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Sant Kabir Nagar News: घर की बिजली वायरिंग कराना हुआ महंगा

Tue, 21 Jul 2026 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:21 PM IST
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Home electrical wiring has become expensive.
मूड़ाडीहाबेग में इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर बोर्ड की खरीदारी करते लोग। संवाद
सेमरियावां। अपना घर बनाने का सपना देख रहे आम आदमी की जेब पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। लोहा, सीमेंट और मौरंग के बाद अब घर में बिजली वायरिंग कराना भी महंगा हो गया है। वैश्विक बाजार और घरेलू स्तर पर कॉपर और प्लास्टिक के दामों में आई तेजी के कारण घरेलू वायरिंग के बजट में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है।
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बिजली वायरिंग सामान बेचने वाले व्यापारियों के अनुसार एक सामान्य मकान की वायरिंग का खर्च आठ से 10 हजार रुपये तक बढ़ गया है। अब ब्रांडेड कंपनियों के बजाय लोकल या नॉन-ब्रांडेड सामानों की खरीदने को मजबूर हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है।
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कॉपर और प्लास्टिक कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होते हैं। दुकानदारों का कहना है कि कंपनियों से ही माल महंगा आ रहा है, जिसके कारण हमें भी बढ़ी हुई कीमतों पर बेचना पड़ रहा है। बाजार में आए उछाल का सबसे बड़ा असर ब्रांडेड स्विच बोर्ड और सेफ्टी उपकरणों पर पड़ा है, जिनके स्विच बोर्ड की कीमतों में 15 से 25 रुपये प्रति पीस तक का इजाफा हुआ है।
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घरों में इस्तेमाल होने वाले पांच एम्पियर से लेकर 15 एम्पियर तक के सॉकेट और प्लग बाजार में 10 से 30 रुपये तक महंगे मिल रहे हैं। घर को शॉर्ट सर्किट से बचाने वाली एमसीबी और डीबी बॉक्स के दाम बढ़ने से सेफ्टी इक्विपमेंट का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
इसके अलावा दीवारों के अंदर पड़ने वाले पीवीसी कंड्यूट पाइप, जंक्शन बॉक्स और अन्य फिटिंग के सामानों में भी 10 फीसदी तक की तेज आई है।
सेमरियावां, मूड़ाडीहाबेग, करही, लोहरौली, सालेहपुर, दुधारा, उसराशहीद, बाघनगर, दानोकुइयां, नव्वागांव, टेमारहमत चिउटना आदि चौराहों पर बिजली सामान की दुकानें हैं। सईदुर्रहमान, जुनैद अहमद, इरफान, अब्दुल वहीद, अहमद आदि बिजली फिटिंग सामान विक्रेताओं का कहना है कि कि प्लास्टिक दाने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ी है, जिसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिख रहा है।

ग्राहकों ने बताया कि पहले से ही कंस्ट्रक्शन मटीरियल महंगा था और अब बिजली की वायरिंग ने बजट बिगाड़ दिया है। जहां पहले एक मंजिल की वायरिंग में 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आया था। अब यह बढ़कर 55 से 60 हजार रुपये के पार पहुंच गया है।
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