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नोटबंदी की मार,घाटे में होजरी कारोबार

Fri, 23 Dec 2016 11:13 PM IST
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर/ अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 23 Dec 2016 11:13 PM IST
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Notbandi hitting, hosiery trade deficit
होजरी का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। - फोटो : अमर उजाला
नोटबंदी की वजह से होजरी का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लुधियाना की तर्ज पर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में फैले इस कारोबार से जुड़े कारोबारी परेशान हैं। कच्चे माल की आवक समय से नहीं होने और तैयार वस्त्र की बिक्री की गति धीमी होने से इनकी समस्याएं बढ़ गई हैं। कारोबारियों को मजदूरों को मजदूरी तक नहीं पाने का मलाल है। कारोबारी नोटबंदी की मार की वजह से घाटे में पहुंच चुके कारोबार को लेकर चिंतित हैं।         
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 क्षेत्र के मुखलिसपुर, अम्मादेई, बसहिया, चिकनी, अमेदवा, चोलखरी, कोदवट, नाथनगर, अलीनगर, महुली, मानपुर, महुलीयहवा, भगौतीपुर, मडहाराजा, दीनाराय पुरवा, तरयापार, कुडवा, शिवबखरी, अतरौलिया, मुहम्मदपुर, हैसर, डुहिया, अशरफपुर, माधोपुर, प्रजापतिपुर गांवों में होजरी उद्योग संचालित हो रहा है। लुधियाना की तर्ज पर यह कारोबार पनप चुका है। इस व्यवसाय में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा सक्रिय हैं। ठंड का मौसम में शुरू होने के तीन माह पूर्व से ही उद्यमी ऊनी वस्त्र तैयार करने जुट जाते हैं। मुख्य रूप से बच्चों के लिए स्वेटर, टोपी, स्कूल ड्रेस, जैकेट, मफलर, जीरो साइज के गर्म सूट और महिलाओं के लिए कोट बनाते हैं। तैयार कपड़ों को खलीलाबाद के बरदहिया बाजार में ले जाकर बेचते हैं। इस व्यवसाय से जुड़े रफीक, प्रेम, विवेक, फूलचंद, रामनयन, दिग्विजय यादव आदि ने बताया कि नोटबंदी के कारण न तो समय से कच्चे माल का आवक हो पा रहा है। कच्चा माल लुधियाना से मंगाया जाता है। जो ऊनी वस्त्र तैयार किया गया, उसे सप्ताह में एक दिन लगने वाले बरदहिया बाजार में बेचने को ले जाया जाता है। आलम यह है कि नोटबंदी की मार से कपड़ों की बिक्री भी उस गति से नहीं हो पा रही है, जिस गति से पिछले वर्षों में होती रही है। इस सीजन में जो माल तैयार हुआ था। उसका खर्च नहीं निकल पाया। जो मजदूर काम किए, उनकी मजदूरी देने में दिक्कत है। ठंड के सीजन में ही होजरी का कारोबार सिर्फ अच्छा चलता है, लेकिन इस बार पीक सीजन में ही नोटबंदी होने के कारण धंधे पर बुरा असर पड़ा है। सिर्फ 20 प्रतिशत ही कारोबार हुआ और 80 प्रतिशत घाटे में चल गया।  
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