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Sant Kabir Nagar News: निजी शौचालय क्षतिग्रस्त, सामुदायिक शौचालयों पर ताला
Sun, 03 Sep 2023 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 03 Sep 2023 11:46 PM IST
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विकास खंड हैंसर के दतौनी गांव में बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय।संवाद
धनघटा। गांवों को गंदगी से मुक्त रखने के लिए स्वच्छता मिशन के तहत पहले घर-घर शौचालय का निर्माण कराया गया। उसके बाद गांव-गांव सामुदायिक शौचालय बनाए गए। इसके बावजूद गांव के लोग खुले में नित्य क्रिया करने को विवश हैं। जिसके कारण गांव के सार्वजनिक रास्तों और स्थलों पर गंदगी पसरी है।
विकासखंड हैंसर बाजार और पौली के 142 ग्राम पंचायतों के 208 राजस्व गांवों में वर्ष 2014 से चलाए गए स्वच्छता मिशन अभियान के तहत घर-घर शौचालय का निर्माण कराया गया। शौचालय आधा अधूरे ही रह गए, लेकिन गांव को ओडीएफ यानी गंदगी मुक्त घोषित कर दिया गया।
समस्त ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराने के पीछे मंशा ये रही कि जो लोग किन्हीं कारणवश अपने घरों में बनाए गए शौचालय का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं वह लोग सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करेंगे। इसके बाद भी जिम्मेदारों की उदासीनता ने स्वच्छता मिशन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों के घरों पर बनाए गए निजी शौचालय जहां फाटक और सीट विहीन होकर रह गए हैं वहीं सामुदायिक शौचालयों पर लटक रहे ताला खुलने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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ग्रामीण राम प्रकाश, श्याम सुंदर, अच्छेलाल, अमृतलाल, सुदामा प्रसाद आदि का कहना है कि शुरुआती दौर में लोगों के घरों में शौचालय के निर्माण कराए जाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की थी। उस समय जितने भी शौचालय के निर्माण कराए गए वह सब आधे-अधूरे पड़े हैं। अब उसे सरकारी अनुदान मिलने वाला नहीं है। जिसके कारण खुले में नित्य क्रिया करना लोगों की मजबूरी है।
गांव में बनाए गए सामुदायिक शौचालय कभी खोले ही नहीं जाते। उसमें या तो सीट नहीं लगी है या पानी का इंतजाम नहीं है। शौचालय की साफ-सफाई और रखरखाव के नाम पर 9000 रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं।
सभी सामुदायिक शौचालयों को समय से खुलवाने और बंद करने तथा साफ सफाई रखवाने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। गांव में गंदगी न रहने पाए इसके लिए सफाईकर्मी रोजाना कार्य भी करते हैं। अगर किसी सामुदायिक शौचालय पर ताला बंद है, तो शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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विकासखंड हैंसर बाजार और पौली के 142 ग्राम पंचायतों के 208 राजस्व गांवों में वर्ष 2014 से चलाए गए स्वच्छता मिशन अभियान के तहत घर-घर शौचालय का निर्माण कराया गया। शौचालय आधा अधूरे ही रह गए, लेकिन गांव को ओडीएफ यानी गंदगी मुक्त घोषित कर दिया गया।
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समस्त ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराने के पीछे मंशा ये रही कि जो लोग किन्हीं कारणवश अपने घरों में बनाए गए शौचालय का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं वह लोग सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल करेंगे। इसके बाद भी जिम्मेदारों की उदासीनता ने स्वच्छता मिशन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। लोगों के घरों पर बनाए गए निजी शौचालय जहां फाटक और सीट विहीन होकर रह गए हैं वहीं सामुदायिक शौचालयों पर लटक रहे ताला खुलने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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ग्रामीण राम प्रकाश, श्याम सुंदर, अच्छेलाल, अमृतलाल, सुदामा प्रसाद आदि का कहना है कि शुरुआती दौर में लोगों के घरों में शौचालय के निर्माण कराए जाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की थी। उस समय जितने भी शौचालय के निर्माण कराए गए वह सब आधे-अधूरे पड़े हैं। अब उसे सरकारी अनुदान मिलने वाला नहीं है। जिसके कारण खुले में नित्य क्रिया करना लोगों की मजबूरी है।
गांव में बनाए गए सामुदायिक शौचालय कभी खोले ही नहीं जाते। उसमें या तो सीट नहीं लगी है या पानी का इंतजाम नहीं है। शौचालय की साफ-सफाई और रखरखाव के नाम पर 9000 रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं।
सभी सामुदायिक शौचालयों को समय से खुलवाने और बंद करने तथा साफ सफाई रखवाने के लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। गांव में गंदगी न रहने पाए इसके लिए सफाईकर्मी रोजाना कार्य भी करते हैं। अगर किसी सामुदायिक शौचालय पर ताला बंद है, तो शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।