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Sant Kabir Nagar News: बाढ़ से बर्बाद हुई फसल, एक साल बाद भी किसानों को नहीं मिला मुआवजा
Wed, 26 Jul 2023 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 26 Jul 2023 12:49 AM IST
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-वर्ष 2022 में धनघटा तहसील क्षेत्र में आई बाढ़ ने मचाई थी तबाही
-32 गांवो के किसानों की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई थी
- सीएम के आदेश के बाद भी किसान मुआवजा राशि पाने से वंचित
- अगस्त- सितंबर में भारी बारिश की जारी चेतावनी से भी किसान परेशान
संवाद न्यूज़ एजेंसी
संतकबीरनगर। अगस्त- सितंबर में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी है। इसको लेकर जहां किसान चिंतित हैं वहीं पिछले साल घाघरा की बाढ़ से बर्बाद फसल का मुआवजा पाने से काफी संख्या में किसान वंचित हैं। जबकि सीएम का निर्देश था कि जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाय। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
वर्ष 2022 में घाघरा नदी की बाढ़ ने धनघटा तहसील क्षेत्र के गायघाट दक्षिण, सरैया, खरैया, ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सुअरहा, दौलतपुर, सियरकला, बहराडाडी, चपरा पूर्वी, केवटहिया, छपरा मगरबी, आगापुर गुलरिहा, नरायनपुर, मांझा चहोड़ा, खड़कपुर आदि गांव में भारी तबाही मचाई थी। 32 गांव के किसानों की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई थी।
बाढ़ जब अपने चरम सीमा पर थी तभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वेक्षण किया था। हवाई सर्वेक्षण के दो दिन के बाद सीएम योगी ने छपरा मगरबी गांव में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की थी। उस समय मंच से घोषणा किया था कि जिन किसानों की फसल बाढ़ के कारण नष्ट हो गई है उन्हें फसलों की मुआवजा राशि तत्काल दी जाए। जिन बाढ़ पीड़ितों का मकान बाढ़ के कारण गिरकर ध्वस्त हो गए हैं उनको मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए।
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धीरे-धीरे बाढ़ हटी तो किसानों को उम्मीद जगी कि नष्ट हुई फसलों का मुआवजा राशि अब मिल जाएगा। तहसील प्रशासन ने सर्वे कराया और करीब 2100 किसानों की सूची बनाई। जिसमें से 800 किसानों को मुआवजे की धनराशि दी गई। जबकि कई गांवों के अन्य किसानों को मुआवजे की राशि का भुगतान आज तक नहीं हो सका है। इधर अगस्त- सितंबर में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी हुई है। इसको लेकर भी किसान परेशान हैं। अभी घाघरा का जलस्तर स्थिर है लेकिन बढ़ने पर फिर किसानों की फसल को क्षति होने का पूरा अंदेशा है।
पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। मुख्यमंत्री ने जब घोषणा किया कि किसानों को मुआवजा राशि दी जाएगी तो किसान राहत महसूस करने लगे थे। उसके बाद तहसील प्रशासन ने जब सर्वे कार्य शुरू किया तो बताया गया कि चपरा पूर्वी गांव का अभिलेख ही नहीं है। इस कारण यहां के लोगों को मुआवजा राशि नहीं दी जाएगी। करीब 1000 से अधिक किसान मुआवजा राशि पाने से वंचित है।
-- हरिराम, ग्राम प्रधान, चपरा पूर्वी
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बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने किसानों को जो राहत पैकेट दिया उसी से उनको संतोष करना पड़ा। न तो बाढ़ पीड़ितों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया और न ही अभिलेख के कारण छपरा में मगरबी गांव के 1200 से अधिक किसान नुकसान हुई फसलों का मुआवजा राशि मिल पाया। जबकि बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ था।
देवेंद्र यादव, प्रधान प्रतिनिधि, छपरा मगरबी
तहसील प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा यहां के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। तहसील प्रशासन के जरिए गायब किए गए अभिलेख अभी तक नहीं मिल सके। जिसके कारण यहां के किसान सम्मान निधि, नुकसान हुई फसल का मुआवजा राशि पानी से वंचित हैं।
-उदय भान, किसान
वर्ष 2022 में आई बाढ़ के कारण धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। जिसको प्रदेश सरकार के मुखिया ने अपने आंखोंं से स्वयं देखा था। इसके बाद भी यहां के किसानों को नुकसान हुई फसल का मुआवजा नहीं मिल रहा है।
-लाल बहादुर, किसान
चपरा पूर्वी और छपरा मगरबी गांव के किसान अभिलेख न होने के कारण मुआवजा राशि पाने से वंचित रह गए हैं। कुछ गांव में किसान इस कारण मुआवजा राशि नहीं पा सके कि उनके बैंक खाता में त्रुटि पाई गई। जिसे दुरुस्त किया जा रहा है। वंचित रह गए किसानों को मुआवजा राशि शीघ्र मिल जाएगी।
-योगेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार धनघटा
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-32 गांवो के किसानों की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई थी
- सीएम के आदेश के बाद भी किसान मुआवजा राशि पाने से वंचित
- अगस्त- सितंबर में भारी बारिश की जारी चेतावनी से भी किसान परेशान
संवाद न्यूज़ एजेंसी
संतकबीरनगर। अगस्त- सितंबर में भारी बारिश होने का अलर्ट जारी है। इसको लेकर जहां किसान चिंतित हैं वहीं पिछले साल घाघरा की बाढ़ से बर्बाद फसल का मुआवजा पाने से काफी संख्या में किसान वंचित हैं। जबकि सीएम का निर्देश था कि जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है उन्हें मुआवजा दिया जाय। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
वर्ष 2022 में घाघरा नदी की बाढ़ ने धनघटा तहसील क्षेत्र के गायघाट दक्षिण, सरैया, खरैया, ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सुअरहा, दौलतपुर, सियरकला, बहराडाडी, चपरा पूर्वी, केवटहिया, छपरा मगरबी, आगापुर गुलरिहा, नरायनपुर, मांझा चहोड़ा, खड़कपुर आदि गांव में भारी तबाही मचाई थी। 32 गांव के किसानों की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई थी।
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बाढ़ जब अपने चरम सीमा पर थी तभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वेक्षण किया था। हवाई सर्वेक्षण के दो दिन के बाद सीएम योगी ने छपरा मगरबी गांव में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की थी। उस समय मंच से घोषणा किया था कि जिन किसानों की फसल बाढ़ के कारण नष्ट हो गई है उन्हें फसलों की मुआवजा राशि तत्काल दी जाए। जिन बाढ़ पीड़ितों का मकान बाढ़ के कारण गिरकर ध्वस्त हो गए हैं उनको मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए।
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धीरे-धीरे बाढ़ हटी तो किसानों को उम्मीद जगी कि नष्ट हुई फसलों का मुआवजा राशि अब मिल जाएगा। तहसील प्रशासन ने सर्वे कराया और करीब 2100 किसानों की सूची बनाई। जिसमें से 800 किसानों को मुआवजे की धनराशि दी गई। जबकि कई गांवों के अन्य किसानों को मुआवजे की राशि का भुगतान आज तक नहीं हो सका है। इधर अगस्त- सितंबर में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी हुई है। इसको लेकर भी किसान परेशान हैं। अभी घाघरा का जलस्तर स्थिर है लेकिन बढ़ने पर फिर किसानों की फसल को क्षति होने का पूरा अंदेशा है।
पिछले वर्ष आई बाढ़ के दौरान किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। मुख्यमंत्री ने जब घोषणा किया कि किसानों को मुआवजा राशि दी जाएगी तो किसान राहत महसूस करने लगे थे। उसके बाद तहसील प्रशासन ने जब सर्वे कार्य शुरू किया तो बताया गया कि चपरा पूर्वी गांव का अभिलेख ही नहीं है। इस कारण यहां के लोगों को मुआवजा राशि नहीं दी जाएगी। करीब 1000 से अधिक किसान मुआवजा राशि पाने से वंचित है।
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बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने किसानों को जो राहत पैकेट दिया उसी से उनको संतोष करना पड़ा। न तो बाढ़ पीड़ितों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया और न ही अभिलेख के कारण छपरा में मगरबी गांव के 1200 से अधिक किसान नुकसान हुई फसलों का मुआवजा राशि मिल पाया। जबकि बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ था।
देवेंद्र यादव, प्रधान प्रतिनिधि, छपरा मगरबी
तहसील प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा यहां के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। तहसील प्रशासन के जरिए गायब किए गए अभिलेख अभी तक नहीं मिल सके। जिसके कारण यहां के किसान सम्मान निधि, नुकसान हुई फसल का मुआवजा राशि पानी से वंचित हैं।
-उदय भान, किसान
वर्ष 2022 में आई बाढ़ के कारण धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। जिसको प्रदेश सरकार के मुखिया ने अपने आंखोंं से स्वयं देखा था। इसके बाद भी यहां के किसानों को नुकसान हुई फसल का मुआवजा नहीं मिल रहा है।
-लाल बहादुर, किसान
चपरा पूर्वी और छपरा मगरबी गांव के किसान अभिलेख न होने के कारण मुआवजा राशि पाने से वंचित रह गए हैं। कुछ गांव में किसान इस कारण मुआवजा राशि नहीं पा सके कि उनके बैंक खाता में त्रुटि पाई गई। जिसे दुरुस्त किया जा रहा है। वंचित रह गए किसानों को मुआवजा राशि शीघ्र मिल जाएगी।
-योगेंद्र पांडेय, नायब तहसीलदार, प्रभारी तहसीलदार धनघटा