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Sant Kabir Nagar News: ड्रिप व स्प्रिंकलर के जरिए करें खेती, 80 प्रतिशत तक बचेगा पानी
Fri, 19 Apr 2024 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 19 Apr 2024 12:23 AM IST
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- कृषि अभियंत्रण विभाग की ओर से पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही में कृषि अभियंत्रण विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय व्यवसायिक प्रशिक्षण का उद्घाटन बृहस्पतिवार को केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद सिंह ने किया। कहा कि जनपद में अभी भी सिंचाई अधिकतर निजी नलकूप से की जा रही है। जबकि सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप विधि भी काफी कारगर है। इसे ‘बौछारी सिंचाई पद्धति’ भी कहा जाता है। सरकार के अनुदान दिए जाने पर भी जनपद के किसान इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
कृषि अभियंत्रण डाॅ. देवेश कुमार ने बताया की किसान आज भी परंपरागत तरीके से ही सिंचाई करता आ रहा है। वह नलकूप के माध्यम से बाड़ अथवा नाली बनाकर सिंचाई करता है। इसमें 30 से 40 फीसदी पानी का नुकसान होता है। जबकि खेत की स्प्रिंकलर सिंचाई कर किसान अगर प्रयोग करें तो उसे काफी लाभ हो सकता है।
वैज्ञानिक डाॅ. तरुन कुमार ने जल संरक्षण के साथ-साथ फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई योजना के तहत किसानों को स्प्रिंकलर व ड्रिप स्प्रिंकलर की खरीदारी करने की योजना के लाभ की जानकारी दी। वैज्ञानिक डाॅ. राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि इस योजना पर सरकार के द्वारा प्रति हेक्टेयर एक लाख 29 हजार 73 रुपये खर्च होंगे। इस अवसर पर वैज्ञानिक डाॅ. संदीप सिंह कश्यप, चंद्र प्रकाश शुक्ला, राम सिंह, लाल जी यादव, शकुंतला देवी, राम रतन भास्कर आदि मौजूद रहे।
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धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही में कृषि अभियंत्रण विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय व्यवसायिक प्रशिक्षण का उद्घाटन बृहस्पतिवार को केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद सिंह ने किया। कहा कि जनपद में अभी भी सिंचाई अधिकतर निजी नलकूप से की जा रही है। जबकि सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर और ड्रिप विधि भी काफी कारगर है। इसे ‘बौछारी सिंचाई पद्धति’ भी कहा जाता है। सरकार के अनुदान दिए जाने पर भी जनपद के किसान इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
कृषि अभियंत्रण डाॅ. देवेश कुमार ने बताया की किसान आज भी परंपरागत तरीके से ही सिंचाई करता आ रहा है। वह नलकूप के माध्यम से बाड़ अथवा नाली बनाकर सिंचाई करता है। इसमें 30 से 40 फीसदी पानी का नुकसान होता है। जबकि खेत की स्प्रिंकलर सिंचाई कर किसान अगर प्रयोग करें तो उसे काफी लाभ हो सकता है।
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वैज्ञानिक डाॅ. तरुन कुमार ने जल संरक्षण के साथ-साथ फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई योजना के तहत किसानों को स्प्रिंकलर व ड्रिप स्प्रिंकलर की खरीदारी करने की योजना के लाभ की जानकारी दी। वैज्ञानिक डाॅ. राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि इस योजना पर सरकार के द्वारा प्रति हेक्टेयर एक लाख 29 हजार 73 रुपये खर्च होंगे। इस अवसर पर वैज्ञानिक डाॅ. संदीप सिंह कश्यप, चंद्र प्रकाश शुक्ला, राम सिंह, लाल जी यादव, शकुंतला देवी, राम रतन भास्कर आदि मौजूद रहे।
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