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Sant Kabir Nagar News: केले संग हल्दी उगाएं, किसान बढ़ाएं आमदनी
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दुलमपुर में केले की खेती के साथ किसान जगदीश-संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। जनपद के किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर आमदनी बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। विकास खंड पौली के ग्राम दूलमपुर निवासी किसान जगदीश कुमार इसका उदाहरण हैं।
वह दो वर्ष से एक एकड़ क्षेत्रफल में केले की खेती कर रहे हैं। अब कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर केले के साथ हल्दी और अदरक की सह फसली खेती अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। किसान जगदीश कुमार का उद्देश्य केले के पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग कर अतिरिक्त फसल का उत्पादन प्राप्त करना है।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, उचित फसल प्रबंधन के साथ सह फसली खेती अपनाने से उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पौधों की उचित दूरी, मिट्टी की उर्वरता, जल निकासी, सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने बताया कि केले की रोपाई खरीफ मौसम में जून से जुलाई तथा रबी मौसम में मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक की जा सकती है। सामान्य परिस्थितियों में केले के पौधों के बीच दो मीटर तथा कतार से कतार की दूरी दो मीटर रखने की सलाह दी जाती है। इस दूरी पर एक एकड़ में लगभग 1,000 से 1250 पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि वास्तविक संख्या खेत की बनावट और रोपण पद्धति के अनुसार बदल सकती है।
उन्होंने बताया कि केले की खेती में खेत की तैयारी, पौधे, गोबर की खाद, रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, निराई-गुड़ाई, मजदूरी और परिवहन सहित एक एकड़ में लगभग 72 हजार से 1.30 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। सामान्यतः केले की फसल 11 से 14 महीने में कटाई के लिए तैयार होती है।
वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में लगभग 350 से 500 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है। वास्तविक उपज किस्म, मौसम और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है।
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धनघटा। जनपद के किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर आमदनी बढ़ाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। विकास खंड पौली के ग्राम दूलमपुर निवासी किसान जगदीश कुमार इसका उदाहरण हैं।
वह दो वर्ष से एक एकड़ क्षेत्रफल में केले की खेती कर रहे हैं। अब कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर केले के साथ हल्दी और अदरक की सह फसली खेती अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। किसान जगदीश कुमार का उद्देश्य केले के पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग कर अतिरिक्त फसल का उत्पादन प्राप्त करना है।
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कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, उचित फसल प्रबंधन के साथ सह फसली खेती अपनाने से उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पौधों की उचित दूरी, मिट्टी की उर्वरता, जल निकासी, सिंचाई और संतुलित पोषण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बगही के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सीपीएन गौतम ने बताया कि केले की रोपाई खरीफ मौसम में जून से जुलाई तथा रबी मौसम में मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक की जा सकती है। सामान्य परिस्थितियों में केले के पौधों के बीच दो मीटर तथा कतार से कतार की दूरी दो मीटर रखने की सलाह दी जाती है। इस दूरी पर एक एकड़ में लगभग 1,000 से 1250 पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि वास्तविक संख्या खेत की बनावट और रोपण पद्धति के अनुसार बदल सकती है।
उन्होंने बताया कि केले की खेती में खेत की तैयारी, पौधे, गोबर की खाद, रासायनिक उर्वरकों, सिंचाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, निराई-गुड़ाई, मजदूरी और परिवहन सहित एक एकड़ में लगभग 72 हजार से 1.30 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। सामान्यतः केले की फसल 11 से 14 महीने में कटाई के लिए तैयार होती है।
वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर एक एकड़ में लगभग 350 से 500 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है। वास्तविक उपज किस्म, मौसम और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है।