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उत्तराखंड में आपदा से ढाई घाट पर कल्पवासियों को खतरा, प्रशासन सतर्क
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शाहजहांपुर/ मिर्जापुर। उत्तराखंड के चमेली जिले में ग्लेेशियर फटने की आपदा से गंगा में उफान आने की आशंका बढ़ गई है। इससे ढाई घाट गंगा तट पर कल्पवास कर रहे श्रद्धलुओं के लिए खतरा भी बढ़ गया है। प्रदेश सरकार द्वारा बिजनौर से लेकर कानपुर और वाराणसी तक अलर्ट जारी किया गया है, जिसके बाद यहां का जिला प्रशासन ढाईघाट गंगा तट पर डेरा डाले कल्पवासियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। एसडीएम कलान के निर्देश पर लेखपालों, जिला पंचायत के कर्मचारियों को पुलिस के साथ मौके पर भेजा गया है।
गंगा तट पर लाउडस्पीकर से सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दिए जाने पर गंगा की दो धाराओं के बीच टापू पर बसे कल्पवासियों में खलबली मच गई और उन्होंने सामान समेटकर नाव से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। उधर, गंगा पर बने भैंसार बांध की ऊंचाई काफी ज्यादा होने से उसे फिलहाल कोई खतरा नहीं है, फिर भी बांध और वहां गंगा के जल स्तर पर निगाह रखी जा रही है।
रविवार को दिन में 11 बजे के बाद उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने की सूचना दोपहर एक बजे ढाईघाट माघ मेले में कल्पवास कर रहे साधु-संतों और गृहस्थ श्रद्धालुओं तक पहुंची तो उनमें खलबली मच गई। बाद में प्रशासन ने बाढ़ की आशंका में हाई अलर्ट घोषित कर लाउडस्पीकर से सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी तो टापू पर पंडाल लगाकर डेरा डाले साधु-संतों और श्रद्धालु अपने टेंट-राउटी उखाड़कर ऊंचे स्थान पर पहुंचने लगे। जिला पंचायत के सहायक राजस्व निरीक्षक शंकर शरण गुप्ता, लेखपाल प्रद्युम्न कुमार और आदर्श कुमार ने लाउडस्पीकर से मेले में टापू पर बसे श्रद्धालुओं को उत्तराखंड में आई आपदा की सूचना देकर उन्हें तट से दूर ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर जाने को आगाह किया।
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हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार से यहां तक पानी आने में तीन से चार दिन लगेंगे, लेकिन जीवन की सुरक्षा को लेकर कल्पवासी खासे चिंतित दिखे। गंगा तट पर नावों की कमी से श्रद्धालु भयभीत हैं। नाव वाले भी पुलिस की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। हालांकि, मौसम खुशनुमा होने के कारण मेले में श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला सुबह से दोपहर तक बना रहा।
इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
मिर्जापुर। भैंसार बांध बनने के बाद गांव भैंसार समेत कलान क्षेत्र मेें आसपास के दो दर्जन तटवर्ती गांव बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन मिर्जापुर ब्लॉक क्षेत्र में आजादनगर, इस्लामनगर, कमतरी, चितार, चौंरा आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हर साल मानसून सीजन में गंगा का जल स्तर बढने पर ये गांव टापू बन जाते हैं। इसलिए प्रशासन ने इन सभी गांवों में लाउडस्पीकर से चेतावनी जारी कर ग्रामीणों को सतर्क कर दिया है कि नदी तट की ओर पशु लेकर जाने से बचें और आवश्यक खाद्य वस्तुओं का प्रबंध कर लें।
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने और बांध टूटने से गंगा में बाढ़ की आशंका पैदा हुई है, लेकिन ढाई घाट पर अभी हालात सामान्य बने हुए हैं। संबंधित लेखपालों के साथ पुलिस को भेजकर कल्पवासियों को चेताया गया है कि वह गंगा तट से दूर हटकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। गंगा के तटवर्ती गांवों के लोगों को भी बाढ़ से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई। लोग स्वयं सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं।
-बरखा सिंह, एसडीएम कलान
भैंसार बांध पर अभी गंगा खतरे के निशान से काफी नीचे लगभग 141 मीटर पर बह रही है। हरिद्वार से यहां तक पानी आने में 72 घंटे से अधिक समय लगेगा। जैसी सूचनाएं मिली हैं, उन्हें देखते बांध पर जलस्तर लगभग तीन मीटर तक बढ़ सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में भी बांध पूरी तरह सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां हाई फ्लड लेवल (उच्चतम बाढ़ स्तर) 144.10 मीटर है।
-आरके वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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गंगा तट पर लाउडस्पीकर से सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दिए जाने पर गंगा की दो धाराओं के बीच टापू पर बसे कल्पवासियों में खलबली मच गई और उन्होंने सामान समेटकर नाव से सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है। उधर, गंगा पर बने भैंसार बांध की ऊंचाई काफी ज्यादा होने से उसे फिलहाल कोई खतरा नहीं है, फिर भी बांध और वहां गंगा के जल स्तर पर निगाह रखी जा रही है।
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रविवार को दिन में 11 बजे के बाद उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने की सूचना दोपहर एक बजे ढाईघाट माघ मेले में कल्पवास कर रहे साधु-संतों और गृहस्थ श्रद्धालुओं तक पहुंची तो उनमें खलबली मच गई। बाद में प्रशासन ने बाढ़ की आशंका में हाई अलर्ट घोषित कर लाउडस्पीकर से सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी तो टापू पर पंडाल लगाकर डेरा डाले साधु-संतों और श्रद्धालु अपने टेंट-राउटी उखाड़कर ऊंचे स्थान पर पहुंचने लगे। जिला पंचायत के सहायक राजस्व निरीक्षक शंकर शरण गुप्ता, लेखपाल प्रद्युम्न कुमार और आदर्श कुमार ने लाउडस्पीकर से मेले में टापू पर बसे श्रद्धालुओं को उत्तराखंड में आई आपदा की सूचना देकर उन्हें तट से दूर ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर जाने को आगाह किया।
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हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार से यहां तक पानी आने में तीन से चार दिन लगेंगे, लेकिन जीवन की सुरक्षा को लेकर कल्पवासी खासे चिंतित दिखे। गंगा तट पर नावों की कमी से श्रद्धालु भयभीत हैं। नाव वाले भी पुलिस की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमाना किराया वसूल रहे हैं। हालांकि, मौसम खुशनुमा होने के कारण मेले में श्रद्धालुओं के आगमन का सिलसिला सुबह से दोपहर तक बना रहा।
इन गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
मिर्जापुर। भैंसार बांध बनने के बाद गांव भैंसार समेत कलान क्षेत्र मेें आसपास के दो दर्जन तटवर्ती गांव बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन मिर्जापुर ब्लॉक क्षेत्र में आजादनगर, इस्लामनगर, कमतरी, चितार, चौंरा आदि गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हर साल मानसून सीजन में गंगा का जल स्तर बढने पर ये गांव टापू बन जाते हैं। इसलिए प्रशासन ने इन सभी गांवों में लाउडस्पीकर से चेतावनी जारी कर ग्रामीणों को सतर्क कर दिया है कि नदी तट की ओर पशु लेकर जाने से बचें और आवश्यक खाद्य वस्तुओं का प्रबंध कर लें।
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने और बांध टूटने से गंगा में बाढ़ की आशंका पैदा हुई है, लेकिन ढाई घाट पर अभी हालात सामान्य बने हुए हैं। संबंधित लेखपालों के साथ पुलिस को भेजकर कल्पवासियों को चेताया गया है कि वह गंगा तट से दूर हटकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। गंगा के तटवर्ती गांवों के लोगों को भी बाढ़ से सतर्क रहने की चेतावनी दी गई। लोग स्वयं सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं।
-बरखा सिंह, एसडीएम कलान
भैंसार बांध पर अभी गंगा खतरे के निशान से काफी नीचे लगभग 141 मीटर पर बह रही है। हरिद्वार से यहां तक पानी आने में 72 घंटे से अधिक समय लगेगा। जैसी सूचनाएं मिली हैं, उन्हें देखते बांध पर जलस्तर लगभग तीन मीटर तक बढ़ सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में भी बांध पूरी तरह सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां हाई फ्लड लेवल (उच्चतम बाढ़ स्तर) 144.10 मीटर है।
-आरके वर्मा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग