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Sant Kabir Nagar News: जिन खोजे तिन पाइयां गहरे पानी पैठ...
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कवि भालचंद त्रिपाठी कविता पाठ करते हुए।
मगहर। सद्गुरु कबीर के 625 वें जन्मोत्सव पर कबीर अकादमी के प्रेक्षागृह में निर्गुण कवि सम्मेलन आखर का आयोजन जमुना प्रसाद उपाध्याय की अध्यक्षता में किया गया। डॉ. आभा श्रीवास्तव ने कहा कि कबीर अभी भी हम सबमें जिंदा हैं। इसके साथ ही कबीर के दोहे ''जिन खोजे तिन पाइयां गहरे पानी पैठ'' से शुरू सम्मेलन की शुरूआत की।
प्रयागराज से पधारे कवि शैलेंद्र मधु ने ''भूख मिटती नहीं मिटाने से, प्यास बुझती नहीं बुझाने से, दिल में तूफान है तेरी चाहत दिल ये संभलेगा तेरे आने से'' सुनाकर वाहवाही लूटी। इसके बाद ''हम कबीर की थाती साधो, हमसे कोई मतलब क्या है काबा हो या काशी''। सुनाई, जिसे सराहा गया। इसके बाद निर्गुण गीत प्रस्तुत करते हुए जैसे डूबी नांव किसी मझधार में, वैसे डूब गया मन तेरे प्यार में। सुनाकर लोगों झूमने पर मजबूर कर दिया।
आजमगढ़ से पधारे भालचंद त्रिपाठी दोहा ''जब जब मन बेकल हुआ घनी हुई है तीर, दिल के बहुत करीब बैठे हैं कबीर''। सुनाया। इसके बाद गजल के कुछ शेर ''जिसकी तुमसे यारी साहेब-उसको क्या दुश्वारी साहेब, हर कोई अपना लगता है किससे क्या होशियारी साहेब''। सुनाकर कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान की।
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अध्यक्षता कर रहे कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने कुछ ऐसे बांकपन से ओढ़ना है-भजन से कीर्तन से ओढ़ना है, ये चादर है कबीरा की धरोहर -जतन से करीने से ओढ़ना है, सुनकर खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर महंत विचारदास,चेयरमैन प्रतिनिधि नूरुज्जमा अंसारी,आशुतोष द्विवेदी, हरिप्रसाद सिंह, डॉ. हरिशरण शास्त्री, डॉ. एके पांडेय,संतोष यादव, अवधेश सिंह, डॉ.अरविंद शास्त्री, पंकज मिश्र, संत केशव दास,वैद्य रामसरन दास आदि मौजूद रहे।
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प्रयागराज से पधारे कवि शैलेंद्र मधु ने ''भूख मिटती नहीं मिटाने से, प्यास बुझती नहीं बुझाने से, दिल में तूफान है तेरी चाहत दिल ये संभलेगा तेरे आने से'' सुनाकर वाहवाही लूटी। इसके बाद ''हम कबीर की थाती साधो, हमसे कोई मतलब क्या है काबा हो या काशी''। सुनाई, जिसे सराहा गया। इसके बाद निर्गुण गीत प्रस्तुत करते हुए जैसे डूबी नांव किसी मझधार में, वैसे डूब गया मन तेरे प्यार में। सुनाकर लोगों झूमने पर मजबूर कर दिया।
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आजमगढ़ से पधारे भालचंद त्रिपाठी दोहा ''जब जब मन बेकल हुआ घनी हुई है तीर, दिल के बहुत करीब बैठे हैं कबीर''। सुनाया। इसके बाद गजल के कुछ शेर ''जिसकी तुमसे यारी साहेब-उसको क्या दुश्वारी साहेब, हर कोई अपना लगता है किससे क्या होशियारी साहेब''। सुनाकर कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान की।
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अध्यक्षता कर रहे कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने कुछ ऐसे बांकपन से ओढ़ना है-भजन से कीर्तन से ओढ़ना है, ये चादर है कबीरा की धरोहर -जतन से करीने से ओढ़ना है, सुनकर खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर महंत विचारदास,चेयरमैन प्रतिनिधि नूरुज्जमा अंसारी,आशुतोष द्विवेदी, हरिप्रसाद सिंह, डॉ. हरिशरण शास्त्री, डॉ. एके पांडेय,संतोष यादव, अवधेश सिंह, डॉ.अरविंद शास्त्री, पंकज मिश्र, संत केशव दास,वैद्य रामसरन दास आदि मौजूद रहे।