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Sant Kabir Nagar News: कार खरीद में धोखाधड़ी पर, चार लाख देने का आदेश

Mon, 13 Jul 2026 11:07 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:07 PM IST
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Order to pay four lakhs in car purchase fraud case
उपभोक्ता फोरम ने 10 प्रतिशत ब्याज और 30 हजार रुपये मुआवजा भी देने को कहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह व महिला सदस्य संतोष ने पीड़ित के परिवाद को स्वीकार करते हुए आदेश दिया है कि परिवादी से लिए गए चार लाख रुपये 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित साठ दिन के अंदर अदा करें। साथ ही परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति तथा वाद व्यय के रूप में 30 हजार रुपये भी अदा करें।
परिवादी दिलीप कुमार निवासी ग्राम भैंसाहिया, मगहर ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के समक्ष शिव प्रसाद मौर्य प्रोपराइटर आदर्श सीड सेंटर खलीलाबाद व उनके पुत्र विवेक मौर्य निवासी मोहिउद्दीनपुर, खलीलाबाद के विरुद्ध परिवाद दाखिल किया था। कहा था कि विपक्षी विभिन्न प्रकार के विक्रय करने का कारोबार के साथ-साथ पुराने वाहन को भी बेचने का कार्य करते हैं।
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परिवादी के द्वारा कृषि कार्य हेतु विपक्षी की दुकान से बीज क्रय करने के कारण अच्छा संबंध हो गया। शिव प्रसाद ने अगस्त 2024 के प्रथम सप्ताह में अपने पुत्र विवेक मौर्य की उपस्थिति में अपने नाम से पंजीकृत कार 5,00,000 में विक्रय करने की बाबत बातचीत की। 21 अगस्त 2024 को उसने 4,00,000 का भुगतान कर दिया। शेष एक लाख 15 दिन में भुगतान कर परिवादी के पक्ष में आरटीओ कार्यालय में हस्तांतरित करने की बात कह कर उक्त वाहन को सुपुर्द कर दिया।
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दिलीप कुमार वाहन घर ले आए और अगले दिन स्टार्ट करने लगे तो वह स्टार्ट नहीं हुई। इसकी सूचना विपक्षी को दी। विवेक मौर्य एक मेकेनिक को लेकर आए और कार स्टार्ट कराई। परिवादी ने जब खराब वाहन की शिकायत की तो विपक्षी कहने लगे कि वाहन हम ले जा रहे हैं और सर्विस सेंटर पर मरम्मत कराकर देंगे। परिवादी शेष रुपया एक लाख भुगतान करने हेतु तैयार रहने के बावजूद भी विपक्षी कार मरम्मत कराकर न तो सुपुर्द की और न ही आरटीओ हस्तांतरित कराई और न ही 4,00,000 वापस किए।

मजबूर होकर पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। फोरम में सुनवाई के उपरांत विपक्षी को वाहन के 4,00,000 रुपये को वापस करने तथा शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व वाद व्यय के रूप में खर्च हुए 30,000 रुपये परिवादी को देने का आदेश दिया है।
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