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Sant Kabir Nagar News: श्रीकृष्ण ने लीलाओं से भक्ति प्रेम और समर्पण का दिया संदेश
Thu, 18 Jun 2026 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 18 Jun 2026 12:43 AM IST
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संतकबीरनगर। धनघटा क्षेत्र के मुंडेरा सेमरडाड़ी में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ में बुधवार को कथा व्यास आचार्य उपेंद्र पाराशर ने भगवान के बाल चरित्र और उनके द्वारा भक्तों पर किए गए अनुग्रह की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि वृंदावन की पावन भूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अलौकिक लीलाओं से संपूर्ण संसार को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। गोवर्धन धारण लीला में भगवान ने इंद्र के अभिमान का नाश करते हुए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। यह लीला हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के रक्षक हैं। रास पंचाध्यायी श्रीमद्भागवत का हृदय मानी जाती है। इसमें वर्णित महारास भगवान और जीवात्मा के दिव्य प्रेम का प्रतीक है।
गोपियों का निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण भक्ति की सर्वोच्च अवस्था का दर्शन कराता है। यह लीला प्रेम, त्याग और ईश्वर-प्राप्ति के रहस्य को प्रकट करती है। भक्तों पर भगवान के अनुग्रह की लीलाएं भी श्रीमद्भागवत में अनेक स्थानों पर वर्णित हैं।
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उन्होंने कहा कि वृंदावन की पावन भूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अलौकिक लीलाओं से संपूर्ण संसार को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। गोवर्धन धारण लीला में भगवान ने इंद्र के अभिमान का नाश करते हुए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। यह लीला हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के रक्षक हैं। रास पंचाध्यायी श्रीमद्भागवत का हृदय मानी जाती है। इसमें वर्णित महारास भगवान और जीवात्मा के दिव्य प्रेम का प्रतीक है।
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गोपियों का निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण भक्ति की सर्वोच्च अवस्था का दर्शन कराता है। यह लीला प्रेम, त्याग और ईश्वर-प्राप्ति के रहस्य को प्रकट करती है। भक्तों पर भगवान के अनुग्रह की लीलाएं भी श्रीमद्भागवत में अनेक स्थानों पर वर्णित हैं।
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