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Sant Kabir Nagar News: आसान नहीं पैमाइश, पहले पूरी कीजिए फरमाइश
Sat, 29 Apr 2023 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 29 Apr 2023 12:11 AM IST
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खलीलाबाद तहसील।
संतकबीरनगर। यदि आपने किसी भूमि की रजिस्ट्री कराई है, तो उस पर काबिज होना भी आसान नहीं है। हो सकता है कि आप उस भूमि को सुरक्षित करने के लिए चहारदीवारी बनाने जाएं, तो कोई आकर रोक दे। कहने लगे कि आप उसकी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में आपकी परेशानी बढ़ सकती है, क्योकि इसके पीछे भी बड़ा खेल है।
समस्या आने पर आपको स्थानीय लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह पैमाइश के लिए आने पर आप से कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलझ जाएगा। वरना तहसील के चक्कर काटते- काटते महीनों गुजर जाएगा। तहसील में ऐसे 100 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनके निस्तारणा के लिए तारीख लग रही है।
भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिनमें अगल-बगल के लोग नए भू स्वामी को कब्जा नहीं करने देते। जिसकी भूमि की रजिस्ट्री रहती है। उस पर किसी तरह का निर्माण कार्य शुरु होने पर उसमें अपनी भूमि का हिस्सा बताकर काम रोक देते हैं।
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आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के इस पर कोई काम नहीं हो सकेगा। पैमाइश करा कर पहले पत्थर नसब कराइए। इसके बाद ही निर्माण होने देंगे। यह मामला शुरु में थाने पहुंचता है। संपूर्ण समाधान दिवस और थाना समाधान दिवस पर अधिकारियों के आदेश पर पुलिस के साथ लेखपाल- कानूनगों भूमि की माप करा देते हैं। इस दौरान यदि मामला नहीं खत्म हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता राकेश धर द्विवेदी बताते हैं कि पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक अर्थात भू स्वामी से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया तो जल्दी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएगा। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर में दौड़ते रहेंगे। ऐसे तमाम मामले हैं। जिनमें लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं। जल्दी काम करने के लिए रुपयों की मांग की जाती है।
क्या है पक्की पैमाइश
तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है। उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटे की पैमाइश करने के लिए अगल- बगल के लोगों को नोटिस दी जाती है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। पैमाइश के लिए तीन पथरान अथा फिक्स प्वाइंट जैसे कोई पुराना कुंआ, मंदिर, भवन, सड़क इत्यादि के आधार पर नापी होती है। नक्शा और अन्य चीजे दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते है। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
बिचौलिए ने ले लिया 5000 रुपये, फिर भी नहीं हुई पैमाइश
खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के जगदीशपुर उर्फ लहुरादेवा के रहने वाले रामचेत पुत्र चंद्रदेव बताते हैं कि वह जमीन का बैनामा कराए थे। जमीन का रकबा कम मिला। वह लेखपाल से मिलकर पैमाइशन की मनुहार किए, लेकिन उसका काम नहीं हुआ। एक व्यक्ति ने पैमाइश कराने के नाम पर 5,000 रुपये भी ले लिया और कहा कि सब मैनेज कर देगा, लेकिन नहीं ऐसा हुआ। उनका दावा लंबित चल रहा है।
एक साल पहले हुआ आदेश, नहीं हुई पैमाइश
मेंहदावल नगर के राजाबारी निवासी वेद पांडेय ने बताया कि उनकी पैतृक जमीन है। कुछ लोग उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करना चाह रहे थे। जिसकी पैमाइश के लिए काफी परेशान हुए। लेखपाल से मिले और काफी प्रयास किए। तहसील के एक दलाल ने 7000 रुपये ले लिया, लेकिन पैमाइश अभी तक नहीं हो पाई। जबकि एक साल पहले पैमाइश का आदेश भी हो गया।
घूस लेने में तीन कानूनगो और दो लेखपाल जा चुके हैं जेल
मेंहदावल तहसील के राजेडीहा गांव में स्थित भूमि के बंटवारे की फाइल में रिपोर्ट लगाने के एवज में 50,000 रुपये रिश्वत लेते 14 मार्च 2023 को लेखपाल अश्वनी मिश्रा को एंटी करप्शन टीम गोरखपुर ने पकड़ कर जेल भेजा था। वर्ष 2016 में पैमाइश के लिए 2,000 रुपये घूस लेते धनघटा तहसील के कानूनगो भानु प्रताप सिंह को एंटी करप्शन टीम ने पकड़ कर जेल भेजा था। वर्ष 2020 में धनघटा तहसील के ही लेखपाल राजदेव गुप्ता को पैमाइश के नाम पर 2,500 रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने पकड़ कर जेल भेजा था।
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समस्या आने पर आपको स्थानीय लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह पैमाइश के लिए आने पर आप से कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलझ जाएगा। वरना तहसील के चक्कर काटते- काटते महीनों गुजर जाएगा। तहसील में ऐसे 100 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनके निस्तारणा के लिए तारीख लग रही है।
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भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिनमें अगल-बगल के लोग नए भू स्वामी को कब्जा नहीं करने देते। जिसकी भूमि की रजिस्ट्री रहती है। उस पर किसी तरह का निर्माण कार्य शुरु होने पर उसमें अपनी भूमि का हिस्सा बताकर काम रोक देते हैं।
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आपत्ति जताते हुए कहते हैं कि बिना पैमाइश के इस पर कोई काम नहीं हो सकेगा। पैमाइश करा कर पहले पत्थर नसब कराइए। इसके बाद ही निर्माण होने देंगे। यह मामला शुरु में थाने पहुंचता है। संपूर्ण समाधान दिवस और थाना समाधान दिवस पर अधिकारियों के आदेश पर पुलिस के साथ लेखपाल- कानूनगों भूमि की माप करा देते हैं। इस दौरान यदि मामला नहीं खत्म हुआ तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता राकेश धर द्विवेदी बताते हैं कि पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक अर्थात भू स्वामी से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया तो जल्दी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएगा। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर में दौड़ते रहेंगे। ऐसे तमाम मामले हैं। जिनमें लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं। जल्दी काम करने के लिए रुपयों की मांग की जाती है।
क्या है पक्की पैमाइश
तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है। उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटे की पैमाइश करने के लिए अगल- बगल के लोगों को नोटिस दी जाती है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। पैमाइश के लिए तीन पथरान अथा फिक्स प्वाइंट जैसे कोई पुराना कुंआ, मंदिर, भवन, सड़क इत्यादि के आधार पर नापी होती है। नक्शा और अन्य चीजे दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते है। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
बिचौलिए ने ले लिया 5000 रुपये, फिर भी नहीं हुई पैमाइश
खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के जगदीशपुर उर्फ लहुरादेवा के रहने वाले रामचेत पुत्र चंद्रदेव बताते हैं कि वह जमीन का बैनामा कराए थे। जमीन का रकबा कम मिला। वह लेखपाल से मिलकर पैमाइशन की मनुहार किए, लेकिन उसका काम नहीं हुआ। एक व्यक्ति ने पैमाइश कराने के नाम पर 5,000 रुपये भी ले लिया और कहा कि सब मैनेज कर देगा, लेकिन नहीं ऐसा हुआ। उनका दावा लंबित चल रहा है।
एक साल पहले हुआ आदेश, नहीं हुई पैमाइश
मेंहदावल नगर के राजाबारी निवासी वेद पांडेय ने बताया कि उनकी पैतृक जमीन है। कुछ लोग उनकी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करना चाह रहे थे। जिसकी पैमाइश के लिए काफी परेशान हुए। लेखपाल से मिले और काफी प्रयास किए। तहसील के एक दलाल ने 7000 रुपये ले लिया, लेकिन पैमाइश अभी तक नहीं हो पाई। जबकि एक साल पहले पैमाइश का आदेश भी हो गया।
घूस लेने में तीन कानूनगो और दो लेखपाल जा चुके हैं जेल
मेंहदावल तहसील के राजेडीहा गांव में स्थित भूमि के बंटवारे की फाइल में रिपोर्ट लगाने के एवज में 50,000 रुपये रिश्वत लेते 14 मार्च 2023 को लेखपाल अश्वनी मिश्रा को एंटी करप्शन टीम गोरखपुर ने पकड़ कर जेल भेजा था। वर्ष 2016 में पैमाइश के लिए 2,000 रुपये घूस लेते धनघटा तहसील के कानूनगो भानु प्रताप सिंह को एंटी करप्शन टीम ने पकड़ कर जेल भेजा था। वर्ष 2020 में धनघटा तहसील के ही लेखपाल राजदेव गुप्ता को पैमाइश के नाम पर 2,500 रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने पकड़ कर जेल भेजा था।