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1900 हेक्टेयर बढ़ा गन्ना रकबा, नया पेराई सत्र फिर खिंचेगा लंबा
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शाहजहांपुर। पेराई सत्र 2020-21 के लिए गन्ना विकास विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सर्वे सट्टा से प्राप्त नतीजों के अनुसार इस बार जिले के 1970 गन्ना ग्रामों में गन्ने का रकबा 1900 हेक्टेयर बढ़ गया है। इसे देखते इस बार पेराई कार्य भी मई 2021 के अंतिम सप्ताह तक खिंचने के आसार हैं। हालांकि, बीते पेराई सत्र में जिले की पांचों चीनी मिलें गत वर्ष नवंबर से चालू हो गईं, लेकिन जनवरी मेें बारिश और बाद में लॉकडाउन के दौरान मिलों को गन्ना आपूर्ति बाधित हुई। इस कारण पेराई कार्य गत मई के तीसरे सप्ताह तक जारी रहा। पेराई समय से समाप्त कराने को अधिकारी उन मिल क्षेत्रों का गन्ना दूसरी मिलों से समायोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिनके पास गन्ना क्षेत्र कम है।
गत वर्ष जिले की विभिन्न तहसीलों में 92164 हेक्टेयर क्षेत्रफल मेें गन्ना बोया गया था। बीते नवंबर से सभी मिलों में पेराई शुरू कर दी गई क्योंकि गन्ना रकबा में करीब तीन हजार हेक्टेयर की वृद्धि के कारण शासन ने जनपद की चीनी मिलों का पेराई लक्ष्य बढ़ाकर 425.20 लाख क्विंटल कर दिया, जबकि वर्ष 2018-19 में केवल 354.60 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था। यह अलग बात रही कि चीनी मिलों ने लक्ष्य से अधिक पेराई का कीर्तिमान बनाया, लेकिन वह बंद देर से हो सकीं। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल सबसे पहले 17 अप्रैल को बंद हुई।
बाद में तीन मई को बिरला ग्रुप की रोजा मिल, पांच मई को तिलहर सहकारी चीनी मिल, 15 मई को डालमिया ग्रुप की गिरगिचा (निगोही) मिल और 20 मई को पुवायां की सहकारी चीनी मिल बंद हुई। इस बार जिले में गन्ना रकबा 1900 हेक्टेयर बढ़कर 94064 हेक्टेयर हो गया है। इसलिए माना जा रहा है कि नया पेराई सत्र भले ही समय से आरंभ हो जाए, संपूर्ण गन्ना अगले वर्ष मई के अंत तक पेरा जा सकेगा। हालांकि, अधिकारी कहते हैं कि चीनी मिलें अपनी पेराई क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं और इसे देखते आगामी पेराई सत्र खत्म होने में ज्यादा देरी नहीं होगी।
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तकनीकी खराबियां बढ़ाएंगी पेराई सत्र
गत पेराई सत्र में चीनी मिल कारखानों की तकनीकी खामियों से पेराई कार्य में बार-बार बाधा पड़ती रही। गन्ना आवक चरम पर होने के दौरान पुवायां सहकारी चीनी मिल की मशीनों में खराबियां आनी शुरू हुई तो पेराई कार्य में बाधा पडने लगी। कई बार तो ऐसा हुआ कि मिल 24 घंटे भी नहीं चल पाई और दोबारा ब्रेकडाउन हो गए। यही वजह रही कि पुवायां मिल को संपूर्ण गन्ना पेरने में काफी वक्त लगा और इसी वजह से यह मिल सबसे बाद में बंद हुई। इसी तरह रोजा और तिलहर मिल की मशीनरी में आई खराबियों के कारण वहां भी कई बार पेराई कार्य में बाधा पड़ी। इस बार पेराई कार्य में लॉकडाउन जैसी बाधा नहीं रहेगी, लेकिन तकनीकी खराबियां हावी हुईं तो पेराई सत्र मई के अंतिम सप्ताह तक खिंचना तय है।
चीनी मिलों की दैनिक पेराई क्षमता (टन में)
गिरगिचा (निगोही) मिल 9000
मकसूदापुर मिल 6500
रोजा मिल 5500
तिलहर सहकारी मिल 2500
पुवायां सहकारी मिल 2125
2.76 अरब रुपये गन्ना मूल्य बकाया
जहां एक ओर नए पेराई सत्र की तैयारी हो रही है, वहीं जनपद की मिलें बीते सत्र में किसानों से खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान अभी तक नहीं कर सकी हैं। सूत्रों के अनुसार पांचों चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2019-20 मेें 1205.89 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन किसानों को भुगतान 929.11 करोड़ रुपये किया जो कि कुल देयता के सापेक्ष सिर्फ 77.72 प्रतिशत है। खरीदे गए गन्ना का 14 दिन में भुगतान करने संबंधी शासनादेश का पालन नहीं करने पर बकाएदार मिलों को कई बार डीएम की ओर से नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन मिल प्रबंधनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि प्रशासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चीनी मिलें अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं और इसे देखते 1900 हेक्टेयर अतिरिक्त गन्ना पेरने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। जिले का गन्ना अन्य जनपदों की लोनी, अजबापुर, द्वारिकेश आदि मिलों को भी जाता है। इसलिए पेराई सत्र समय से समाप्त होने की उम्मीद है। मिलों मेें गन्ना के स्टॉक और पेराई की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। किसानों को मिलों से बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान दिलाने के बारे मेें उच्चाधिकारियों से दिशा निर्देश लिए जाएंगे।
- डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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गत वर्ष जिले की विभिन्न तहसीलों में 92164 हेक्टेयर क्षेत्रफल मेें गन्ना बोया गया था। बीते नवंबर से सभी मिलों में पेराई शुरू कर दी गई क्योंकि गन्ना रकबा में करीब तीन हजार हेक्टेयर की वृद्धि के कारण शासन ने जनपद की चीनी मिलों का पेराई लक्ष्य बढ़ाकर 425.20 लाख क्विंटल कर दिया, जबकि वर्ष 2018-19 में केवल 354.60 लाख क्विंटल गन्ना पेरा गया था। यह अलग बात रही कि चीनी मिलों ने लक्ष्य से अधिक पेराई का कीर्तिमान बनाया, लेकिन वह बंद देर से हो सकीं। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल सबसे पहले 17 अप्रैल को बंद हुई।
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बाद में तीन मई को बिरला ग्रुप की रोजा मिल, पांच मई को तिलहर सहकारी चीनी मिल, 15 मई को डालमिया ग्रुप की गिरगिचा (निगोही) मिल और 20 मई को पुवायां की सहकारी चीनी मिल बंद हुई। इस बार जिले में गन्ना रकबा 1900 हेक्टेयर बढ़कर 94064 हेक्टेयर हो गया है। इसलिए माना जा रहा है कि नया पेराई सत्र भले ही समय से आरंभ हो जाए, संपूर्ण गन्ना अगले वर्ष मई के अंत तक पेरा जा सकेगा। हालांकि, अधिकारी कहते हैं कि चीनी मिलें अपनी पेराई क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं और इसे देखते आगामी पेराई सत्र खत्म होने में ज्यादा देरी नहीं होगी।
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तकनीकी खराबियां बढ़ाएंगी पेराई सत्र
गत पेराई सत्र में चीनी मिल कारखानों की तकनीकी खामियों से पेराई कार्य में बार-बार बाधा पड़ती रही। गन्ना आवक चरम पर होने के दौरान पुवायां सहकारी चीनी मिल की मशीनों में खराबियां आनी शुरू हुई तो पेराई कार्य में बाधा पडने लगी। कई बार तो ऐसा हुआ कि मिल 24 घंटे भी नहीं चल पाई और दोबारा ब्रेकडाउन हो गए। यही वजह रही कि पुवायां मिल को संपूर्ण गन्ना पेरने में काफी वक्त लगा और इसी वजह से यह मिल सबसे बाद में बंद हुई। इसी तरह रोजा और तिलहर मिल की मशीनरी में आई खराबियों के कारण वहां भी कई बार पेराई कार्य में बाधा पड़ी। इस बार पेराई कार्य में लॉकडाउन जैसी बाधा नहीं रहेगी, लेकिन तकनीकी खराबियां हावी हुईं तो पेराई सत्र मई के अंतिम सप्ताह तक खिंचना तय है।
चीनी मिलों की दैनिक पेराई क्षमता (टन में)
गिरगिचा (निगोही) मिल 9000
मकसूदापुर मिल 6500
रोजा मिल 5500
तिलहर सहकारी मिल 2500
पुवायां सहकारी मिल 2125
2.76 अरब रुपये गन्ना मूल्य बकाया
जहां एक ओर नए पेराई सत्र की तैयारी हो रही है, वहीं जनपद की मिलें बीते सत्र में किसानों से खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान अभी तक नहीं कर सकी हैं। सूत्रों के अनुसार पांचों चीनी मिलों ने पेराई सत्र 2019-20 मेें 1205.89 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन किसानों को भुगतान 929.11 करोड़ रुपये किया जो कि कुल देयता के सापेक्ष सिर्फ 77.72 प्रतिशत है। खरीदे गए गन्ना का 14 दिन में भुगतान करने संबंधी शासनादेश का पालन नहीं करने पर बकाएदार मिलों को कई बार डीएम की ओर से नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन मिल प्रबंधनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि प्रशासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चीनी मिलें अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं और इसे देखते 1900 हेक्टेयर अतिरिक्त गन्ना पेरने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। जिले का गन्ना अन्य जनपदों की लोनी, अजबापुर, द्वारिकेश आदि मिलों को भी जाता है। इसलिए पेराई सत्र समय से समाप्त होने की उम्मीद है। मिलों मेें गन्ना के स्टॉक और पेराई की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। किसानों को मिलों से बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान दिलाने के बारे मेें उच्चाधिकारियों से दिशा निर्देश लिए जाएंगे।
- डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी