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Sant Kabir Nagar News: दुष्कर्म मामले के दोषी साले और सहयोगी बहनोई को सजा
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संतकबीरनगर। न्यायालय विशेष न्यायाधीश/एससी/एसटी एक्ट दिनेश प्रताप सिंह ने दुष्कर्म के दोषी साले को सात वर्ष की सजा और वारदात में सहयोग करने के दोषी बहनोई को तीन वर्ष की सजा सुनाई। दोषी साले को 6500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थ दंड अदा न करने पर छ: माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जबकि सहयोगी बहनोई पर 1000 रुपये अर्थ दंड लगाया। अर्थ दंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने की सजा में से 4000 रुपये पीड़िता को देने और शेष रकम राज्य सरकार के पक्ष में जमा करने का आदेश दिया।
विशेष लोक अभियोजक आशीष पांडेय ने बताया कि धनघटा क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित चाचा ने पुलिस को तहरीर दी, जिसमें कहा कि उसकी 13 वर्षीय भतीजी 22 मई 2007 को दिन में एक बजे आरोपी के राशन की दुकान पर समान खरीदने गई थी। आरोपी ने मौका देखकर उसकी भतीजी का अपहरण कर लिया। रात में उसे लेकर कहीं अन्यत्र स्थान पर चला गया। पुलिस को सूचना दी तथा अपने स्तर से खोजबीन करने पर पता चला कि आरोपी ने उसकी भतीजी को कोतवाली क्षेत्र मेंं अपनी बहन के यहां छुपा कर रखा है।
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पुलिस को सूचना देने के बाद वह कुछ संभ्रांत लोगों के साथ आरोपी के बहनोई के वहां चार जून 2007 को पहुंचा। लोगों के दबाव में आकर आरोपी ने उसकी भतीजी को उसे सौंपा। आरोपी उसकी भतीजी के साथ 22 मई से चार जून 2007 तक दुष्कर्म और अश्लील हरकत करता रहा। भतीजी के साथ थाने पर गए तो उसे डांट कर भगा दिया गया।
एसपी के अलावा तमाम उच्चाधिकारियों को सूचना दी। सूचना के आधार पर मुकदमा पंजीकृत हुआ। विवेचना में कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले आरोपी के बहनोई का नाम घटना में सहयोग करने के मामले में प्रकाश में आया। विवेचक ने कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए आठ गवाहों की गवाही कराई गई। दोनों पक्षों की बहस व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्ध होने पर कोर्ट ने दोषी 38 वर्षीय साले को सात वर्ष का कारावास तथा 6500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
अर्थ दंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी, जबकि दोषी बहनोई को तीन वर्ष कारावास की सजा के साथ 1000 रुपये अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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जबकि सहयोगी बहनोई पर 1000 रुपये अर्थ दंड लगाया। अर्थ दंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने की सजा में से 4000 रुपये पीड़िता को देने और शेष रकम राज्य सरकार के पक्ष में जमा करने का आदेश दिया।
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विशेष लोक अभियोजक आशीष पांडेय ने बताया कि धनघटा क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित चाचा ने पुलिस को तहरीर दी, जिसमें कहा कि उसकी 13 वर्षीय भतीजी 22 मई 2007 को दिन में एक बजे आरोपी के राशन की दुकान पर समान खरीदने गई थी। आरोपी ने मौका देखकर उसकी भतीजी का अपहरण कर लिया। रात में उसे लेकर कहीं अन्यत्र स्थान पर चला गया। पुलिस को सूचना दी तथा अपने स्तर से खोजबीन करने पर पता चला कि आरोपी ने उसकी भतीजी को कोतवाली क्षेत्र मेंं अपनी बहन के यहां छुपा कर रखा है।
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पुलिस को सूचना देने के बाद वह कुछ संभ्रांत लोगों के साथ आरोपी के बहनोई के वहां चार जून 2007 को पहुंचा। लोगों के दबाव में आकर आरोपी ने उसकी भतीजी को उसे सौंपा। आरोपी उसकी भतीजी के साथ 22 मई से चार जून 2007 तक दुष्कर्म और अश्लील हरकत करता रहा। भतीजी के साथ थाने पर गए तो उसे डांट कर भगा दिया गया।
एसपी के अलावा तमाम उच्चाधिकारियों को सूचना दी। सूचना के आधार पर मुकदमा पंजीकृत हुआ। विवेचना में कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले आरोपी के बहनोई का नाम घटना में सहयोग करने के मामले में प्रकाश में आया। विवेचक ने कोर्ट में आरोप पत्र प्रेषित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए आठ गवाहों की गवाही कराई गई। दोनों पक्षों की बहस व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर दुष्कर्म के मामले में दोष सिद्ध होने पर कोर्ट ने दोषी 38 वर्षीय साले को सात वर्ष का कारावास तथा 6500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
अर्थ दंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी, जबकि दोषी बहनोई को तीन वर्ष कारावास की सजा के साथ 1000 रुपये अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।