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आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत खस्ताहाल, 950 पद रिक्त
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शाहजहांपुर। सरकार ने देश की नई शिक्षा नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेसिक शिक्षा के साथ समाहित करने की घोषणा की है। शिक्षा नीति मेें यह बदलाव इसलिए किया है, जिससे कि आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूलों की कार्य पद्धति के अनुरूप ढाला जा सके और वह निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉड्यूल की बराबरी कर सकें। जिले में अधिसंख्य आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवनों संचालित हैं। इनमें 950 पद खाली हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति कितनी खस्ताहाल है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक करने के लिए जनपद में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सरकार ने उनके मानदेय में बढ़ोतरी और स्मार्ट फोन भी देने की घोषणा की है, लेकिन संसाधनों के लिहाज से जनपद के आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूलों से भी पिछड़े हैं। ब्लॉक स्तर पर संचालित बाल विकास परियोजनाओं के अधीन तमाम आंगनबाड़ी केंद्र किराये के निजी भवनों में संचालित हैं। इनमें से अधिकांश केंद्रों की गतिविधियां बच्चों और धात्री महिलाओं को राशन, पोषाहार वितरित करने या फिर कोई दिवस विशेष मनाने तक सीमित रहती हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जनपद में 2913 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यह केंद्र शहर समेत ब्लॉक स्तर की कुल 16 परियोजनाओं से संबद्ध हैं। नियमानुसार इन केंद्रों के अपने भवन होने चाहिए, लेकिन केवल 600 केंद्र निजी भवनों में चल रहे हैं। लगभग 350 केंद्र किराये के भवनों में हैं और शेष केंद्र नजदीकी परिषदीय प्राइमरी स्कूलों के अतिरिक्त कक्षा कक्षों में संचालित हैं।
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प्राइमरी स्कूलों में जगह पाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था कमोबेश ठीक है, लेकिन किराए के भवनों में चल रहे केंद्रों में सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। किराये के भवनों में ज्यादातर केंद्र नगरीय क्षेत्र में हैं। आंगनबाड़ी कर्मचारी इस बात से परेशान हैं कि जो केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं, उनका मासिक किराया भी विभाग समय से नहीं देता। इसीलिए कई आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपने आवासों के एक हिस्से में केंद्र कायम कर रखे हैं।
कर्मचारी और सहायिकाओं के 950 पद रिक्त
विभागीय सूत्रों के अनुसार विभिन्न परियोजनाओं में आंगनबाड़ी कर्मचारी के लगभग 450 और सहायिकाओं के 500 पद रिक्त हैं। शहर परियोजना की बात करें तो 304 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 171 कर्मचारी उपलब्ध हैं। जहां कर्मचारी नहीं हैं, उन केंद्रों का अतिरिक्त प्रभार नजदीकी केंद्र की आंगनबाड़ी कर्मचारी को दिया है, इससे दोनों केंद्रों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
नवीन पोषाहार वितरण योजना लागू
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों, किशोरियों और महिलाओं को पहले पोषाहार के तौर पर दलिया दिया जाता था। लेकिन बाद में कुपोषण की रोकथाम के लिए कोरोना काल में कुपोषित बच्चों, किशोरियों और महिलाओं की सेहत संवारने के साथ उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए 16 अक्तूबर 2020 से जनपद में नवीन पोषाहार वितरण योजना लागू की गई। इसके तहत कुपोषित, अति कुपोषित और सामान्य बच्चों को शासन से निर्धारित मात्रा में गेहूं, चावल, दालें, हर तीसरे माह देशी घी और स्किम्ड मिल्क (दूध पाउडर) दिया जा रहा है।
यह सही है कि आंगनबाड़ी केंद्र सीमित संसाधनों से चलाए जा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी दशा सुधारने को गंभीर है। आंगनबाड़ी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन केंद्र संचालित करने के साथ अन्य दिनों में गैर विभागीय कार्य भी पूरी क्षमता से कर रही हैं। बेसिक शिक्षा से समन्वय पहले से स्थापित है और इसी के तहत प्राइमरी स्कूलों के कक्षों में तमाम केंद्र संचालित हैं। प्री प्राइमरी जैसी गतिविधियां संचालित करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उनके लिए शासन से स्मार्ट फोन प्राप्त हो गए और उनका जल्द वितरण कराया जाएगा।
-युगुल किशोर सांगड़ी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक करने के लिए जनपद में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही सरकार ने उनके मानदेय में बढ़ोतरी और स्मार्ट फोन भी देने की घोषणा की है, लेकिन संसाधनों के लिहाज से जनपद के आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूलों से भी पिछड़े हैं। ब्लॉक स्तर पर संचालित बाल विकास परियोजनाओं के अधीन तमाम आंगनबाड़ी केंद्र किराये के निजी भवनों में संचालित हैं। इनमें से अधिकांश केंद्रों की गतिविधियां बच्चों और धात्री महिलाओं को राशन, पोषाहार वितरित करने या फिर कोई दिवस विशेष मनाने तक सीमित रहती हैं।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जनपद में 2913 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यह केंद्र शहर समेत ब्लॉक स्तर की कुल 16 परियोजनाओं से संबद्ध हैं। नियमानुसार इन केंद्रों के अपने भवन होने चाहिए, लेकिन केवल 600 केंद्र निजी भवनों में चल रहे हैं। लगभग 350 केंद्र किराये के भवनों में हैं और शेष केंद्र नजदीकी परिषदीय प्राइमरी स्कूलों के अतिरिक्त कक्षा कक्षों में संचालित हैं।
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प्राइमरी स्कूलों में जगह पाने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था कमोबेश ठीक है, लेकिन किराए के भवनों में चल रहे केंद्रों में सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। किराये के भवनों में ज्यादातर केंद्र नगरीय क्षेत्र में हैं। आंगनबाड़ी कर्मचारी इस बात से परेशान हैं कि जो केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं, उनका मासिक किराया भी विभाग समय से नहीं देता। इसीलिए कई आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपने आवासों के एक हिस्से में केंद्र कायम कर रखे हैं।
कर्मचारी और सहायिकाओं के 950 पद रिक्त
विभागीय सूत्रों के अनुसार विभिन्न परियोजनाओं में आंगनबाड़ी कर्मचारी के लगभग 450 और सहायिकाओं के 500 पद रिक्त हैं। शहर परियोजना की बात करें तो 304 आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 171 कर्मचारी उपलब्ध हैं। जहां कर्मचारी नहीं हैं, उन केंद्रों का अतिरिक्त प्रभार नजदीकी केंद्र की आंगनबाड़ी कर्मचारी को दिया है, इससे दोनों केंद्रों की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
नवीन पोषाहार वितरण योजना लागू
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों, किशोरियों और महिलाओं को पहले पोषाहार के तौर पर दलिया दिया जाता था। लेकिन बाद में कुपोषण की रोकथाम के लिए कोरोना काल में कुपोषित बच्चों, किशोरियों और महिलाओं की सेहत संवारने के साथ उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए 16 अक्तूबर 2020 से जनपद में नवीन पोषाहार वितरण योजना लागू की गई। इसके तहत कुपोषित, अति कुपोषित और सामान्य बच्चों को शासन से निर्धारित मात्रा में गेहूं, चावल, दालें, हर तीसरे माह देशी घी और स्किम्ड मिल्क (दूध पाउडर) दिया जा रहा है।
यह सही है कि आंगनबाड़ी केंद्र सीमित संसाधनों से चलाए जा रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी दशा सुधारने को गंभीर है। आंगनबाड़ी कर्मचारी सप्ताह में दो दिन केंद्र संचालित करने के साथ अन्य दिनों में गैर विभागीय कार्य भी पूरी क्षमता से कर रही हैं। बेसिक शिक्षा से समन्वय पहले से स्थापित है और इसी के तहत प्राइमरी स्कूलों के कक्षों में तमाम केंद्र संचालित हैं। प्री प्राइमरी जैसी गतिविधियां संचालित करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उनके लिए शासन से स्मार्ट फोन प्राप्त हो गए और उनका जल्द वितरण कराया जाएगा।
-युगुल किशोर सांगड़ी, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।