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संतकबीरनगर: घर गिरा, बर्बाद हुई फसल, अब कैसे होगा बसर, बाढ़ पीड़ितों का झलका दर्द
Mon, 17 Oct 2022 12:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 12:25 PM IST
सार
तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों को अनाज व पशुओं को खिलाने के लिए चारा का वितरण किया जा रहा है। नुकसान हुई फसल का मुआवजा देने के लिए सर्वे शुरू हो गया है।
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ठेले पर सामान लादकर घर लौट रहा आगापुर गुलरिहा गांव निवासी बाढ़ पीड़ित।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
विस्तार
अक्टूबर में कहर बनकर आई बाढ़ ने धनघटा क्षेत्र के 24 गांव के लोगों के समक्ष मुसीबत का पहाड़ खड़ा कर दिया है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद घर से पलायन करने वाले बाढ़ पीड़ित अपने घरों को लौट रहे हैं तो गिरा हुआ घर, खेत में नष्ट हुई धान की फसल को देखकर उनके आंखों से आंसू निकल आ रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि राहत सामग्री देकर सरकार भले ढांढस बंधा रही हो, लेकिन आगे कैसे जीवन का सफर बढे़गा यह बात दिमाग में आते ही चिंता बढ़ जाती है। घाघरा नदी की बाढ़ से एमबीडी बांध के दक्षिण बसे नारायनपुर, मदरहा, कुर्मियान टोला, अगापुर गुलरिहा, चपरा पूर्वी, खाले पुरवा, जगदीशपुर गांव का राजभर पुरवा, गायघाट दक्षिणी, पटौवा, सियर कला समेत 24 गांव पानी से डूब गए थे।
घरों में पानी भर जाने के कारण घर से पलायन करके लोग सड़क और बंधे पर रहने को विवश हो गए थे। शुक्रवार से जब नदी का पानी घटना शुरू हुआ तो लोग अपने घर को लौटने लगे। नरायनपुर गांव निवासी उमा देवी का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद जब घर गई तो घर गिरा पड़ा था।
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माधुरी का कहना है कि घर जाते समय 12 वर्षीय बेटे फूलचंद के पैर पर गैस सिलिंडर गिर गया था। अगापुर गुलरिहा निवासी संदीप, गायघाट दक्षिणी गांव के नंदू, रमेश, राम वरन आदि का कहना है कि छप्पर के मकान बाढ़ के पानी के कारण गिर गए। खेत में खड़ी धान की फसल तैयार हो चुकी थी। बाढ़ के कारण फसल पानी में गिर कर सड़ रही है।
तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों को अनाज व पशुओं को खिलाने के लिए चारा का वितरण किया जा रहा है। नुकसान हुई फसल का मुआवजा देने के लिए सर्वे शुरू हो गया है।
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बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि राहत सामग्री देकर सरकार भले ढांढस बंधा रही हो, लेकिन आगे कैसे जीवन का सफर बढे़गा यह बात दिमाग में आते ही चिंता बढ़ जाती है। घाघरा नदी की बाढ़ से एमबीडी बांध के दक्षिण बसे नारायनपुर, मदरहा, कुर्मियान टोला, अगापुर गुलरिहा, चपरा पूर्वी, खाले पुरवा, जगदीशपुर गांव का राजभर पुरवा, गायघाट दक्षिणी, पटौवा, सियर कला समेत 24 गांव पानी से डूब गए थे।
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घरों में पानी भर जाने के कारण घर से पलायन करके लोग सड़क और बंधे पर रहने को विवश हो गए थे। शुक्रवार से जब नदी का पानी घटना शुरू हुआ तो लोग अपने घर को लौटने लगे। नरायनपुर गांव निवासी उमा देवी का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद जब घर गई तो घर गिरा पड़ा था।
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माधुरी का कहना है कि घर जाते समय 12 वर्षीय बेटे फूलचंद के पैर पर गैस सिलिंडर गिर गया था। अगापुर गुलरिहा निवासी संदीप, गायघाट दक्षिणी गांव के नंदू, रमेश, राम वरन आदि का कहना है कि छप्पर के मकान बाढ़ के पानी के कारण गिर गए। खेत में खड़ी धान की फसल तैयार हो चुकी थी। बाढ़ के कारण फसल पानी में गिर कर सड़ रही है।
तहसीलदार रत्नेश तिवारी का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों को अनाज व पशुओं को खिलाने के लिए चारा का वितरण किया जा रहा है। नुकसान हुई फसल का मुआवजा देने के लिए सर्वे शुरू हो गया है।