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विषाक्त भोजन कर रहे स्कूलों के बच्चे
संतकबीरनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 07 Oct 2018 11:34 PM IST
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विषाक्त भोजन कर रहे स्कूलों के बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय और परिषदीय स्कूलों में बच्चे विषाक्त भोजन कर रहे हैं। यह तथ्य खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट में सामने आया है। जिले के दो विद्यालयों में हुई रेंडम जांच में लिए गए नमूनों की जो रिपोर्ट आई है उसमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के चावल को असुरक्षित तथा जूनियर हाईस्कूल में बनी सब्जी को मानक के विपरीत बताया गया है। जांच रिपोर्ट भोजन में गड़बड़ी की बात सामने आने पर बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है। संबंधित विद्यालयों को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा अन्य स्कूलों को भी मानक का ख्याल रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में 1075 प्राथमिक, 443 उच्च प्राथमिक और 34 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनके अलावा 15 मदरसों में भी एमडीएम के तहत बच्चों को गरम भोजन दिए जातें है, जबकि सात आवासीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भी छात्राओं और वहां रहने वाली अध्यापिकाओं के लिए दोनों वक्त भोजन बनता है। जिले में कुल लगभग डेढ़ लाख बच्चे प्रतिदिन भोजन करते हैं। पिछले 20 अगस्त को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अभिहित अधिकारी मंजूषा सिंह ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बघौली में बन रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की। चावल का नमूना लिया और उसे जांच के लिए झांसी लैब में भेजा। लैब की रिपोर्ट के अनुसार चावल असुरक्षित पाया गया है और यह खाने लायक नहीं है। इसी तरह से छह अगस्त को पूर्व माध्यमिक विद्यालय सोनाड़ी हैंसर बाजार में बन रहे एमडीएम की जांच की गई। यहां पर पकी सब्जी का नमूना लिया और उसे जांच के लिए लैब में भेजा गया। रिपोर्ट में पकी सब्जी अधोमानक (मानक के विपरीत) पाया गया। अभिहित अधिकारी के जरिए दोनों स्कूलों के भोजन की गुणवत्ता की रिपोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग ने रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों स्कूूलों के जिम्मेदारों को नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भेजा जाएगा।
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जिले में 1075 प्राथमिक, 443 उच्च प्राथमिक और 34 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनके अलावा 15 मदरसों में भी एमडीएम के तहत बच्चों को गरम भोजन दिए जातें है, जबकि सात आवासीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में भी छात्राओं और वहां रहने वाली अध्यापिकाओं के लिए दोनों वक्त भोजन बनता है। जिले में कुल लगभग डेढ़ लाख बच्चे प्रतिदिन भोजन करते हैं। पिछले 20 अगस्त को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अभिहित अधिकारी मंजूषा सिंह ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बघौली में बन रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की। चावल का नमूना लिया और उसे जांच के लिए झांसी लैब में भेजा। लैब की रिपोर्ट के अनुसार चावल असुरक्षित पाया गया है और यह खाने लायक नहीं है। इसी तरह से छह अगस्त को पूर्व माध्यमिक विद्यालय सोनाड़ी हैंसर बाजार में बन रहे एमडीएम की जांच की गई। यहां पर पकी सब्जी का नमूना लिया और उसे जांच के लिए लैब में भेजा गया। रिपोर्ट में पकी सब्जी अधोमानक (मानक के विपरीत) पाया गया। अभिहित अधिकारी के जरिए दोनों स्कूलों के भोजन की गुणवत्ता की रिपोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग ने रिपोर्ट मिलने के बाद दोनों स्कूूलों के जिम्मेदारों को नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण मांगा है। स्पष्टीकरण खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को भेजा जाएगा।
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