम से यह साबित करने का प्रयास किया गया कि पीड़िता दोषी और बालिग है और आसाराम निर्दोष हैं।
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अब तक क्यों सीज नहीं हुआ रुद्रपुर आश्रम
शाहजहांपुर। आसाराम का रुद्रपुर स्थित आश्रम सीज नहीं करने के पीछे भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शुरू में जब यहां दूर-दूर से सत्संगी आने लगे तो जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए आश्रम में सत्संग नहीं होने दिया और पीएससी तथा पुलिस लगाकर सुरक्षा बढ़ा दी। कई महीनों तक आश्रम में पीएसी का पहरा रहा। खास बात तो यह रही कि तब भी आश्रम से आसाराम के सेवादार घनश्याम को वहां से नहीं हटाया गया और पीएसी की सुरक्षा में वह आश्रम में ही मौज करता रहा। उसे गाय पालने का बहाना दे दिया गया। गाय तो किसी भी गोशाला अथवा गांव वाले को दी जा सकती थी, लेकिन सेवादार को आश्रय देना और आश्रम सीज नहीं करने के पीछे प्रशासन की क्या मंशा थी, यह किसी के गले नहीं उतर रहा है। अब पीड़िता के पिता ने प्रशासन से एक बार फिर आश्रम सीज करने की मांग उठाई है।
आसपास के लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से आश्रम में रात को संदिग्ध गतिविधियां बढ़ गई थीं। संदिग्ध लोगों का गाडिय़ों से देर रात आना-जाना बढ़ जाता था। कृपाल की हत्या के बाद पुलिस ने आश्रम के सेवादार घनश्याम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। साथ ही आश्रम गेट पर ताला डाल दिया गया है। इस घटना के बाद से गांव वाले भी सकते में हैं। आम लोगों का कहना है कि जब आश्रम में सारी गतिविधियां ठप हैं तो फिर वहां सेवादार क्यों तैनात रहा। उसे यहां से क्यों नहीं भगाया गया। कहा तो यह भी जा रहा है कि आश्रम में रहकर घनश्याम सारी गतिविधियों को अपने आका तक पहुंचाता था।
कृपाल को दिया गया था लालच
पिछले दो-तीन माह से रुद्रपुर आश्रम से शहर को असहज करने वाली गतिविधियां जोर पकड़ रही थीं। आश्रम का एकमात्र सेवादार घनश्याम यहां बाहरी गुर्गों को बुलाकर पूरी जानकारी देता था और ऊपर से मिलने वाले दिशा-निर्देशों का पालन करता था। सुरक्षा के लिहाज से यह प्रक्रिया रात को ही चलती थी। चूंकि इस ओर पुलिस का कोई ध्यान ही नहीं था, इसलिए घनश्याम ने खूब मौके का फायदा उठाते हुए कृपाल सिंह से भी संपर्क साध लिया। बताया जाता है कि उसने कृपाल सिंह को आसाराम का साथ देने के लिए काफी लालच भी दिया था। जिस दिन कृपाल पर कातिलाना हमला हुआ, उस दिन भी घनश्याम से कृपाल की बात हुई थी।
आश्रम की तलाशी से बच रही पुलिस
इतना सब कुछ होने के बाद भी पुलिस रुद्रपुर आश्रम की तलाशी लेने से बच रही है। एक बार फिर गाय का बहाना करते हुए पुलिस सेवादार घनश्याम का ही पक्ष ले रही है। साथ ही आश्रम के कमल्रों में ताला पड़ा होने की बात कहकर पल्ला झाडने की कोशिश की जा रही है। यदि वहां के सभी कमरों की गहनता से तलाशी ली जाए तो पुलिस को काफी अहम सबूत मिल सकते हैं।
तीन दिन पहले भी दिखे थे संदिग्ध
शाहजहांपुर। पीड़िता के घर के पास तीन दिन पहले भी संदिग्ध दिखाई दिए थे। ये लोग लाल रंग की बाइक लिए थे और बिटिया के घर के सामने कुछ दूरी पर पान के खोखे पर खड़े देखे गए। बिटिया के पिता ने बताया कि कृपाल सिंह पर हमले से पहले उन्हें ही निशाना बनाने की योजना आसाराम के गुर्गों ने बनाई होगी, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। वह बताते हैं कि उन्होंने घर के सामने कुछ दूरी पर पान के एक खोखे पर लाल मोटरसाइकिल लिए दो-तीन लोगों को देखा था, यह लोग दिन में कई बार दिखाई दिए। इस पर उन्हें शक हुआ और इसकी जानकारी घर पर तैनात पुलिसकर्मियों को दी। इसके बाद पुलिसकर्मी गेट के बाहर आकर खड़े हुए तो वह लोग भाग गए। उसके बाद कोई दिखाई नहीं दिया।
विधायक खन्ना ने लिया हालचाल
शाहजहांपुर। आसाराम प्रकरण के गवाह कृपाल सिंह की मौत के बाद बने हालात की जानकारी लेने और पीड़ित परिवार को हौसला देने के लिए सोमवार को पुलिस अधिकारियों के अलावा नगर विधायक सुरेश खन्ना भी बिटिया के घर पहुंचे और बिटिया के पिता से बात कर उनकी हिम्मत बढ़ाई। इससे पूर्व सुबह के समय एसओजी की टीम और उसके बाद एसपी सिटी राजेश कुमार ने बिटिया के पिता से लंबी पूछताछ की।