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30 हजार हेक्टेयर फसलें आंधी-बारिश की भेंट चढ़ीं
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Sun, 20 Mar 2016 11:34 PM IST
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बरसात ने बर्बाद की फसल
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पिछले एक सप्ताह के दौरान मौसम के बिगड़े तेवर से जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी गेहूं, सरसों, मसूर आदि फसलों को क्षति पहुंचने का अनुमान है। हालांकि कृषि विभाग का यह आकलन सर्वे से पहले का है। अधिकारियों के अनुसार 2.61 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं की पांच फीसदी जबकि 40 हजार हेक्टेयर में खड़ी सरसों और मसूर की 10 फीसदी से अधिक फसल को क्षति पहुंचने का अनुमान है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार दुग्धावस्था के दौरान बारिश और आंधी से गेहूं का दाना कमजोर पड़ने की आशंका है। अलबत्ता, मौसम के प्रकोप से पिछैती बुवाई वाली गेहूं फसल अभी सुरक्षित है। पिछले साल रबी सीजन में जिले के 3.75 लाख किसानों ने 2.52 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की, लेकिन अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से करीब 40 फीसदी से ज्यादा फसलें खराब हो गईं। इस नुकसान से उबरने के लिए चालू रबी सीजन में किसानों ने गेहूं का रकबा करीब नौ हजार हेक्टेयर बढ़ा दिया। साथ ही 25 हजार हेक्टेयर में मसूर, 15 हजार हेक्टेयर में सरसों और लगभग आठ हजार हेक्टेयर में चना बोया था।
फसल में बीज पड़ने की नौबत आई तो मौसम बिगड़ना शुरू हो गया। पिछले शनिवार को आसमान तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी से तमाम जगह गेहूं के पौधे जमीन पर पसरे मिले। मौसम का कहर अगले रोज भी जारी रहा। इसलिए कृषि विभाग तहसीलों में फसली नुकसान का सर्वे करा रहा है।
अभी सर्वे चल रहा है लेकिन आरंभिक जांच से पता चला है कि लगभग सभी तहसीलों में गेहूं गिरने के नजारे दिख रहे हैं। जलालाबाद तहसील के विकास खंड मिर्जापुर, तिलहर के जैतीपुर और पुवायां के बंडा ब्लॉक के कई गांवों में गेहूं को क्षति पहुंची। हालांकि वे खेत आंधी पानी के बाद सुरक्षित रहे जिनके आसपास घने बाग अथवा मेड़ों पर यूकेलिप्टस के पेड़ों की कतार लगी है।
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बिखरने लगी सरसों और मसूर
अधिकांश किसान सरसों की फसल काट चुके हैं। जो किसान खेत से फसल समेटने में चूक गए, उन्हें निराशा हाथ लग रही है। नमी के कारण खेतों में खड़ी सरसों की फलियां चटक रही हैं। करीब 15 प्रतिशत मसूर भी खेतों में बिखर गई।
4.2 मिमी हुई बारिश
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के मुताबिक पिछले सप्ताह 4.2 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। यह अधिक नहीं है लेकिन अप्रत्याशित है। इस सीजन में बारिश का कोई तुक नहीं लेकिन पश्चिमी विक्षोभ ने असर दिखाया। बारिश की थोड़ी सी अधिकता होती तो फसली नुकसान ज्यादा होना तय था।
दलहन तिलहन को ज्यादा नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रपाल गुप्ता का कहना है कि गेहूं का रकबा अधिक होने से किसानों का ध्यान इसी फसल पर केंद्रित रहता है लेकिन मौसम बिगड़ने का सर्वाधिक असर सरसों, मसूर, चना जैसी दलहन और तिलहन की फसलों पर होने की आशंका है। करीब 20 प्रतिशत सरसों खराब होने का अनुमान है।
पूर्वांचल और पश्चिमांचल की तुलना में जिले में अधिक बरसात नहीं हुई लेकिन फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट में अधिक नुकसान मिलने पर ही सरकारी सहायता देने की रणनीति तय होगी।
- अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
फसल में बीज पड़ने की नौबत आई तो मौसम बिगड़ना शुरू हो गया। पिछले शनिवार को आसमान तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी से तमाम जगह गेहूं के पौधे जमीन पर पसरे मिले। मौसम का कहर अगले रोज भी जारी रहा। इसलिए कृषि विभाग तहसीलों में फसली नुकसान का सर्वे करा रहा है।
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अभी सर्वे चल रहा है लेकिन आरंभिक जांच से पता चला है कि लगभग सभी तहसीलों में गेहूं गिरने के नजारे दिख रहे हैं। जलालाबाद तहसील के विकास खंड मिर्जापुर, तिलहर के जैतीपुर और पुवायां के बंडा ब्लॉक के कई गांवों में गेहूं को क्षति पहुंची। हालांकि वे खेत आंधी पानी के बाद सुरक्षित रहे जिनके आसपास घने बाग अथवा मेड़ों पर यूकेलिप्टस के पेड़ों की कतार लगी है।
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बिखरने लगी सरसों और मसूर
अधिकांश किसान सरसों की फसल काट चुके हैं। जो किसान खेत से फसल समेटने में चूक गए, उन्हें निराशा हाथ लग रही है। नमी के कारण खेतों में खड़ी सरसों की फलियां चटक रही हैं। करीब 15 प्रतिशत मसूर भी खेतों में बिखर गई।
4.2 मिमी हुई बारिश
गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के मुताबिक पिछले सप्ताह 4.2 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। यह अधिक नहीं है लेकिन अप्रत्याशित है। इस सीजन में बारिश का कोई तुक नहीं लेकिन पश्चिमी विक्षोभ ने असर दिखाया। बारिश की थोड़ी सी अधिकता होती तो फसली नुकसान ज्यादा होना तय था।
दलहन तिलहन को ज्यादा नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. चंद्रपाल गुप्ता का कहना है कि गेहूं का रकबा अधिक होने से किसानों का ध्यान इसी फसल पर केंद्रित रहता है लेकिन मौसम बिगड़ने का सर्वाधिक असर सरसों, मसूर, चना जैसी दलहन और तिलहन की फसलों पर होने की आशंका है। करीब 20 प्रतिशत सरसों खराब होने का अनुमान है।
पूर्वांचल और पश्चिमांचल की तुलना में जिले में अधिक बरसात नहीं हुई लेकिन फसलों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट में अधिक नुकसान मिलने पर ही सरकारी सहायता देने की रणनीति तय होगी।
- अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी