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Sant Kabir Nagar News: क्षेत्र में आज भी गूंजते हैं बलिदानी रामप्रीत की शहादत के किस्से

Thu, 14 Aug 2025 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 14 Aug 2025 11:47 PM IST
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Stories of martyrdom of Balidani Rampreet still reverberate in the area
अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया
हरिहरपुर। 22 साल पहले जिले के अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया ने कश्मीर के पुलवामा में जो शौर्यगाथा लिखी थी उसके किस्से आज भी नाथनगर इलाके की फिजाओं गूंजते हैं। उन्होंने कश्मीर के एक घर में छिपे तीन दहशतगर्दों को मुठभेड़ के दौरान मौत की नींद सुला दी थी। क्षेत्र के हर व्यक्ति का सीना उस समय गर्व से चौड़ा हो जाता है जब वह सेना के जांबाज सैनिक रामप्रीत की बहादुरी को याद करते हैं।
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नाथनगर ब्लॉक के अलीनगर गांव के एक किसान परिवार में जन्मे रामप्रीत चौरसिया साल 1988 में बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे। बीएसएफ की 52वीं बटालियन में तैनात रामप्रीत चौरसिया को वर्ष 2001 में कश्मीर के पुलवामा में तैनाती मिली। उस वक्त कश्मीर की वादियों में आतंक चरम पर था। इसी बीच साल 2003 के सितंबर माह में पुलवामा के नरवानी सेक्टर के एक घर में दहशतगर्दों के छिपे होने का खुफिया इनपुट सुरक्षा एजेंसियों को मिली।
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रिहायशी घर में छिपे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन का जिम्मा बीएसएफ की 52वीं बटालियन को सौंपा गया जिसमें रामप्रीत चौरसिया भी शामिल थे। जिस रिहायशी घर में दहशतगर्द छिपे थे बीएसएफ की बटालियन के जवानों ने उसे चारों ओर से घेर लिया और आतंकियों को आत्मसमर्पण करने को कहा लेकिन आतंकियों ने घर के अंदर से सेना पर अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी, जिसमें बटालियन के एएसआई और एक कांस्टेबल घायल हो गए।
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साथियों के घायल हो जाने के बाद रामप्रीत चौरसिया में मोर्चा संभाला, काफी देर तक चले मुठभेड़ में रामप्रीत चौरसिया ने घर में छिपे तीन दहशतगर्दों को मौत की नींद सुला दी। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से रामप्रीत चौरसिया भी घायल हो गए। घायलावस्था में उन्हें सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया वहां इलाज के दौरान देश के जांबाज सपूत रामप्रीत चौरसिया ने अंतिम सांस ली।

अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया के पैतृक गांव अलीनगर के पास कठिनइया नदी पुल के किनारे उनका समाधि स्थल बना है। यहां हर राष्ट्रीय पर्व पर उनकी शहादत को लोग याद करते हैं। रामप्रीत चौरसिया के अदम्य साहस और बहादुरी के लिए 2005 में मरणोपरांत राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर गैलेंट्री अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया था। जिस समय रामप्रीत चौरसिया ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया उस समय चार बच्चों में उनका बड़ा बेटा विनय कुमार चौरसिया महज 13 साल का था।
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