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Sant Kabir Nagar News: बाइक और पैसों के लेनदेन में बयान देने नहीं पहुंचा परिवादी

Mon, 13 Jul 2026 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:24 PM IST
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Complainant did not turn up to give a statement regarding the bike and money transaction.
संतकबीरनगर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतन त्यागी की अदालत ने थाना धर्मसिंहवा के तत्कालीन थानाध्यक्ष सरोज शर्मा, तत्कालीन नायब दरोगा परवेज खान तथा संतोष सिंह के विरुद्ध दाखिल परिवाद को निरस्त कर दिया। अदालत ने यह आदेश परिवादी के बार-बार अवसर मिलने के बावजूद न्यायालय में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज न कराने के आधार पर पारित किया।
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जानकारी के अनुसार थाना धर्मसिंहवा क्षेत्र के ग्राम जखनिया निवासी शिवसागर (परिवादी) ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनकी ग्राम सेवहाबाबू में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है। दुकान पर आने-जाने के दौरान उसकी पहचान ग्राम सेवहाबाबू निवासी संतोष सिंह से हुई। आरोप है कि संतोष सिंह ने अपनी बाइक उसके पास रखकर 15 हजार रुपये उधार मांगे और भरोसा दिलाया कि रुपये लौटाने पर बाइक वापस ले लेगा।
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शिवसागर के अनुसार उसने 10 दिसंबर 2024 को अपने बैंक खाते से ऑनलाइन 15 हजार रुपये संतोष सिंह के खाते में स्थानांतरित कर दिए। कुछ समय बाद जब उसने अपना पैसा वापस मांगा तो संतोष सिंह की नीयत बदल गई।
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आरोप है कि संतोष सिंह ने तत्कालीन थानाध्यक्ष सरोज शर्मा और हल्का के नायब दरोगा परवेज खान से मिलीभगत कर उसे फोन कर थाना धर्मसिंहवा बुलाया और कहा कि बाइक लेकर आओ, तुम्हारे 15 हजार रुपये वापस करा दिए जाएंगे।
शिकायत में कहा गया कि वह बाइक लेकर थाने पहुंचा तो उससे बाइक ले ली गई और रुपये वापस नहीं किए गए। विरोध करने पर कथित रूप से उसे अपशब्द कहकर भगा दिया गया तथा झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई।
शिवसागर ने आरोप लगाया कि तीनों ने साजिश के तहत उसकी बाइक और 15 हजार रुपये हड़प लिए। इतना ही नहीं, शिकायत करने पर उसका शांतिभंग की आशंका में चालान भी कर दिया गया।
शिवसागर का कहना था कि उसने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से भी की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए शिवसागर को अदालत में उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराने का अवसर दिया था।

सुनवाई के दौरान शिवसागर निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ और न ही अपने आरोपों के समर्थन में बयान दर्ज कराए। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतन त्यागी ने उपलब्ध अभिलेखों और परिवादी की अनुपस्थिति को आधार बनाते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष सरोज शर्मा, तत्कालीन नायब दरोगा परवेज खान तथा संतोष सिंह के विरुद्ध दाखिल परिवाद को निरस्त कर दिया।
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