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शीत अवकाश के बाद कोहरे में ही खुले स्कूल
Updated Wed, 17 Jan 2018 08:53 PM IST
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शीत अवकाश के बाद कोहरे में ही खुले स्कूल
एक दिन की राहत के बाद फिर सर्दी ने बिछाया जाल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। दो जनवरी से परिषदीय स्कूलों में चल रहे शीत अवकाश के बाद बुधवार को जैसे-तैसे स्कूल खुलने की नौबत आई तो भी सर्दी का प्रकोप कम नहीं रहा। घनघोर कोहरा और कड़ाके की सर्दी के बीच स्कूल तो खुले, लेकिन छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य ही रही।
शीत लहर की चपेट में एक पखवाड़ा से चल रहे जनपद में 16 जनवरी को धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन सर्दी का असर कम नहीं दिख रहा था। वहीं, 17 जनवरी को शीत अवकाश के बाद स्कूल घने कोहरे के बीच ही खुल सके। जबरदस्त शीत लहर से जकड़े जिले में पूरे दिन बादल छाए रहे और लोग ठंड से ठिठुरते रहे। दोपहर बाद हल्की धूप खिलने से शाम को एकबार फिर कोहरे ने अपना जाल बिछा दिया और सर्दी पूरे चरम पर जा पहुंची। शिक्षक-शिक्षिकाएं एक बार फिर छुट्टियों की आस लगाए बैठे हैं कि शायद जिला प्रशासन फिर से शीत अवकाश घोषित कर दे।
स्कूलों में छात्र संख्या नगण्य रहने पर अधिकांश स्कूलों में अलाव ही जले। छुटपुट काम निपटाने के बाद शिक्षक-शिक्षिकाएं सर्दी से बचने के लिए आग का सहारा लिए बैठे रहे।
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एक दिन की राहत के बाद फिर सर्दी ने बिछाया जाल
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। दो जनवरी से परिषदीय स्कूलों में चल रहे शीत अवकाश के बाद बुधवार को जैसे-तैसे स्कूल खुलने की नौबत आई तो भी सर्दी का प्रकोप कम नहीं रहा। घनघोर कोहरा और कड़ाके की सर्दी के बीच स्कूल तो खुले, लेकिन छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य ही रही।
शीत लहर की चपेट में एक पखवाड़ा से चल रहे जनपद में 16 जनवरी को धूप खिलने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन सर्दी का असर कम नहीं दिख रहा था। वहीं, 17 जनवरी को शीत अवकाश के बाद स्कूल घने कोहरे के बीच ही खुल सके। जबरदस्त शीत लहर से जकड़े जिले में पूरे दिन बादल छाए रहे और लोग ठंड से ठिठुरते रहे। दोपहर बाद हल्की धूप खिलने से शाम को एकबार फिर कोहरे ने अपना जाल बिछा दिया और सर्दी पूरे चरम पर जा पहुंची। शिक्षक-शिक्षिकाएं एक बार फिर छुट्टियों की आस लगाए बैठे हैं कि शायद जिला प्रशासन फिर से शीत अवकाश घोषित कर दे।
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स्कूलों में छात्र संख्या नगण्य रहने पर अधिकांश स्कूलों में अलाव ही जले। छुटपुट काम निपटाने के बाद शिक्षक-शिक्षिकाएं सर्दी से बचने के लिए आग का सहारा लिए बैठे रहे।
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