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शाही स्नान के साथ महाकुंभ का शंखनाद
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jan 2013 01:05 AM IST
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संगम की रेती पर शाही स्नान के साथ ही सोमवार को महाकुंभ का शंखनाद हो गया। सुबह सवा छह बजे महानिर्वाणी अखाड़े ने डुबकी लगाकर महाकुंभ का शुभारंभ कर दिया। पुण्य अर्जित करने के लिए संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन का दावा है कि शाम सात बजे तक लगभग एक करोड़ लोगों ने डुबकी लगाई। विवाद से नाराज शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती पहले शाही स्नान में नहीं पहुंचे जबकि अव्यवस्था से नाराज दंडी संन्यासियों ने स्नान का बहिष्कार किया। आलम ये था कि श्रद्धालुओं ने रविवार रात से ही स्नान शुरू कर दिया।
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पूरे शाही अंदाज में अखाड़ों के साधु-महात्माओं ने गंगा का आशीष लिया। इसी के साथ कुंभ पर्व का छप्पन दिनों का अनुष्ठान शुरू हुआ। महाकुंभ के स्नान की शुरुआत शाही स्नान पर्व से हुई। रात भर हुई तैयारियों के बाद सुबह सवा पांच बजे परंपरा के मुताबिक सबसे पहले पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के संत आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विष्णुदेवानंद और अटल के संत आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद की अगुवाई में स्नान के लिए पहुंचे। अंत में निर्मल के संतों ने डुबकी लगाई। सभी 13 अखाड़ों ने डुबकी लगाई। संगम के साथ गंगा-यमुना के घाटों पर भी लोगों ने डुबकी लगाई।
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ज्योतिर्विदों के मुताबिक दोपहर 12.22 बजे से सूर्य के मकर राशि में संचरण के 6.24 घंटे पहले से मकर संक्रांति पर स्नान का मुहूर्त शुरू हुआ लेकिन डुबकी लगाने का सिलसिला रविवार को आधी रात के बाद ही शुरू हो गया था।
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