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Sant Kabir Nagar News: प्रधान ने नहीं सुनी तो ग्रामाीणों ने चंदा लगाकर पकड़वाए 75 काले बंदर
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बंदर को पकड़ते शिकारी।
संतकबीरनगर। धनघटा तहसील क्षेत्र के माधोपुर गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को चंदा लगाकर 75 बंदरों को पकड़वाया और उनको वन विभाग के दिशा निर्देशन में कुस्मही जंगल गोरखपुर में ले जाकर छोड़वाया। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान से लेकर स्थानीय प्रशासन से भी बंदरों को पकड़वाने के लिए शिकायत की थी, लेकिन जब किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद लोगों ने खुद ही चंदा लगाकर बंदरों को पकड़वाया।
धनघटा तहसील क्षेत्र के ग्राम माधोपुर और उसके आसपास के गांवों में बीते एक दशक से काले बंदरों ने उत्पात मचाया हुआ था। सैकड़ों की संख्या में मौजूद काले बंदर टोलियां बनाकर ग्रामीणों पर हमला बोल देते थे और फसलों को भी नुकसान पहुंचाते थे। बंदरों के डर से लोग छतों पर कपड़े और खाद्यान्न सुखाना तक छोड़ दिए थे। किसानों के खेतों में मौजूद आलू, सरसों, चना, मटर, अरहर समेत सब्जियों की सारी फसलें चौपट कर देते थे। बंदरों के आतंक से किसान अपने खेतों में सब्जियां, दलहन और तिलहन आदि की फसलें लगाना तक बंद कर दिए हैं। बंदर बच्चों, महिलाओं और मोटरसाइकिल सवारों को देखते ही हमलावर हो जाते हैं। बंदरों के हमले में दर्जनों लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं। बंदरों से आजिज ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को तमाम बार शिकायती पत्र सौंपकर बंदरों को पकड़वाए जाने की मांग किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकारी को पत्र सौंपकर समस्या से निजात दिलाने की मांग किया, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। थक हार कर ग्रामीणों ने आपस में चंदा लगाकर पैसा इकट्ठा किया और बस्ती जिले से बंदर पकड़ने वालों को बुलवाया। साथ ही ग्रामीणों ने वन विभाग के माध्यम से कुसम्ही जंगल गोरखपुर प्रशासन से बंदरों को आश्रय में लेने का आदेश कराया। बृहस्पतिवार को बस्ती जिले से आए शिकारियों की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से 75 से ज्यादा बंदरों को पिंजरे में कैद कर लिया। शेष बंदरों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
ग्रामीण अमित कुमार पांडेय, विश्वनाथ पांडेय, पवन कुमार पांडेय, घनश्याम मिश्र, घिराऊ यादव, छोटेलाल यादव, संतोष कुमार पांडेय, राकेश पांडेय, रामप्रताप पांडेय, अनिल त्रिपाठी आदि ने बताया कि बंदरों को पकड़ लिए जाने के बाद लोगों को काफी राहत मिलेगी। किसानों को खेती किसानी करने में सहूलियत मिलेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों का जीवन भी सुरक्षित हो जाएगा।
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धनघटा तहसील क्षेत्र के ग्राम माधोपुर और उसके आसपास के गांवों में बीते एक दशक से काले बंदरों ने उत्पात मचाया हुआ था। सैकड़ों की संख्या में मौजूद काले बंदर टोलियां बनाकर ग्रामीणों पर हमला बोल देते थे और फसलों को भी नुकसान पहुंचाते थे। बंदरों के डर से लोग छतों पर कपड़े और खाद्यान्न सुखाना तक छोड़ दिए थे। किसानों के खेतों में मौजूद आलू, सरसों, चना, मटर, अरहर समेत सब्जियों की सारी फसलें चौपट कर देते थे। बंदरों के आतंक से किसान अपने खेतों में सब्जियां, दलहन और तिलहन आदि की फसलें लगाना तक बंद कर दिए हैं। बंदर बच्चों, महिलाओं और मोटरसाइकिल सवारों को देखते ही हमलावर हो जाते हैं। बंदरों के हमले में दर्जनों लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं। बंदरों से आजिज ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और वन विभाग को तमाम बार शिकायती पत्र सौंपकर बंदरों को पकड़वाए जाने की मांग किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और खंड विकास अधिकारी को पत्र सौंपकर समस्या से निजात दिलाने की मांग किया, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। थक हार कर ग्रामीणों ने आपस में चंदा लगाकर पैसा इकट्ठा किया और बस्ती जिले से बंदर पकड़ने वालों को बुलवाया। साथ ही ग्रामीणों ने वन विभाग के माध्यम से कुसम्ही जंगल गोरखपुर प्रशासन से बंदरों को आश्रय में लेने का आदेश कराया। बृहस्पतिवार को बस्ती जिले से आए शिकारियों की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से 75 से ज्यादा बंदरों को पिंजरे में कैद कर लिया। शेष बंदरों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
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ग्रामीण अमित कुमार पांडेय, विश्वनाथ पांडेय, पवन कुमार पांडेय, घनश्याम मिश्र, घिराऊ यादव, छोटेलाल यादव, संतोष कुमार पांडेय, राकेश पांडेय, रामप्रताप पांडेय, अनिल त्रिपाठी आदि ने बताया कि बंदरों को पकड़ लिए जाने के बाद लोगों को काफी राहत मिलेगी। किसानों को खेती किसानी करने में सहूलियत मिलेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों का जीवन भी सुरक्षित हो जाएगा।
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