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किसान सम्मान निधि पाने को भटक रहे तमाम किसान

Thu, 23 Jul 2020 01:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 01:28 AM IST
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All the farmers are wandering to get the farmer honor fund
शाहजहांपुर। केंद्र सरकार भले किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही हो, लेकिन असल तस्वीर कुछ अलग है। किसान सम्मान निधि पाने के लिए कई किसान इधर-उधर चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन पात्र होने के बावजूद उन्हें किसान सम्मान निधि नहीं मिल पा रही है। तहसील में लेखपाल मिलते नहीं हैं। जिम्मेदार अधिकारी कोई जवाब नहीं देते हैं।
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लघु-सीमांत किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करने के साथ प्रधानमंत्री ने दिसंबर 2018 में किसान सम्मान निधि योजना शुरू की थी। इसके तहत शाहजहांपुर में 4.09 लाख पात्र किसान चिह्नित किए गए थे, लेकिन शुरुआत में 3.94 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि की पहली किश्त के तौर पर चार माह के दो-दो हजार रुपये मिले थे। बाकी किसानों के बैंक खाता या आधार नंबर में कमी के चलते सूची से हटा दिया गया। इसके बाद कमियां दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। अब पंजीकृत किसानों की संख्या 5.08 लाख हो गई है, लेकिन पात्रता रखने वाले तमाम किसान अभी निधि पाने के लिए तहसीलों और बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। अभी तक किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपये की पांच किश्तें भेजी गई हैं। खास बात यह है कि हर किश्त भेजने के बाद पात्र किसानों की संख्या घट जा रही है।
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किसान सम्मान निधि योजना के अनुसार लघु सीमांत श्रेणी के लगभग 19 हजार किसानों को योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। केंद्र सरकार ने लघु सीमांत की श्रेणी में आने वाले केवल ऐसे किसानों को सम्मान निधि देने का निर्णय कियाहै, जिनके परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी सरकारी सेवा में न हो। परिवार के किसी सदस्य की मासिक पेंशन दस हजार रुपये से अधिक नहीं हो। पात्रता की इन शर्तों के आधार पर लाभार्थी सूची से हटाए गए । हर किश्त के भुगतान मेें किसानों की संख्या कम हो रही है। उदाहरणार्थ, दो हजार रुपये की पहली किश्त 394255 किसानों को भेजी गई, जबकि दूसरी किश्त पाने वालों में 12861 किसान कम हो गए। इसी तरह दूसरी किश्त की तुलना में तीसरी किश्त के लाभार्थियों की संख्या 29576 कम हो गई। इसी तरह चौथी किश्त में 44691 लाभार्थी कम हुए और पांचवीं किश्त के भुगतान में कुल लाभार्थी किसानों की संख्या सिमटकर 219660 रह गई।
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इन झमेलों में अटकी सम्मान निधि
आधार सुधार में लंबित- 36434
आधार सही, लेकिन नाम गलत- 16419
एक जून के बाद सत्यापित लाभार्थी- 16094
तहसीलों में सत्यापन अवशेष- 40493
समस्याओं का इस तरह समाधान संभव
अधिकारियों के अनुसार हो सकता है कि पंजीकरण में नाम, आधार नंबर और बैंक खाता गलत फीड किया गया हो। इसके लिए संबंधित किसान आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छाया प्रति विभाग को प्रस्तुत कर सकते हैं। अन्य कृषक के खाते मेें धनराशि जाने पर पासबुक की कलर छाया प्रति स्वयं प्रमाणित कर जमा करनी होगी। लाभार्थी का संयुक्त खाता होने, खाता नंबर एवं आधार कार्ड में नाम भिन्नता होने, पंजीकरण मेें अन्य कृषक का खाता नंबर लिखे जाने और पोर्टल देखने पर स्टॉप बाई स्टेट प्रदर्शित होने पर भी आधार एवं बैंक पासबुक की छाया प्रति जमा करनी होगी। यही नहीं, यदि किसी किसान ने स्वयं अथवा जनसेवा केंद्र पर पंजीकरण कराया, लेकिन वह पोर्टल पर लंबित प्रदर्शित हो रहा है तो संबंधित किसान आधार, बैंक पासबुक और खतौनी घोषणा पत्र लेखपाल से प्रमाणित करा के जमा करें। इसी तरह भूमि के रकबा मेें त्रुटि भी सम्मान निधि भुगतान मेें रोड़ा बन सकती है और इसमें संशोधन के लिए तहसील से संपर्क करना होगा।
जब से किसान सम्मान निधि योजना शुरू हुई है, कई बार आवेदन कर चुके हैं। ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद अधिकारियों से भी मिले, लेकिन अभी तक कोई किश्त नहीं मिली।
-जगपाल सिंह, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
योजना शुरू होने पंजीकरण कराने के बाद कई बार लेखपाल को आवेदन के साथ सभी कागज उपलब्ध कराए। तहसील के चक्कर काटे और ऑनलाइन कागज भी जमा किए, लेकिन खाते में पैसा नहीं आया।
-कैलाश चंद्र, मरुआ झाला (जैतीपुर)
सम्मान निधि के लिए पहले लेखपाल को कागज दिए थे। काम नहीं बना तो ऑनलाइन आवेदन कर सभी जरूरी कागजात दर्ज करवाए। मगर अभी तक कोई किश्त नहीं आई। अधिकारी कुछ बता नहीं रहे हैं।
-गुड्डू सिंह, गढिय़ा रंगीन (जैतीपुर)
सम्मान निधि के लिए बहुत पहले ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन कराया था। उसके सारे कागजात लेखपाल को दिए गए, लेकिन अभी तक न तो कोई किश्त मिली और न ही इसका कारण बताया गया।

-गेंदन लाल, पलिहुरा (जैतीपुर)
योजना की शुरुआत में पहली किश्त जारी होते वक्त उनके आवेदनों की कमियां बाद में सामने आ रही हैं। पहली किश्त के बाद जिन किसानों को अगली किश्तें नहीं मिल सकीं, वह राजकीय बीज भंडार पर नियुक्त एडीओ कृषि और कंप्यूटर आपरेटर से संपर्क कर अपने पंजीकरण में संशोधन करा सकते हैं। तमाम किसान खामियां दूर कराने के बजाय दोबारा पंजीकरण करा रहे हैं। इससे किसानों की संख्या बढ़ रही है और उनकी छटनी मेें समय लग रहा है।
- अनिल कुमार तिवारी, नोडल अधिकारी (सम्मान निधि)/ उप कृषि निदेशक
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