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नवरात्र : मां स्कंदमाता की आराधना, मंदिरों में दर्शन करने उमड़े श्रद्धालु
Sun, 28 Sep 2025 04:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 28 Sep 2025 04:27 AM IST
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समय माता मंदिर के पंडाल में स्थापित मा दुर्गा का दर्शन करते लोग
संतकबीरनगर। नवरात्र के पांचवें दिन देवी मंदिरों में माता स्कंद की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर शहर के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई। सभी श्रद्धालुओं ने माता स्कंद की पूजा-अर्चना कर अपनी अरदास लगाई।
शहर के समय माता मंदिर, वन देवी मंदिर उस्का कला, बरदहिया दुर्गा मंदिर, मेंहदावल के बाराखाल मंदिर आदि जगहों पर सुबह से ही लोग दर्शन के लिए पहुंच गए थे। माता की आरती के साथ ही नारियल, चुनरी आदि चढ़ाया। समय माता मंदिर के पुजारी ब्रजेश मिश्र ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा का पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। प्रेम और ममता की मूर्ति स्कंदमाता की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होता है और मां आपके बच्चों को दीर्घायु प्रदान करती हैं।
भगवती पुराण में स्कंदमाता को लेकर ऐसा कहा गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। देवी स्कंदमाता के इस महा रूप से भक्तों को उन्नति और आशीर्वाद प्राप्त होता है। देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं होती हैं। ये एक हाथ में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में धारण किए रहती हैं, दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है और अन्य दो हाथों में आशीर्वाद मुद्रा और वर मुद्रा होती है। इनका वाहन सिंह है और ये कमल पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें ''''पद्मासना'''' भी कहा जाता है। इनका स्वरूप सौम्य, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी है। उन्होंने कहाकि शनिवार की सुबह ही भक्तों की भीड़ रही।
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शहर के समय माता मंदिर, वन देवी मंदिर उस्का कला, बरदहिया दुर्गा मंदिर, मेंहदावल के बाराखाल मंदिर आदि जगहों पर सुबह से ही लोग दर्शन के लिए पहुंच गए थे। माता की आरती के साथ ही नारियल, चुनरी आदि चढ़ाया। समय माता मंदिर के पुजारी ब्रजेश मिश्र ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा का पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। प्रेम और ममता की मूर्ति स्कंदमाता की पूजा करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होता है और मां आपके बच्चों को दीर्घायु प्रदान करती हैं।
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भगवती पुराण में स्कंदमाता को लेकर ऐसा कहा गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। देवी स्कंदमाता के इस महा रूप से भक्तों को उन्नति और आशीर्वाद प्राप्त होता है। देवी स्कंदमाता की चार भुजाएं होती हैं। ये एक हाथ में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को गोद में धारण किए रहती हैं, दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है और अन्य दो हाथों में आशीर्वाद मुद्रा और वर मुद्रा होती है। इनका वाहन सिंह है और ये कमल पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें ''''पद्मासना'''' भी कहा जाता है। इनका स्वरूप सौम्य, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी है। उन्होंने कहाकि शनिवार की सुबह ही भक्तों की भीड़ रही।
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